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सुख-दुख

दुनिया के सबसे बड़े खोजी पत्रकार की वापसी सुखद है!

Bearded man in a light shirt stands on a busy city street beside a large mural portrait of a man, with screenshots of tweets about his return above.

प्रकाश के रे-

हमारे दौर के महानतम पत्रकार और सच की हिमायत में अपना सब होम करने वाले जूलियन असांज की वापसी की ख़बर अत्यंत सुखद है. कोई दो दशक पहले जब उन्होंने विकिलीक्स की शुरुआत की थी, तो तमाम बड़े मीडिया मंच उनके रिपोर्ट को साझा करते थे. फिर इस दुनिया में एक भयंकर हादसा हुआ- बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति बने.

असांज और विकिलिक्स पर शिकंजा कसना शुरू हुआ. इस काम में अमेरिका एवं यूरोप की उदारवादी और सोशल डेमोक्रेट सरकारें आगे रहीं.

विकिलीक्स का खाता बंद किया गया, असांज पर सेक्सुअल अपराध के झूठे आरोप लगाए गए, लंदन में इक्वाडोर दूतावास से कुछ अरब डॉलर के घूस के बदले उनको गिरफ़्तार कराया गया, इंग्लैंड के सबसे बदनाम जेल में अमानवीय तरीक़े से क़ैद रखा गया. असांज को मारने की कोशिश होती रही.

असांज और विकिलिक्स नष्ट होने वाले थे.

पर, अमेरिका और यूरोप के प्रतिष्ठित पत्रकारों एवं कार्यकर्ताओं, जिनमें दक्षिणपंथी भी शामिल थे, के प्रयास से असांज ब्रिटेन की काल कोठरी से आज़ाद हुए, अमेरिका के साथ समझौते में उन्होंने एक अपराध कबूला और आस्ट्रेलिया के पास हिन्द महासागर में अमेरिकी दख़ल वाले द्वीप पर असांज को रिहा करने का आदेश दे दिया गया.

इस प्रकरण में आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री अल्बानीज़ की भी बड़ी भूमिका रही थी.

उस दौर में हम असांज के केवल प्रशंसक नहीं थे, उनके बहुत छोटे सहयोगी भी थे. हमने शुरू से अब तक उनकी वकील रहीं जेनिफ़र रॉबिन्सन को कोई सवा दशक पहले दिल्ली आमंत्रित भी किया था.

असांज का फिर से सक्रिय होना एक बड़ी बात है. स्वागत किया जाए.

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