Connect with us

Hi, what are you looking for?

उत्तर प्रदेश

राज्यपाल और KGMU कुलपति को लेकर स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का वरिष्ठ पत्रकार भारत सिंह ने किया समर्थन, बोले- सत्ता और विपक्ष चर्चा करें

Verified Hindi tweet by Swami Prasad Maurya criticizing government actions on universities and admissions; shows profile pic, timestamp '3d', and engagement icons.
Screenshot of a tweet by Swami Prasad Maurya in Hindi, discussing term lengths for a municipal office, constitutional questions, and claims about KGMU and representation for SC/ST/OBC in courts; shows engagement icons and counts (20 comments, 170 retweets, 1K likes).

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा राज्यपाल के कार्यकाल और किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के कुलपति को लेकर उठाए गए सवालों का वरिष्ठ पत्रकार भारत सिंह ने समर्थन किया है। उन्होंने स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का “हार्दिक अभिनन्दन” करते हुए सत्तारूढ़ दल, सत्ता और विपक्ष से इस पर गंभीर चर्चा करने की अपील की है।

स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने हालिया सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि उत्तर प्रदेश में राज्यपाल का सामान्य कार्यकाल पांच वर्ष का होता है, लेकिन पांच वर्ष पूरे होने के बाद भी सात वर्ष तक पद पर बने रहना गंभीर संवैधानिक सवाल खड़े करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कार्यकाल बढ़ाने अथवा पुनर्नियुक्ति का कोई स्पष्ट आदेश नहीं है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

मौर्य ने इसी पोस्ट में KGMU के कुलपति की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोपों का हवाला देते हुए कहा कि कुलपति पर भ्रष्टाचार और आरक्षण नियमों की अनदेखी के आरोप लगने के बावजूद उनकी पुनर्नियुक्ति सवालों के घेरे में है। मौर्य ने सवाल किया कि जब नियुक्तियों में नियम और संविधान का पालन नहीं होगा तो SC/ST/OBC समाज को बराबरी का प्रतिनिधित्व और न्याय कैसे मिलेगा?

एक अन्य पोस्ट में मौर्य ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल पर गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े गर्ल्स हॉस्टल और बॉयज हॉस्टल के मामले में भ्रष्टाचार दिखाई देने पर कार्रवाई करने, लेकिन लखनऊ स्थित KGMU के कुलपति पर भ्रष्टाचार के आरोपों को कथित तौर पर नजरअंदाज करने का आरोप लगाया है। उन्होंने दावा किया कि कुलपति के खिलाफ दर्जनों भ्रष्टाचार के आरोप होने के बावजूद उन्हें दोबारा कुलपति की जिम्मेदारी दी गई।

मौर्य ने अपनी पोस्ट में यह भी सवाल उठाया कि यदि कुलपति के विरुद्ध आरोप हैं तो उन्हें नजरअंदाज कर पुनः जिम्मेदारी दिया जाना राज्यपाल/कुलाधिपति कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि पैनल में अच्छे, योग्य, निर्विवाद और ईमानदार अभ्यर्थियों के होने के बावजूद किसी अन्य योग्य एवं ईमानदार अभ्यर्थी को जिम्मेदारी नहीं दी गई।

इसी संदर्भ में वरिष्ठ पत्रकार भारत सिंह, लखनऊ ने कहा है—

“राज्यपाल को लेकर पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य जी के बयान का हम हार्दिक अभिनन्दन करते हैं। सत्तारूढ़ दल, सत्ता और विपक्ष इस बयान पर चर्चा अवश्य करें।”

भारत सिंह का यह बयान ऐसे समय आया है जब स्वामी प्रसाद मौर्य ने राज्यपाल के कार्यकाल के साथ-साथ KGMU के कुलपति की नियुक्ति और कथित भ्रष्टाचार तथा आरक्षण संबंधी सवालों को सार्वजनिक बहस का विषय बनाया है।

हालांकि, स्वामी प्रसाद मौर्य की सोशल मीडिया पोस्ट में लगाए गए भ्रष्टाचार एवं नियुक्ति संबंधी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इन पोस्टों से नहीं होती है। इसलिए इन आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण संबंधित दस्तावेजों, जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी के निष्कर्षों के आधार पर ही किया जा सकता है।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल कुमार का लिखा देखें-

Punjabi text on a purple background; a motivational quote in white letters.
Teal background with white Hindi text about Gujarat-Maratha and money for buying pomegranate affecting education reform/state education system (informational poster).
Purple screen with two lines of bold white Hindi text in a social media post by Anil Kumar, mentioning a monetary figure (five-six crores).
Screenshot of a Hindi Facebook post by Anil Kumar. He claims someone is spreading false information about him related to the Uttar Pradesh Raj Bhavan and asks others to verify and not trust unverified gossip, urging readers to share and inquire with him directly.

अब पत्रकार अनिल कुमार से कुछ लोगों को परेशानी हो गई है इसलिए वर्दी वाले विभाग को उनके बारे में जानकारी इकट्ठा करने के लिए बोल दिया गया है! भाई वर्दी वाले विभाग को आजकल खूंखार अपराधियों पर काम करने का समय कम मिल रहा है ये लोग आजकल पत्रकारों की फेसबुक पोस्ट और ट्वीट पढ़ने में ज़्यादा व्यस्त रहते हैं! बेहतर तो ये होता सरकार भारत मे फेसबुक, ट्विटर और यूट्यूब आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बैन कर दे ताकि सत्ताधारी लोगों और बेलगाम अधिकारियों को अपनी आलोचना करने वाले पत्रकारों से मुक्ति मिल जाए।

-आलोक पाठक, वरिष्ठ पत्रकार, लखनऊ

Pahad Ki Dada: Hill Mail Uttarakhand
CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन