ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रचार के बावजूद। टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स का झगड़ा आज हिन्दी अखबारों में भी प्रमुखता से है। भले यह झगड़ा आपसी लग रहा है लेकिन इसके केंद्र में लिस्टिंग का भारतीय रिजर्व बैंक का आदेश है। इससे पहले समूह के ट्रस्ट को लेकर परेशान किया जा चुका है। समझने वाली बात यह है कि टाटा जैसे उद्योग समूह को यह सब झेलना पड़ रहा है तो नए और अपेक्षाकृत छोटों का क्या हाल होगा। देश की खराब औद्योगिक स्थितियों के लिए क्या सरकार भी जिम्मेदार है?
संजय कुमार सिंह
बनारस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन और सार्वजनिक जीवन के 25 साल पूरे होने पर शुरू की गई ‘सेवा संकल्प यात्रा’ के लिए 500 नई मोटर साइकिलें (बाइक्स) मंगाई गई थीं। पहले की खबरों में कहा गया था, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर से यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। आज खबर है, काशी से गुजरात के वडनगर तक एक भव्य ‘सेवा संकल्प यात्रा’ निकाली गई है। इस अभियान के तहत 250 बाइक्स पर सवार 500 युवा/बाइकर काशी से रवाना हुए हैं, जो लगभग 20 दिनों में 1,000 से अधिक गांवों से गुजरते हुए प्रधानमंत्री के जन्मस्थान वडनगर पहुंचेंगे। पहले खबर 500 मोटर साइकिलों की थीं जा 250 ही रही हैं। अब 500 बाइकर्स हो गए हैं। 250 मोटर साइकिलों का हिसाब नहीं है, खबर भी नहीं है।
दोनों खबरें aajtak.in की हैं। अब 250 मोटर साइकिलों पर 500 बाइकर्स की बात है और आज यह खबर नहीं के बराबर है। लाइव हिन्दुस्तान डॉट कॉम ने सैकड़ों नई बाइक्स पहुंचने के शीर्षक से बताया था कि 500 मोटर साइकिलें पहुंच गई हैं। आज रैली शुरू होने की खबर अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं है। जन्म दिन मनाने के सरकारी आदेश और सरकारी स्तर पर जन्म दिन मनाने की खबरें हैं लेकिन वह सब आम तौर पर पहले पन्ने पर नहीं है। अकले नवोदय टाइम्स अपवाद है जिसमें ये सब खबरें कुछ ज्यादा ही हैं। इन खबरों में एक खबर यह भी है कि दिल्ली की मुख्य मंत्री रेखा गुप्ता ने आशीर्वाद का दीया जलाया।
आप जानते हैं कि प्रधानमंत्री 76 साल के हैं और मुख्यमंत्री 52 साल की। इसमें आशीर्वाद का दीया अटपटा लगता है। खबर में लिखा है, आशीर्वाद का दीया जलाकर पीएम मोदी के लिए आशीर्वाद की प्रार्थना ईश्वर से की। यह भी खबर है कि राहुल गांधी से लेकर पुतिन, मेलोनी, नेतन्याहू ने बधाई दी। अमेरिकी सदन से रूस पर प्रतिबंध वाला विधेयक पास शीर्षक खबर तो है ही विदेश मंत्रालय का जवाब भी है। कुल मिलाकर, कहा जा सकता है नवोदय टाइम्स में जन्म दिन की खबरों के साथ सरकार के प्रचार की खबर भी है। दूसरे अखबार में सरकार का प्रचार तो है, जन्म दिन थोड़ा कम है। आइए, देखें कैसे?
अमर उजाला में लीड का शीर्षक है, टैरिफ पर अमेरिका को दो-टूक भारत अपने हित खुद तय करेगा। शीर्षक से लगता है कि भारत की ओर से किसी ने ऐसा कहा होगा। पर खबर पढ़ने से पता नहीं चलता है कि ऐसा किसने कहा। नवोदय टाइम्स ने लिखा है, विदेश मंत्रालय ने कहा। वैसे, सरकार की तरफ से बर्थ डे स्पेशल खबर प्रधानमंत्री ने ही दी है। नवोदय टाइम्स में यह लीड है। शीर्षक है, भारत को चिप निर्माण का भरोसेमंद केंद्र बनाने के लिए उठा रहे कदम। यह खबर अमर उजाला में पहले पन्ने पर तो है लेकिन पिट गई है।
दैनिक भास्कर में पहले पन्ने पर नहीं है। दूसरी ओर, टाटा संस का मामला आज कई अखबारों में प्रमुखता से है। दैनिक भास्कर के शीर्षक का एक हिस्सा है, टाटा संस में टाटा परिवार की ही नहीं चली। इसे सरकार की घोषणा, और उद्योग धंधे के मामले में देश की स्थिति के साथ देखेंगे तो यह ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का सच भी लगता है। दैनिक भास्कर का मुख्य शीर्षक है, नोएल का वीटो खारिज, चंद्रशेखर अपने ही वोट से चेयरमैन। इसके साथ एक खबर है, एक महीने में पूरा मामला ऐसा पलटा। इसके साथ की एक खबर का शीर्षक है, टाटा में चंद्रशेखरन इसलिए अहम।
