नई दिल्ली। 4PM की पत्रकार शाहीन से जुड़े मामले की कवरेज को लेकर शुरू हुआ विवाद अब लल्लनटॉप और उसके पत्रकार रजत पांडेय के लिए परेशानी का सबब बनता जा रहा है. शाहीन पर एक के बाद एक वीडियो बनाने के बावजूद शुरुआती रिपोर्टों में उनके संस्थान 4PM का नाम न लेने को लेकर उठे सवालों के बीच रजत पांडेय की सफाई ने विवाद खत्म करने के बजाय नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया यूजर्स ने आरोप लगाया कि शाहीन से जुड़े घटनाक्रम पर रजत पांडेय ने कई वीडियो और इंटरव्यू किए, लेकिन उनमें यह महत्वपूर्ण तथ्य नहीं बताया कि शाहीन 4PM की पत्रकार हैं.
सवाल उठने लगा कि जब शाहीन पूरी स्टोरी का केंद्र थीं, तो उनकी पेशेवर पहचान आखिर रिपोर्टिंग से गायब क्यों थी?
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर लोगों ने India Today Group के वरिष्ठ लोगों और अरुण पुरी को टैग करना शुरू कर दिया. कई यूजर्स ने तीखे अंदाज में पूछा कि आखिर 4PM का नाम लेने में लल्लनटॉप को इतनी परेशानी क्यों हो रही है?
इसके बाद लल्लनटॉप की एक ऐसी क्लिप सामने रखी गई जिसमें 4PM का उल्लेख सुनाई देता है. रजत पांडेय ने भी इसे अपनी सफाई के समर्थन में पेश किया.
लेकिन यहीं मामला और उलझ गया.
आलोचकों का कहना है कि सवाल उस बाद के बुलेटिन का है ही नहीं जिसमें कुछ सेकेंड के लिए 4PM का नाम लिया गया. सवाल उन शुरुआती वीडियो का है जो रजत पांडेय ने शाहीन के मामले में बनाए थे. यदि उन वीडियो में 4PM का नाम मौजूद नहीं है तो बाद की किसी क्लिप को दिखाकर मूल सवाल का जवाब कैसे दिया जा सकता है?
सोशल मीडिया पर अब सीधा सवाल पूछा जा रहा है—विवाद खड़ा होने से पहले रजत के वीडियो में 4PM कहां था?
इसी बीच रजत पांडेय ने अपनी सफाई में शाहीन के साथ अपनी मौजूदगी का जिक्र करते हुए बताया कि वह अस्पताल में थे और थाने भी गए थे. संभवतः उनका उद्देश्य यह बताना था कि वह घटना के दौरान शाहीन के साथ खड़े थे.
लेकिन यह दलील भी सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ नए सवाल की वजह बन गई.
आलोचकों का कहना है कि अस्पताल में मौजूद होना अपने आप में “मदद” का प्रमाण कैसे हो गया, जबकि वहां से लल्लनटॉप के लिए वीडियो कवरेज भी की जा रही थी? यदि रजत अस्पताल में शाहीन के साथ-साथ वीडियो बना रहे थे और उस सामग्री को लल्लनटॉप पर प्रकाशित किया जा रहा था, तो उनकी मौजूदगी पत्रकारिता की ड्यूटी और कंटेंट तैयार करने का हिस्सा भी थी.
सोशल मीडिया पर लोग इसी बात को लेकर रजत की सफाई पर सवाल उठा रहे हैं—“अस्पताल में साथ थे या अस्पताल में लल्लनटॉप के लिए वीडियो बना रहे थे?”
आलोचना करने वालों का आरोप है कि शाहीन की मुश्किल घड़ी में भी वीडियो बनाए गए, कंटेंट तैयार हुआ और उससे लल्लनटॉप को व्यू और engagement मिले. ऐसे में बाद में अस्पताल में अपनी मौजूदगी को सहानुभूति या मदद के प्रमाण की तरह पेश करना सवालों से परे नहीं हो सकता.
हालांकि यह आलोचकों का आरोप है और अस्पताल में रजत की भूमिका के बारे में उनका विस्तृत पक्ष सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.
लेकिन इससे एक दूसरा बड़ा सवाल जरूर पैदा होता है.
