नवोदय टाइम्स का पहला पन्ना। लीड वाला यह हिस्सा प्रचारकों की सरकार के लिए सबसे नया – खबर और शीर्षक किसी विज्ञापन से कम नहीं है।
संजय कुमार सिंह
ब्रिक्स सम्मेलन के कारण मेरे सभी अखबारों की खबरों में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का नरेन्द्र मोदी शैली वाला प्रचार है। आत्म निर्भरता, स्वदेशी, वोकल फॉर लोकल और फादरलैंड जैसी बातें करते रहे प्रधानमंत्री आज ब्रिक्स बिजनेस और ट्रेड बैरियर नहीं ट्रेड ब्रिज की बात कर रहे हैं। यह उनकी कार्यशैली है उसमें निरंतरता, गंभीरता ढूंढ़ना मुश्किल है। आलोचना का अब कोई मतलब नहीं रह गया है। मुझे लगता है कि अब इसकी जरूरत भी नहीं है। सत्ता की ताकत पर लोकतंत्र का सबसे निचला बूथ स्तर का अधिकारी किसी से भी नागरिकता साबित करने के लिए कह सकता है। इसलिए मामला भारत माता का नहीं, धरती माता का है। वैसे भी हम अपने स्वार्थ में वसुधैव कुटुम्बकम को कवच की तरह इस्तेमाल कर चुके हैं।
आज दि इंडियन एक्सप्रेस में एक्सप्रेस स्पेशल का शीर्षक है, भारत जब पांच ओरंगुटान शावकों का मूल मालूम करने में लगा है तो इंडोनेशिया उनके प्रत्यर्पण का आधार तैयार कर रहा है। हमारे यहां नागरिकों के प्रत्यर्पण में भी राजनीति चलती रही है। अभी उसकी बात नहीं करूंगा लेकिन इंडोनेशिया की प्रशंसा बनती है कि वह अपने ओरंगुटान शावकों को वापस पाने की तैयारी कर रहा है। इतनी चिन्ता तो हम अपने नागरिकों की नहीं करते, भगोड़े हों या होर्मुज में मार दिए गए नाविक। संभव है कि मामला उतना गंभीर न हो जितना शीर्षक के कारण लग रहा है। अगर ऐसा है तो शीर्षक भी प्रशंसनीय है। जो नहीं जानते उनके लिए ओरंगुटान शावकों का मामला संक्षेप में यह है कि ओडिशा के बालासोर जिले (बिचित्रपुर/रणकथा जंगल) की है।
ओरंगुटान के पांच बच्चे मिले हैं। एक साल से कम उम्र के 5 शावकों (3 नर और 2 मादा) को तस्करी के जरिए लाए जाने की आशंका है। ये मुख्य रूप से इंडोनेशिया, मलेशिया, बोर्नियो और सुमात्रा के जंगलों में पाए जाते हैं। इसलिए आशंका जताई जा रही है कि इन्हें अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट के जरिए लाया गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमत ₹20 से ₹25 लाख प्रति शावक बताई जा रही है। मामला सामने आने के बाद खबर थी कि भुवनेश्वर स्थित नंदनकानन प्राणी उद्यान भेजा गया है, जहाँ उन्हें विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख में क्वारंटाइन करके रखा गया है। ओडिशा सरकार और वन विभाग ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। कोस्ट गार्ड और अन्य एजेंसियां भी तस्करी के रूट का पता लगाने में जुटी हैं।
मुझे लगता है कि यह काम और चिन्ता उसकी होनी चाहिए जिसके यहां से तस्करी हुई है। अगर वह चाहे तो हम उसकी मदद कर सकते हैं। बाकी अपना देखें ओरंगुटान जिसके हैं उसे लौटाने की कोशिश हमें भी करनी चाहिए थी। बंगाल समेत देश के कुछ राज्यों में उपचुनाव की घोषणा हो चुकी है। उपचुनाव ज्यादातर विधानसभा की सीटों पर है एक असम का लोकसभा क्षेत्र भी है। भिन्न कारणों से बंगाल में चुनाव का खास महत्व है। तृणमूल को तोड़ने कुचलने की कोशिश, ऑपरेशन लोटस का फंस जाना, टीएमटी के विधानसभा सदस्यों में बगावत और पार्टी पर कब्जे की कोशिशों के बीच टीएमसी के मुस्लिम सांसद के घर ईडी का छापा और सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने पर अभिषेक बनर्जी के सचिव को कल गिरफ्तार किया जाना बड़े मामले हैं लेकिन इनकी चर्चा पहले पन्ने पर नहीं है।