यहां उल्लेखनीय है कि जनवरी 2022 में एयर इंडिया के अधिग्रहण के बाद, टाटा समूह ने इल्कर आयसी को एयर इंडिया का मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक नियुक्त करने की घोषणा की थी। इल्कर आयसी तुर्की एयरलाइंस के पूर्व चेयरमैन रह चुके हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच ने इल्कर आयसी की नियुक्ति पर कड़ा ऐतराज जताया था और सरकार से राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में उन्हें सुरक्षा मंजूरी न देने की मांग की थी। अंततः वही हुआ। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के बावजूद।
अभी की स्थिति यह है कि रतन टाटा के निधन के बाद टाटा संस में उनके (आधे) भाई नोएल टाटा का वीटो खारिज हो गया (दैनिक भास्कर)। इसे उन्होंने गैर कानूनी बताया है (अमर उजाला)। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने से पहले क अधपन्ने की लीड है। शीर्षक है, टाटा में उथल-पुथल: ट्रस्ट्स का कहना है कि एन चंद्रशेखर का यू-टर्न अमान्य है। इसके साथ छपी खबर का शीर्षक है, नोएल ने आईपीओ रोकने की धमकी दी, तीन साल का समय मांगा। खबर के अनुसार, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने गुरुवार को टाटा संस बोर्ड से कहा कि वह कंपनी को लिस्ट करने के किसी भी फैसले को रोक देंगे। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर लिस्टिंग ज़रूरी ही है, तो ग्रुप की होल्डिंग कंपनी को आरबीआई से ज़रूरी शर्तें पूरी करने के लिए कम से कम तीन साल का समय मांगना चाहिए। उनका यह बयान टाटा संस के उस दावे को चुनौती देता है जिसमें कहा गया था कि बोर्ड ने “आरबीआई के लागू नियमों का पालन करने की दिशा में कदम उठाने” का फैसला किया है।
टाटा ट्रस्ट्स की ओर से बाद में जारी बयान के मुताबिक, नोएल ने बोर्ड से कहा, “अगर मुझे वोट देने के लिए मजबूर किया गया, तो मेरे पास लिस्टिंग के ऐसे किसी भी फैसले को वीटो करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचेगा।” नोएल ने कहा, “लिस्टिंग से कंपनी का स्वरूप खत्म हो जाएगा और यह इस सिद्धांत की मूल भावना पर चोट करेगा।”
टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर लीड है और शीर्षक है, बुरी तरह बंटा हुआ टाटा (समूह)। दि इंडियन एक्सप्रेस में भी यह खबर लीड है और भले ही मामला आंतरिक टकराव का नजर आ रहा है लेकिन मुद्दा लिस्टिंग का ही है। टाटा समूह को इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक ने मजबूर किया है। द हिन्दू में भी यह खबर पहले पन्ने पर दो कॉलम में छपी है। दि एशियन एज में यह खबर टॉप पर तीन कॉलम में है। द टेलीग्राफ में यह छह कॉलम की लीड है। शीर्षक है, चंद्रशेखर को लेकर टाटा संस और ट्रस्ट्स बंटे।
चितंन बैठक का पता नहीं
कल शाम आई एक खबर महत्वपूर्ण है। इसके अनुसार, पीएम मोदी 23 और 24 सितंबर को मंत्रियों के साथ दिल्ली में ‘चिंतन बैठक’ करेंगे। इसके लिए सभी मंत्रियों से कहा गया है कि वो दिल्ली में ही रहें। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से ये जानकारी दी है। सूत्रों की खबर वैसे तो महत्वपूर्ण नहीं होती है लेकि यह मामला महत्वपूर्ण है। अगर ऐसी कोई बैठक है तो उसकी घोषणा होनी चाहिए नहीं है तो सूत्र गलत क्यों बता रहे हैं उसकी पड़ताल होनी चाहिए। पर अब यह सब नहीं होता है।
जनता अदालत की शरण में
ऐसी खबरों में आज देशबन्धु की लीड सबसे अलग है। आप जानते हैं कि सुप्रीम कोर्ट में कई साल से हिंसा चल रही है। अब खबर है, सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार को फटकार लगाई और राहत शिविरों में मौतों पर जवाब मांगा है। खबर के अनुसार, आठ जिलों के राहत शिविरों में अब तक 640 मौतें दर्ज की गई हैं। आज पहले पन्ने पर कई खबरें हैं जो बताती हैं कि जनता सरकार के काम से नाराज है और अदालत की शरण लेने को मजबूर है। ऐसी ही खबरों में एक है, दिल्ली एसआईआर का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। दूसरी खबर दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में हिंसा से संबंधित है। खबर के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने डूसू चुनाव हिंसा पर नाराजगी जताई।
अदाणी के लिए टेंडर की शर्तें बदलीं
