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घोटालेबाज प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

चारों तरफ से घिर चुके प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ अब ह्यूमन राइट कमीशन, मायनॉरिटी कमीशन और नेशनल विमन कमीशन की कार्यवाही के अलावा अब दिल्ली विजिलेंस के लोग भी सक्रिय हो गये हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर यूएनआई के अध्यक्ष पर रहते हुए आर्थिक घपले-घोटोलों के तमाम आरोप हैं. उन पर ये सारे आरोप ”सेव यूएनआई मूवमेंट” ने लगाए हैं. कहा जाता है कि घपले-घोटाले करना प्रफुल्ल माहेश्वरी की फितरत में शामिल है. प्रफुल्ल माहेश्वरी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से प्रकाशित एक हिंदी अखबार को चलाने वाली कंपनी के प्रमुख निदेशक मालिक-संपादक भी हैं.

प्रफुल्ल माहेश्वरी की यह कंपनी बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की ब्लैक लिस्ट ‘विल फुल डिफॉल्टर’ में दर्ज है. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा से 1541 लाख रुपये का कर्जा लिया था. आदत से मजबूर प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा का पैसा वापस नहीं किया. बैंक के अधिकारियों ने कर्जा वापसी की लाख कोशिशें की. हर बार नाकाम रहने के बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्रा ने प्रफुल्ल माहेश्वरी की कंपनी को उन देनदारों की सूची में डाल दिया जो जानबूझ कर कर्ज वापस नहीं करना चाहते हैं.

बैंक ऑफ महाराष्ट्रा  के देनदारों की काली सूची में नाम दर्ज होने से भी कोई फर्क नहीं है. सेव यूएनआई के वर्कर्स का कहना है कि प्रफुल्ल माहेश्वरी यूएनआई को भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शक्ल में चालाना चाहते हैं. इसी हठधर्मिता की वजह से उन्होंने यूएनआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक गैर मीडिया पर्सन की एंट्री करवा दी है. आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन कहा जाता है  कि रिएल इस्टेट कंपनी चलाने वाले गैर मीडिया पर्सन को प्रफुल्ल माहेश्वरी ने यूएनआई की जमीन पर कब्जा दिलाने के सब्ज बाग दिखाए थे. सेव यूएनआई मूवमेंट ने भी प्रफुल्ल माहेश्वरी के कच्चे चिटठे खोले हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी की एक अन्य कंपनी एनबी प्लांटेशन भी आर्थिक अनियमितताओं के चलते सेबी के रडार पर काफी पहले से है. ऐसे भी कयास हैं कि एनबी प्लांटेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप में सेबी प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है.

उपरोक्त प्रकरण के बारे में जब प्रफुल्ल माहेश्वरी से संपर्क किया और आरोपों पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका रिवर्ट मैसेज था, ‘Sorry to read all this junk. Pl get in touch with the person who has given this false information and verify yourself…’ ”….I am not the chairman of UNI and can only speak for myself.”

हालांकि, प्रफुल्ल माहेश्वरी को फिर से कुछ सवाल भेजे गये हैं. अगर वो अपना पक्ष रखते हैं तो अगली किश्त में उनको भी प्रकाशित किया जाएगा. इन सब के अतिरिक्त एमपीएसआईडीसी के जमीन घोटाले में भी प्रफुल्ल माहेश्वरी का नाम शामिल है. उसकी जानकारी भी अगली किश्त में विस्तार से दी जाएगी.

भड़ास के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) राजीव शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 09968329365

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