उत्तर प्रदेश के जनपद पीलीभीत के रहने वाले समाजसेवी अमृत लाल जी ने दिव्यांगजनों के लिए जो काम किया है, वह अपने आप में अप्रतिम है। यहां तक कि उनके इस सेवाभाव के लिए उनका नाम पद्मश्री अवार्ड तक के लिए रिकमेंड किया जा चुका है। इसके लिए बाकायदा जिलाधिकारी पीलीभीत और सांसद साक्षी महाराज ने बाकायदा पत्र लिखकर अमृतलाल जी को पद्मश्री दिए जाने की मांग की है।

पीलीभीत। समाजसेवा अगर सिर्फ दान देने तक सीमित न रहे और किसी जरूरतमंद की जिंदगी बदलने का माध्यम बन जाए तो उसका असर लंबे समय तक दिखाई देता है। पीलीभीत के समाजसेवी और निशक्त जन सेवा संस्थान के अध्यक्ष अमृतलाल वर्षों से इसी सोच के साथ काम कर रहे हैं। गरीब परिवारों के बच्चों के दिल का इलाज कराने से लेकर आंखों के ऑपरेशन, चश्मे और दवाएं उपलब्ध कराने तथा दिव्यांगों को कृत्रिम अंग दिलाने तक उनका सेवा अभियान लगातार जारी है।
अब उनका संस्थान पीलीभीत और आसपास के जिलों के दिव्यांगजनों के लिए बड़ा अभियान चला रहा है। निशक्त जन सेवा संस्थान और इनाली फाउंडेशन के संयुक्त प्रयास से 2 से 5 अक्टूबर तक निःशुल्क कृत्रिम हाथ लगाने का विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा। लक्ष्य करीब 500 जरूरतमंद दिव्यांगजनों को कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराना है। खास तौर पर कोहनी या कंधे के नीचे से हाथ गंवा चुके लोगों को इस सुविधा से जोड़ा जा रहा है।

अमृतलाल के मुताबिक कोशिश यह है कि कोई पात्र दिव्यांग सिर्फ आर्थिक परेशानी या जानकारी के अभाव में इस सुविधा से वंचित न रह जाए। शिविर के लिए पंजीकरण अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 150 से अधिक दिव्यांगजनों का पंजीकरण हो चुका है और इनमें 96 लोगों के कृत्रिम हाथ के लिए इनाली फाउंडेशन से स्वीकृति भी मिल चुकी है।
शिविर की तैयारियों को लेकर अमृतलाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने पीलीभीत के जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह से मुलाकात की। प्रशासन की ओर से भी अभियान को आगे बढ़ाने में सहयोग किया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने पीलीभीत के साथ बरेली मंडल के बदायूं, बरेली और शाहजहांपुर जैसे जिलों में भी जरूरतमंद दिव्यांगों को इस अभियान से जोड़ने के लिए प्रशासनिक मदद मांगी है। डीएम ने मंडलायुक्त से बातचीत कर अभियान का दायरा बढ़ाने की दिशा में प्रयास का भरोसा दिया है।
अमृतलाल की सेवा का दायरा केवल दिव्यांगों तक सीमित नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, निशक्त जन सेवा संस्थान के माध्यम से उन्होंने देशभर के 1,255 बच्चों के हृदय ऑपरेशन कराने में मदद की। ऐसे बच्चों का इलाज कराया गया, जिनके परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं थे।
इसके अलावा लंबे समय से लगाए जा रहे नि:शुल्क चिकित्सा शिविरों के जरिए हजारों जरूरतमंदों तक इलाज पहुंचाने का काम किया गया। उपलब्ध रिपोर्ट में 50 हजार से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन और दो लाख से अधिक लोगों को चश्मे व दवाएं उपलब्ध कराने का उल्लेख है। दिव्यांगजनों के लिए भी कई शिविर लगाए गए, जिनमें कृत्रिम हाथ सहित दूसरे सहायक उपकरण उपलब्ध कराए गए।
कृत्रिम हाथों के क्षेत्र में भी अमृतलाल का काम नया नहीं है। कई साल से अलग-अलग जिलों में शिविर लगाकर दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने का अभियान चलाया जा रहा है। एक पुरानी रिपोर्ट में उनके संस्थान के माध्यम से दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने की पहल का उल्लेख है।
अमृतलाल से जुड़ी सेवा की खास बात यह है कि उनके अभियान का जोर सिर्फ उपकरण देने पर नहीं, बल्कि दिव्यांग व्यक्ति को दोबारा अपने पैरों पर खड़ा करने और रोजमर्रा के कामों में आत्मनिर्भर बनाने पर है। यही वजह है कि इस बार भी कृत्रिम हाथ शिविर के लिए गांव-गांव से पात्र लोगों की पहचान और पंजीकरण कराने की कोशिश की जा रही है।
उनका कहना है कि कई दिव्यांग ऐसे हैं जो कृत्रिम अंग की जरूरत होने के बावजूद आर्थिक स्थिति खराब होने के कारण इसे हासिल नहीं कर पाते। कई लोगों को यह जानकारी ही नहीं होती कि उन्हें मुफ्त कृत्रिम अंग मिल सकता है। ऐसे लोगों तक पहुंचना ही अभियान का सबसे बड़ा उद्देश्य है।
अमृतलाल के इन लगातार चल रहे सेवा कार्यों को देखते हुए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की मांग पहले भी उठ चुकी है। उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, तत्कालीन भाजपा जिलाध्यक्ष संजीव प्रताप सिंह ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर अमृतलाल के नाम पर पद्मश्री के लिए विचार करने की सिफारिश की थी।
आज जब अमृतलाल फिर 500 दिव्यांगों को कृत्रिम हाथ उपलब्ध कराने के अभियान में जुटे हैं, तो उनके वर्षों के काम को एक ही शिविर से नहीं देखा जा सकता। 1,255 बच्चों के हृदय उपचार से लेकर हजारों लोगों के आंखों के इलाज और दिव्यांगों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराने तक उनकी संस्था का काम लगातार जरूरतमंदों के बीच दिखाई देता है।
अमृतलाल का कहना है कि समाजसेवा का असली मतलब तभी है जब मदद वहां पहुंचे जहां उसकी सबसे ज्यादा जरूरत है। इसी सोच के साथ उनका संस्थान अब पीलीभीत से आगे बरेली मंडल के दूसरे जिलों के दिव्यांगों तक भी इस सुविधा को पहुंचाने की तैयारी में है।

अब तक लाभान्वित हुए लोगों की सूची…








