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एलआईसी पालिसी और बोनस के नाम पर ठगने वालों के जाल में फंसते फंसते बच गए पत्रकार विकास मिश्र

Vikas Mishra : हफ्ते भर पहले किसी राज सिन्हा का फोन आया था। उन्होंने खुद को एलआईसी का सीनियर एक्जीक्यूटिव बताया। बोले-मुंबई से अभी ट्रांसफर होकर दिल्ली आया हूं। आपकी पॉलिसी का स्टेटस देखा, तो पता चला कि आपको सालाना बोनस अभी एक भी साल का नहीं मिला है। क्या आपको एजेंट ने बताया नहीं था कि हर साल साढ़े सात हजार रुपये बोनस मिलेगा..? मैंने कहा नहीं ये तो नहीं पता था। तब वे बोले कि ऐसा है कि आप दिसंबर की बजाय अक्टूबर के पहले हफ्ते प्रीमियम जमा करवा दें, हम आपका बोनस जो अब तक करीब 32 हजार हो चुका है, उसे आपको दिलवा देंगे। प्रीमियम भी आपको 36 हजार की जगह सिर्फ 34 हजार 610 रुपये देना होगा।

Vikas Mishra : हफ्ते भर पहले किसी राज सिन्हा का फोन आया था। उन्होंने खुद को एलआईसी का सीनियर एक्जीक्यूटिव बताया। बोले-मुंबई से अभी ट्रांसफर होकर दिल्ली आया हूं। आपकी पॉलिसी का स्टेटस देखा, तो पता चला कि आपको सालाना बोनस अभी एक भी साल का नहीं मिला है। क्या आपको एजेंट ने बताया नहीं था कि हर साल साढ़े सात हजार रुपये बोनस मिलेगा..? मैंने कहा नहीं ये तो नहीं पता था। तब वे बोले कि ऐसा है कि आप दिसंबर की बजाय अक्टूबर के पहले हफ्ते प्रीमियम जमा करवा दें, हम आपका बोनस जो अब तक करीब 32 हजार हो चुका है, उसे आपको दिलवा देंगे। प्रीमियम भी आपको 36 हजार की जगह सिर्फ 34 हजार 610 रुपये देना होगा।

मैंने भरोसा कर लिया। दो बार और बात हुई थी, जिसके मुताबिक आज दशहरे के दिन मुझे वो किस्त कैश में देनी थी। कल ही एटीम से निकाले थे पैसे। आज सुबह उनकी कथित एक्जीक्यूटिव का फोन आया कि सर कब आ जाऊं पैसे लेने। मैंने पूछा कि क्या रसीद ले आएंगी..? बोली-नहीं वो तो मुंबई से आएगी। मैंने पूछा-फिर मेरे पास क्या प्रमाण होगा कि हमने प्रीमियम दे दिया है। वो बोली-सादे कागज पर लिखवा लीजिएगा। मैंने उसका नाम पूछा तो बोली-अनू। मैंने अनू क्या.. आगे पीछे भी तो कुछ होगा। उसने कहा नहीं सिर्फ अनू..। मुझे शक हुआ। एलआईसी की एक एजेंट से मेरा परिचय था, उसे फोन किया। वो बोली-सर ये बड़े स्तर पर फ्रॉड चल रहा है। बोनस के बहाने ये लोग कैश या ड्राफ्ट ले लेते हैं। जिनसे ड्रॉफ्ट लेते हैं, उस ड्रॉफ्ट से पॉलिसी खरीद लेेते हैं, फिर उसे सरेंडर करके पैसा लेकर चंपत हो जाते हैं। उसने उस कथित राज सिन्हा से बात की-थोड़ी ही देर में वो फंस गया और फोन काट दिया।

ये पोस्ट मैंने सभी दोस्तों को जागरूक करने के लिए लिखा है। अगर आपके पास भी किसी धोखेबाज का ऐसा फोन आए तो सावधान हो जाइए। एलआईसी आपका बोनस आपके एकाउंट में डालती है। न कि कोई आपको फोन करके बताएगा उसके बारे में। एक बात ये भी पता चली कि एलआईसी दफ्तर से जब भी कोई फोन आएगा तो वो लैंड लाइन से आएगा, मोबाइल से नहीं। इन ठगों का दुस्साहस देखिए, ये पता होने के बाद भी कि मैं आजतक चैनल में काम करता हूं, वो मुझे ठगने दफ्तर तक आ रहे थे। एक बार तो दिमाग में आया कि उन्हें दफ्तर में बुलाकर गिरफ्तार करवा दूं, लेकिन मौका चूक गया। बहरहाल आप सतर्क हो जाइए, ऐसे धोखेबाजों से बचकर रहिए। मित्रहित में जारी ।

आजतक चैनल में वरिष्ठ पद पर कार्यरत पत्रकार विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से.

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