आज देशबन्धु में एक खबर है, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के खास आईएएस देबाशीष शर्मा का सियासी सफर शुरू। मुख्य शीर्षक है – तीन को वीआरएस, छह को भाजपा में शामिल, 11 को लोकसभा टिकट। वैसे तो इसमें कुछ गलत नहीं है लेकिन खबर तो है ही। खासकर इसलिए कि चुनाव से पहले मुख्यमंत्री (की पत्नी) पर कुछ आरोप लगे थे। अगली दिन असम पुलिस के कई लोग पवन खेड़ा को ढूंढ़ते दिल्ली आ गए थे। मुख्यमंत्री ने खुलेआम कहा था, खेड़ा को पेड़ा बना दूंगा। पर क्या हुआ, पता नहीं है। जांच गुजरात की अनजानी पार्टियों को 4000 करोड़ रुपए के चंदे की भी नहीं हुई लेकिन टीएमसी के खाते में पैसे जमा होने की जांच चल रही है। मुझे लगता है कि जो जांच चल रही है उसका विवरण आयकर विभाग और चुनाव आयोग को देने का नियम है और उसके लिए समय है।
हिन्दुस्तान टाइम्स में एक खबर है, बाधाएं बढ़ / ऊंची हो रही हैं लेकिन भारत पुल बना रहा है : मोदी (Barriers rising, but India is building bridges: Modi)। कहने-सुनने में यह निश्चित रूप से अच्छा लगता है लेकिन बाधाएं क्यों बढ़ रही हैं उसपर कुछ नहीं है। भारत बाधाओं से निपटने की तैयारी कर पा रहा है ऐसा लग नहीं रहा है। ना पुल बनाने से बाधाएं दूर होती हैं। खबर में कहा गया है, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ब्रिक्स बिज़नेस फोरम में कहा कि भारत का ध्यान व्यापार की बाधाओं को कम करने और बिज़नेस के मौके बढ़ाने पर है। यह बयान इसलिए भी अहम है कि पिछले 18 महीनों में ग्लोबल ट्रेड में कई रुकावटें आई हैं—पहले टैरिफ पर अमेरिका के कदमों की वजह से, और फिर पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण, जिसने एनर्जी सप्लाई के लिए एक अहम शिपिंग रूट को ठप कर दिया। यह चीन, रूस या ब्रिक्स देशों से रिश्ते सामान्य करने की मजबूरी या जरूरत हो सकती है लेकिन भारत सरकार ने जून 2020 में 59 चीनी ऐप्स आदि पर अचानक बैन लगा दिया था। बाद के चरणों में कुल 200 से अधिक ऐप्स पर बैन विस्तारित किया गया।
टाइम्स ऑफ इंडिया में पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने की लीड के अनुसार, पंजाब हाईकोर्ट ने कहा है कि ऑपरेशन ब्लूस्टार के दौरान खोई या नष्ट हुई दुकानों के लिए राहत दी जाए। आप जानते हैं कि ऑपरेशन ब्लूस्टार 1984 में हुआ था। उसके बदले राहत का मामला अभी तक नहीं निपटा है तो यह भी बड़ी खबर है और नागरिकों के एक वर्ग की स्थिति बताती है। द हिन्दू में पहले पन्ने पर एक विज्ञापन है, डेरा सच्चा सौदा क्या है (तथ्य बनाम कल्पना)। इसमें एक सवाल है, क्या संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इंसान को दी गई जमानत और फर्लो वीआईपी ट्रीटमेंट है? जवाब है, नहीं, बिल्कुल नहीं। पूरे एक पन्ने के इस विज्ञापन में बहुत सारी बातें हैं। जाहिर है, विज्ञापन के रूप में है तो डेरा सच्चा सौदा का अपना पक्ष है। नीचे यह डिसक्लेमर भी है कि इसमें द हिन्दू की कोई संपादकीय या पत्रकारीय भागीदारी नहीं है तथा प्रकाशित सामग्री के लिए वह किसी भी तरह जिम्मेदार या जवाबदेह नहीं है।
तथ्य है कि इस विज्ञापन के जरिए जो किया गया है उसपर विचार किया जाना चाहिए। खासकर तब जब अदालत के आदेश पर गुरु जी की गिरफ्तारी को साजिश कहा जा रहा है और बार-बार जमानत-फर्लो मिलने को वीआईपी ट्रीटमेंट नहीं माना जा रहा है। दूसरी ओर, शर्जिल इमाम और उमर खालिद छह साल से बिना बिना चार्जशीट जेल में बंद हैं। द हिन्दू की लीड का शीर्षक है, पुतिन से मुलाक़ात में मोदी ने कहा – यूक्रेन युद्ध खत्म हो। उपशीर्षक है, ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से पहले हुई मुलाक़ात में दोनों नेताओं ने रक्षा, ऊर्जा, अंतरिक्ष और अन्य क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की; प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत शांति प्रयासों में मदद के लिए तैयार है और बातचीत ही आगे बढ़ने का रास्ता है। उल्लेखनीय है कि हाल के महीनों में भारत ने कुल ₹1,62,000 करोड़ (1.62 लाख करोड़ रुपये) की रक्षा खरीद की योजना को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है। यह अलग बात है कि बड़ी खरीद स्वदेशी भारतीय रक्षा उद्योग से की जाएगी।
बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद पहली बार दूर्गा पूजा का आयोजन होने वाला है। चुनाव से पहले ही कहा गया था कि भाजपा सत्ता में आई तो शाकाहार को बढ़ावा दिया जाएगा जो बंगाल के लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है। मिड डे मील में अंडे बंद करने से विवाद हो चुका है अब पूजा पंडाल में शाकाहार का विवाद है। द हिन्दू में आज छपी खबर के अनुसार, बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गा पूजा पंडालों से “मांसाहारी खाना दूर रखने” की अपील की है और इसपर विवाद चल रहा है। इस क्रम में बंगाल कांग्रेस नेता, अतनु दास गिरफ्तार किए गए हैं। उन्होंने शाकाहारी पूजा की अपील के खिलाफ प्रदर्शन किया था। दि एशियन एज की खबर के अनुसार, भाजपा चाहती है कि शाकाहारी- गैरशाकाहारी का विवाद खत्म हो। इसलिए मुख्यमंत्री शुवेन्दू अधिकारी ने गुरुवार को कालीघाट मंदिर के अपने दौरे के दौरान भोग के रूप में मछली का सेवन किया।
इससे पहले 8 सितंबर को भवानीपुर पुलिस स्टेशन के बाहर बागेश्वर धाम के मुख्य पुजारी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीरें जलाई गई थीं। गुरुवार यानी 10 सितंबर को श्री अधिकारी ने विधानसभा में धार्मिक उपदेशक का बचाव किया था और पुलिस को उन लोगों को गिरफ्तार करने का निर्देश दिया था जो उनकी टिप्पणियों का विरोध कर रहे थे। इस पर विपक्षी दलों ने विरोध जताया था लेकिन कांग्रेस नेता को गिरफ्तार कर लिया गया है। द टेलीग्राफ की खबर के अनुसार, अतनु दास पर गैर जमानती धाराएं लगाई गई हैं जो धार्मिक भावनाओं को आहत करने आदि से संबंधित हैं। अदालत में साबित हो जाए तो पांच साल तक की सजा हो सकती है। दैनिक भास्कर की खबर के अनुसार, गणेश उत्सव के दौरान पुणे में शराब बिक्री पर रोक लगाए जाने को लेकर बांबे हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस महेन्द्र चंद्र त्रिपाठी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना की बेंच ने कहा, यह नहीं माना जा सकता है कि शराब पीने वाला हर व्यक्ति सड़कों पर उपद्रव करेगा या कानून-व्यावस्था की समस्या पैदा करेगा। बिना तार्किक आधार वाली ऐसी पाबंदी को अनुमति नहीं दी जा सकती है।
अमर उजाला की लीड का उपशीर्षक है, मोदी बोले – भारत में स्टार्टअप क्रांति हो रही है। ब्रिक्स के जरिए पूरी दुनिया तक पहुंचना है। कहने की जरूरत नहीं है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार स्टार्ट-अप को लेकर 15 अगस्त 2015 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में सार्वजनिक घोषणा की थी। उन्होंने देश के युवाओं को नौकरी चाहने वाले की जगह नौकरी देने वाला बनने का आह्वान किया। उन्होंने घोषणा की थी कि देश की 1.25 लाख से अधिक बैंक शाखाएँ कम से कम एक दलित, आदिवासी और महिला उद्यमी को स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए लोन देंगी। इसके बाद 16 जनवरी 2016 को औपचारिक ‘स्टार्टअप इंडिया एक्शन प्लान’ लॉन्च किया गया था। 10 साल में मुझे पता नहीं है कि कितने स्टार्ट अप शुरू हुए, कौन से खास हैं, कितने लोग इनमें लगे हैं, कितने लोगों को काम मिला, क्या उत्पाद तैयार होता है, कहां खपत होती है, क्या राजस्व है आदि। यह योजना भी कौशल विकास योजना के रास्ते गई लगती है। उसमें हजारों करोड़ के भ्रष्टाचार की खबर आई थी, कोई स्पष्टीकरण या आगे का विवरण नहीं आया।
यही नहीं, लाखों शेल कंपनियां बंद की गई हैं, एफसीआरए कानून को सख्त किए जाने के कारण विदेशी चंदा और दान लेना मुश्किल हुआ है। इससे गैर सरकारी संस्थान चलाकर देश-समाज की सेवा करने वालों के लिए अपना घर चलाना भी मुश्किल हो गया है। इनके यहां जो लोग नौकरी करते थे वे अलग बेरोजगार हैं। समाजसेवा, पत्रकारिता और मीडिया संस्थान चलाने जैसे काम आसान हुए हैं तो जीएसटी के बाद सरकारी कार्यालयों और बाबुओं की जो हालत है उसमें व्यवसाय करना भी मुश्किल हुआ है। पर प्रधानमंत्री कुछ और प्रचार कर रहे हैं।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


