पुष्य मित्र-
पिछले दो दिनों की दो तस्वीरें तो यही इशारा कर रही है कि बिहार में हाल के दिनों में प्रशासन की पकड़ लगातार कमजोर हो रही है।
पहली तस्वीर में मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा हैं, महिलाओं ने जिनका गिरेबान धर रखा है। पुलिस ने मुश्किल से इन्हें छुड़ाया। मामला यह था कि बलिराजगढ़ में चल रही पुरातात्विक खुदाई की देख रेख के लिए तैनात एक ASI का किसी स्थानीय महिला से कथित तौर पर विवाहेत्तर संबंध था, लोगों को पता चला तो भीड़ इकट्ठा हो गई। ASI ने खिड़की से अपने सर्विस रिवॉल्वर से गोलियां चला दी। एक आदमी मारा गया, कुछ घायल हैं। डीएम साहब उग्र भीड़ को समझाने पहुंचे तो उनका यह हाल हो गया। ASI फरार है, उस पर 25 हजार का इनाम रख दिया गया है।
दूसरी घटना मुजफ्फरपुर की है। सड़क की खुदाई में PNG पाइपलाइन फट गया। देर रात रिसाव हुआ, कई घर गिर गए। एक की मौत और कई घायल हो गए। सड़क की खुदाई हो रही है, यह PNG वालों को पता नहीं था। नियम जमीन के दो मीटर भीतर पाइपलाइन खोदने का था, पाइपलाइन महज एक मीटर नीचे थे।
ये दोनों उदाहरण क्या प्रशासनिक अराजकता की तरफ बढ़ते बिहार का इशारा नहीं दे रहे? न आपसी तालमेल है, न किसी का किसी पर नियंत्रण।
अपडेट- अभी पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव ने संबंधित महिला से बातचीत करके जानकारी दी है कि महिला नाबालिग है, 17 साल की है और वह किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर रही है.
प्रवीण शाही-
मधुबनी के डीएम आनंद शर्मा की यह तस्वीर बताती है कि यूपीएससी किन गुणों वाले अधिकारियों का चयन करता है। एक महिला आक्रोश में उनका कॉलर पकड़ रही थी, लेकिन डीएम साहब ने उसके गुस्से को समझते हुए उसे प्रणाम किया। अपमान सहने के बावजूद मुस्कुराते रहे, हाथ जोड़कर लोगों से बातचीत की और जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं।

जो लोग आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को सिर्फ कार्यालयों में बैठकर काम करने वाला समझते हैं, उन्हें यह तस्वीर जरूर देखनी चाहिए।सारण में भीषण बाढ़ के दौरान डीएम और एसपी ने मैदान में उतरकर जनता के लिए काम किया, लेकिन उन्हें भी हूटिंग और विरोध का सामना करना पड़ा।ये अधिकारी जनता के वोट से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत, संघर्ष और शिक्षा के दम पर इस मुकाम तक पहुंचते हैं। सवाल पूछना आपका अधिकार है पूछिए जवाबदेही तय कीजिए लेकिन जनसेवा में जुटे अधिकारियों का अपमान मत कीजिए। लोकतंत्र में विरोध का अधिकार है, दुर्व्यवहार का नहीं।