देशबन्धु की खबर के अनुसार, कांग्रेस ने उत्तराखंड सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इसके अनुसार, अदाणी के लिए सरकार ने टेंडर की 84 शर्तें बदली हैं। आरोप यह भी है कि भाजपा की सरकारें देश भर में अदाणी को फायदा पहुंचाने के लिए काम कर रही हैं। यही नहीं, बालाघाट में 30 से ज्यादा बच्चों की मौत का मामला काफी समय से चर्चा में है। इस पर भी राज्य सरकार की कार्रवाई और योजना का स्पष्ट खुलासा नहीं है।
मुठभेड़ में दो आतंकवादी मारे गए
जम्मू कश्मीर में आतंकवाद खत्म करने के दावे के बाद दो आतंकवादियों के मारे जाने की खबर गंभीर है। मारे गए आतंकवादियों के पास से हथियार और गोला बारूद भी बरामद किए जाने की खबर हुई है जबकि इनकी पहचान नहीं हो पाई है। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में आतंकवादी की मौजूदगी की संभावना को खत्म करने के लिए सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
लद्दाख सीमा पर सतर्कता
चीन की सेना में कमी के बावजूद लद्दाख सीमा पर तनाव है। ब्रिक्स सम्मेलन में चीन के प्रमुख सात साल बाद भारत आए थे। प्रचार पूरा था लेकिन सीमा पर तनाव कम करने के लिए क्या हुआ नहीं बताया गया है। आम तौर पर खबरें भी नहीं होती हैं। आज
देशबन्धु में छपी सुरेष एस डुग्गर की खबर के अनुसार, पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर 2020 के गलवान संघर्ष के बाद बनी सैन्य सतर्कता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। भारतीय सेना की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने 2025 में एलएसी पर अपनी तैनाती में कमी की है और अब करीब 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड स्तर की सैन्य टुकड़ियां एलएसी के सामने और पारंपरिक प्रशिक्षण क्षेत्रों में मौजूद हैं। इसे पूर्ण डी-एस्केलेशन नहीं माना जा रहा। हाल के आकलनों के अनुसार चीन की ओर अब भी करीब 50 हजार सैनिक एलएसी के विभिन्न हिस्सों में तैनात बताए जाते हैं। इसके साथ ही दोनों देशों ने अग्रिम इलाकों में भारी सैन्य ढांचे और तेजी से सैनिक पहुंचाने की क्षमता बनाए रखी है।
एनसीआर में कानून व्यवस्था
हिन्दुस्तान टाइम्स की एक खबर के अनुसार चार किशोरों ने मिलकर एक लड़की से सामूहिक बलात्कार किया और हत्या करके लाश फेंक दी। शव 13 सितंबर को मिला था और कल चारो अभियुक्त गिरफ्तार कर लिए गए। एक अन्य खबर के अनुसार, दिल्ली विश्वविद्यालय के सेंट स्टीफंस कॉलेज के एक छात्र ने द्वारा ई-वे पर चार मजदूरों को कार से कुचल दिया। इनमें तीन मर गए। चालक भी गंभीर रुप से घायल हुआ है। दुर्घटना रात के 2.30 बजे हुई। मजदूर सड़क पर काम कर रहे थे।
मरने का लाभ लेने के बाद मुफ्त राशन
मृत्यु लाभ लेने के बाद, ओडिशा के 2,500 मज़दूर राशन लेने वापस आए। उड़ीशा की कल्याणकारी व्यवस्था को धोखा देने की कोशिश में, लगभग 2,500 कंस्ट्रक्शन मज़दूरों ने मौत के नियमों को ही चुनौती दे दी है। कागज़ों पर इनकी मौत हो चुकी है। मृत्यु पर मिलने वाले लाभ ले चुके हैं (या दिए जा चुके हैं)। यही लोग अपने आधार को वेरिफाई कराने और अपना महीने का राशन लेने के लिए वापस ज़िंदा हो गए। एक ऑडिट से इस अजीब और बड़े फ्रॉड का खुलासा हुआ है, जो राज्य की निर्माण श्रमिक वेलफेयर स्कीम के तहत हुआ है। कुल 2,487 कंस्ट्रक्शन मज़दूरों को मृत घोषित कर दिया गया था और उनके नॉमिनी को मौत पर मिलने वाली मदद की रकम दी गई थी, जबकि अपनी मौत के रिकॉर्ड के बाद भी ये मज़दूर नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (NFSA) और स्टेट फूड सिक्योरिटी स्कीम के तहत सब्सिडी वाला अनाज लेते रहे।

मैं रोज चार हिन्दी और छह अंग्रेजी, कुल दस, कई बार इससे भी ज्यादा अख़बार देखकर उसकी खास बातें लिखता हूँ। अंग्रेजी की खबरों के खास अंशों का अनुवाद करता हूं। वह भी लिखता हूं जो अखबार नहीं लिखते या नहीं लिख सकते हैं। जो लिखता हूं उसमें बहुत कुछ याद से लिखा होता है। एआई का सहयोग होता है। कुछ अंग्रेजी अखबारों की खबरों का अनुवाद होता है। इसलिये भूल-चूक की आशंका है। कृपया कहीं उल्लेख करने या हवाला देने से पहले अपने स्तर पर पुष्टि कर लें।


