मनीष दुबे-
टीवी न्यूज की दुनिया में नए शो के नाम पर एक और बड़ा ऐलान हुआ है। टाइम्स नाउ नवभारत पर एंकर अमीश देवगन अब ‘धुरंधर’ लेकर आ रहे हैं। शो का प्रसारण 2 नवंबर 2026 से सोमवार से शुक्रवार शाम 6:50 बजे होगा।
शो के प्रोमो में ‘मिलते हैं मैदान में’ का संदेश दिया गया है। लेकिन इस नए शो को लेकर दिलचस्पी सिर्फ इसके नाम और समय को लेकर नहीं है। असली सवाल यह है कि क्या ‘धुरंधर’ सत्ता से असहज सवाल पूछने वाला कार्यक्रम बनेगा या फिर सरकार की छवि चमकाने वाली टीवी पत्रकारिता का एक और मंच? खासकर तब, जब पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान के साथ तनाव और भारत की सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दों पर टीवी चैनलों की कवरेज को लेकर सरकार के पक्ष में जरूरत से ज्यादा आक्रामक और बढ़ा-चढ़ाकर नैरेटिव पेश करने की आलोचना होती रही है।
ऐसे में अमीश देवगन के नए शो की असली परीक्षा उसके तेवर से ज्यादा उसके सवालों में होगी।
अमीश देवगन सितंबर 2026 में नेटवर्क18 छोड़कर टाइम्स नेटवर्क पहुंचे थे। उन्हें टाइम्स नाउ नवभारत का मैनेजिंग एडिटर बनाया गया। इससे पहले वह करीब दस साल तक नेटवर्क18 से जुड़े रहे और न्यूज18 इंडिया पर प्राइम टाइम शो ‘आर-पार’ की एंकरिंग करते थे। उन्होंने 2016 में नेटवर्क18 जॉइन किया था। इससे पहले वह जी मीडिया के साथ लंबे समय तक जुड़े रहे। उनके पत्रकारिता करियर की शुरुआत 2002 में हिंदुस्तान टाइम्स से हुई थी। जी बिजनेस में उन्होंने डिप्टी एडिटर, एडिटर आउटपुट, एडिटर स्पेशल प्रोजेक्ट्स और चीफ एडिटर जैसी जिम्मेदारियां संभालीं।
अमीश देवगन का नाम विवादों से भी जुड़ा रहा है। जून 2020 में न्यूज18 इंडिया के उनके कार्यक्रम ‘आर-पार’ में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद हुआ था। इस मामले में कई एफआईआर दर्ज हुईं। देवगन ने बाद में सफाई देते हुए माफी मांगी थी और कहा था कि वह चिश्ती की जगह खिलजी कहना चाहते थे। दिसंबर 2020 में सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द करने से इनकार कर दिया था, हालांकि जांच में सहयोग की शर्त पर गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण दिया था।
अब ‘धुरंधर’ के जरिए अमीश देवगन एक नए चैनल पर अपनी प्राइम टाइम पारी शुरू करने जा रहे हैं। शो का नाम भले ही धुरंधर हो, लेकिन दर्शकों की निगाह इस बात पर रहेगी कि इसमें सत्ता से सवाल पूछने का कितना दम है। क्या प्रधानमंत्री और सरकार के फैसलों पर भी उसी तीखेपन से सवाल होंगे, जिस तीखेपन से विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया जाता है? क्या चीन और पाकिस्तान जैसे मुद्दों पर भी तथ्यों को प्राथमिकता मिलेगी या राष्ट्रवाद के नाम पर स्टूडियो में शोर ही खबर बनता रहेगा?
फिलहाल शो शुरू होने से पहले ही इसकी पत्रकारिता की दिशा पर सवाल उठना स्वाभाविक है। असली फैसला दर्शक इसके प्रसारण के बाद करेंगे। देखना यह है कि ‘धुरंधर’ सत्ता से सवाल करने वाला शो साबित होता है या सरकार की तारीफों के टेलीविजन में एक नया अध्याय जोड़ता है।

