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मीनाक्षी इकलौती फीमेल एंकर है जो ओपन कंपटीशन फाइट कर न्यूज़ एंकर बनी!

Man in a white kurta with arms crossed posing beside a woman in a purple saree with gold border in a modern office setting with desks and screens in the background.

मनु पंवार-

साल 2010 से साल 2026. मीनाक्षी कंडवाल से परिचय और मैत्री को 16 साल हो गए हैं. इस बीच हमने इधर-उधर दूसरे गोलों में भी छलांगें लगाई. उस उछल-कूद में कहीं टकराए, कहीं नहीं भी टकरा पाए. हां, लेकिन ‘दोस्ती बनी रहे’ सूत्रवाक्य को भूले नहीं.

अब फिर से एक न्यूज़रूम साझा कर रहे हैं. इससे यह भी साबित होता है कि दुनिया गोल है और टीवी न्यूज़ का गोला तो कुछ ज़्यादा ही छोटा है.

मुझे ‘स्टार न्यूज़’ के वो दिन आज भी याद हैं, जब 2010 में मीनाक्षी ‘स्टार न्यूज़ एंकर हंट’ की चैम्पियन बनकर न्यूज़ रूम में दाखिल हुई थी. तब इस लड़की की आंखों में चमकीले सपने थे. ग़ज़ब के उत्साह से लबरेज. जानने-सीखने-समझने की उत्कंठा से भरी हुई.

बताना ज़रूरी है कि मीनाक्षी टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री में अपने दम पर है. वह पहली और इकलौती फीमेल एंकर है, जिसने ओपन कंपटीशन को फाइट करके अपनी योग्यता साबित की और न्यूज़ एंकर बनी. ‘स्टार न्यूज़ एंकर हंट’ अपनी तरह का पहला अभिनव प्रयोग था. वह ‘स्टार न्यूज़’ का महत्वाकांक्षी इनिशिएटिव था. लेकिन दुर्भाग्य से वह पहला और आखिरी एंकर हंट भी साबित हुआ. उसके बाद वैसा आयोजन हुआ ही नहीं. बाद में मीडिया मुगल रूपर्ट मर्डोक साहब भी हिंदुस्तान से ‘स्टार न्यूज़’ को समेट कर निकल लिए.

बहरहाल, उस दौर की वो ‘इनोसेंट’ सी पहाड़ी लड़की मीनाक्षी कंडवाल आज मेच्योर ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट है. इस बीच इस लड़की ने खुद को लगातार समृद्ध किया है. यात्रायें की हैं. बहुत सी ग्राउंड रिपोर्ट्स की हैं. भिन्न-भिन्न क्षेत्रों के बहुत लोगों से मिली है.पढ़ा है, लिखा है. समाजों/लोगों को देखा-समझा है.जीवन को कई तरह से अनुभव किया है.

कई ऐसे झंझावतों से भी गुजरी, जिनके सामने कोई कमज़ोर दिल वाला तो टूटकर बिखर सकता था, लेकिन इस चट्टानी इरादों वाली लड़की ने उनका डटकर सामना किया.और आज हम उन अनुभवों के ताप से निखरी हुए एक अलग मीनाक्षी को देखते हैं. इसकी झलक हमें टीवी स्क्रीन पर भी दिखती है.

यह देखकर बड़ा अच्छा लगता है कि उसमे बहुत सी चीजों को लेकर क्लियरिटी है. कई चीजों को लेकर वह दृढ़ निश्चयी है. और खुरदुरी सच्चाइयों से रूबरू होने के बावजूद उसके भीतर निराशा का अंधेरा नहीं, उम्मीद की लौ और कुछ कर गुज़रने की आग बाक़ी है.

और हां, सबसे ख़ास बात ये है कि इस नाजुक समय में भी यह लड़की अपने भीतर के संवेदनशील इंसान को बचाए हुए है- न सिर्फ़ ऑन स्क्रीन, बल्कि ऑफ स्क्रीन भी.

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