यदि रजत अस्पताल से लेकर थाने तक शाहीन के इतने करीब थे, उनके साथ लगातार मौजूद थे, उनका इंटरव्यू कर रहे थे और उनके मामले पर वीडियो बना रहे थे, तो क्या उन्हें यह मालूम नहीं था कि शाहीन 4PM की पत्रकार हैं?
अगर मालूम था तो शुरुआती वीडियो में 4PM का नाम क्यों नहीं था?
यही वह सवाल है जिसका स्पष्ट जवाब अब तक सामने नहीं आया है.
विवाद इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि आलोचकों के मुताबिक बाद के किसी बुलेटिन में कुछ सेकेंड 4PM का नाम आने को अब शुरुआती कवरेज के बचाव के तौर पर पेश किया जा रहा है. उनका कहना है कि सही परीक्षण बेहद आसान है—रजत के विवाद से पहले प्रकाशित मूल वीडियो देखे जाएं और बताया जाए कि उनमें 4PM का उल्लेख कहां है.
यदि है तो उसका टाइमस्टैम्प सार्वजनिक कर दिया जाए.
यदि नहीं है तो यह बताया जाए कि क्यों नहीं है.
इस बीच मीडिया हलकों और सोशल मीडिया पर यह चर्चा भी चल रही है कि मामला India Today Group के शीर्ष स्तर तक पहुंचा और इसे लेकर अंदरखाने नाराजगी हुई. अरूण पुरी भी लल्लन टॉप की बदनामी से बहुत नाराज हुए !
लोग तो ये भी कह रहे हैं कि रजत मौजूदा संपादक कुलदीप के बहुत करीब है ! वो खुद कहता है कुलदीप के परिजनों के अस्पताल में भर्ती होने पर पूरी पूरी रात अस्पताल में रहता था ! इस चमचागिरी के एवज़ में फील्ड रिपोर्टिंग में उसके कई बदनाम क़िस्से चर्चा में है !
पूरे विवाद में एक दिलचस्प स्थिति यह बन गई है कि जिस सफाई से विवाद खत्म होने की उम्मीद रही होगी, उसी ने दो नए सवाल पैदा कर दिए.
पहला—रजत के शुरुआती वीडियो में 4PM का नाम क्यों नहीं था?
दूसरा—अगर अस्पताल में उनकी मौजूदगी के दौरान लल्लनटॉप के लिए वीडियो भी बनाए जा रहे थे, तो उस मौजूदगी को अब केवल शाहीन के साथ खड़े होने या मदद करने के रूप में क्यों पेश किया जा रहा है?
पत्रकारिता में किसी घटनास्थल, अस्पताल या थाने पर मौजूद रहकर रिपोर्टिंग करना बिल्कुल सामान्य है. इसमें अपने आप में कुछ गलत नहीं है. लेकिन अगर उसी मौजूदगी से तैयार वीडियो और कंटेंट प्रकाशित हो रहा हो तो बाद में उस मौजूदगी को निजी मदद या सहानुभूति के प्रमाण की तरह पेश करने पर सवाल उठना भी स्वाभाविक है.
यही वजह है कि रजत पांडेय की सफाई के बाद मामला शांत होने के बजाय सोशल मीडिया पर और गर्म होता दिखाई दे रहा है.
अब इस पूरे विवाद का सबसे आसान समाधान भी लल्लनटॉप और रजत पांडेय के पास ही है. उन्हें केवल अपने विवाद से पहले प्रकाशित शाहीन वाले मूल वीडियो सामने रखकर बताना है कि उनमें शाहीन को 4PM की पत्रकार कब और कहां बताया गया था.
क्योंकि बाद में प्रकाशित किसी दूसरे बुलेटिन के कुछ सेकेंड मूल सवाल का जवाब नहीं हो सकते.
फिलहाल सोशल मीडिया पर उठ रहा सवाल बेहद सीधा है—
शाहीन चाहिए थीं, उनकी कहानी चाहिए थी, इंटरव्यू चाहिए था, अस्पताल से वीडियो चाहिए था और उन वीडियो के व्यू भी चाहिए थे—तो यह बताने में आखिर परेशानी क्या थी कि शाहीन 4PM की पत्रकार हैं?
रजत पांडेय का पक्ष नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है-


