कोबरापोस्ट के स्टिंग में फंसने पर UNI ने जिसे हटाया, योगीजी ने उसे सूचना आयुक्त बनाया!

जिस नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को यूपी के दस नए सूचना आयुक्तों में से एक बनाया गया है, उनके बारे में खबर है कि वे कोबरा पोस्ट के स्टिंग में फंस चुके हैं और इसी कारण उन्हें यूएनआई ने नौकरी से हटा दिया था. लेकिन योगी राज में उन्हीं एनके श्रीवास्तव उर्फ नरेंद्र कुमार श्रीवास्तव को …

समाचार एजेंसी यू.एन.आई तिल-तिल मौत की ओर…. रिसीवर नियुक्ति करने की मांग

नयी दिल्ली : देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज आफ इंडिया (यू.एन.आई) के शेयरधारकों की गत 30 दिसम्बर 2017 को हुई बैठक के दौरान उत्पन्न स्थिति,  संस्थान को अवैध रूप से काबिज भू-माफिया से मुक्त कराने तथा संस्थान की खराब माली हालात  के लिए जिम्मेदार व एन.बी.प्लांटेशन के नाम पर देश की जनता के हजारों करोडों रुपए के घोटालेबाज पूर्व सांसद एवं संस्था से जुड़े प्रफुल्ल कुमार महेश्वरी को शीघ्र गिरफ्तार करने की मांग के मसले पर आगे की रणनीति बनाने के लिए Save U.N.I Movement ने आगामी 21 जनवरी 2018 को कोर कमेटी की बैठक बुलाई है।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर यूएनआई प्रबंधन को 23 लाख रुपए जमा कराना पड़ा

नई दिल्ली : आखिरकार दिल्ली हाई कोर्ट के कड़े आदेश पर देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेन्सी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (यूएनआई) के प्रबंधन को एक वरिष्ठ पत्रकार सहित दो कर्मियों के लम्बित वेतन भुगतान के मद में लगभग 23 लाख रुपए कोर्ट में जमा कराना पड़ा. इसके साथ ही अदालत की तरफ़ से जारी कुर्की की कार्रवाई से प्रबंधन को मुक्ति मिल गयी. हालाँकि हाई कोर्ट ने जुर्माने की 20 प्रतिशत रक़म तत्काल नहीं जमा कराने की प्रबंधन को छूट दे दी.

महाघोटालेबाज माहेश्वरी की मुश्किलें बढीं, पीएमओ ने कसा शिकंजा

नई दिल्ली : एन.बी. प्लांटेशन के नाम पर जनता के हजारों करोडों रुपए डकारने वाले घोटालेबाज पूर्व सांसद प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. बैंक से धोखाधडी तथा अन्य कई भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त रहे माहेश्वरी के एनबी प्लांटेशन घोटाले को जांच के लिए पीएमओ ने सेबी को कार्रवाई का निर्देश दिया है. वही इनसे जुड़े अन्य घोटालों का जिम्मा डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल (dop) ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव को सौंपा हैl इस बीच यूएनबचाओ अभियान से जुड़े पत्रकारों, गैर-पत्रकारों, साहित्यकारों, लेखकों, ट्रेड यूनियनों, सामाजिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों एवं बुद्धिजीवियों ने प्रफुल्ल की गिरफ्तारी की माँग को लेकर आंदोलन तेज करने का निर्णय लिया है। श्री महेश्वरी आयकर एवं ई-डी के भी रडार पर हैंl

कुर्की वारंट के साथ यूएनआई मुख्यालय पहुंची दिल्ली पुलिस

नई दिल्ली l देश की प्रतिष्ठित समाचार एजेन्सी यूनाइटेड न्यूज़ ऑफ इंडिया (यूएनआई) के खिलाफ अदालत से जारी कुर्की वारंट को लेकर दिल्ली पुलिस की एक टीम कल शाम संस्थान के मुख्यालय पहुंचीl यूएनआई बचाओ अभियान से जुड़े वकीलों सर्वश्री संतोष कुमार, जितेंद्र कुमार झा, अरविन्द चौधरी, राहुल झा एवं मोहम्द शाहिद ने आज यहां यह जानकारी दीl  

पीएफ घोटालेबाज यूएनआई के खिलाफ कार्यवाही शुरू

हाल ही में पॉयनियर अखबार में एक खबर छपी है. इसमें बताया गया है कि पीएफ घोटालेबाजों में न्यूज एजेंसी यूएनआई भी है और इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. खबर के मुताबिक यूएनआई पर अपने कर्मचारियों के पीएफ का 3.81 करोड़ रुपये बकाया है. इसकी वसूली के लिए यूएनआई की संपत्तियों को जब्त करने का काम पीएफ डिपार्टमेंट ने शुरू कर दिया है. पढ़िए पायनियर अखबार में प्रकाशित पूरी खबर….

शोक सन्देश के शीर्षक में ‘मौत’ शब्द लिखना उचित है या नहीं?

इंदौर डेडलाईन से दिनांक 29 नंवबर को 04:41 पर जारी एक शोक सन्देश में प्रयुक्त शब्दावली के मायने नहीं समझ पा रहा हूँ| न ही मैं या समझ पा रहा हूँ क़ि यह शोक सन्देश था या आज के आधुनिक दौर में मीडिया संस्थानों के सिर चढ़ा सनसनीखेज कारनामों को प्रकाशित प्रसारित करने का एक ताना-बाना… मेरा आशय 21 मार्च 1961 को जन्मी देश की न्यूज एजेंसी यूएनआई से है| अपने ही संस्थान में इंदौर में कार्यरत मीडियाकर्मी के निधन पर जारी समाचार में मीडियाकर्मी के निधन पर खबर लिखी जिसका शीर्षक था- ‘यूएनआई कर्मी योगेन्द्र उपाध्याय की मौत’| यह खबर मुझे यूनीवार्ता के अधिकारिक पोर्टल पर दिखाई दी|

यूएनआई की हालत बेहद खराब, यहां के मीडियाकर्मी अपने हुक्मरानों के आगे नहीं बोलते

यूएनआई, देश की एजेंसियों में बड़ा नाम लेकिन अंदरूनी हालात काफी बदतर। सैलरी में 19-20 महीने का बैक लॉग। इसके बावजूद न कोई शोर, न शराबा और न ही कोई विरोध। लोग यहां काम नहीं सेवा करते हैं। हां ये भी है कि अपने जुगाड सेट कर चुके लोगों पर कोई खास फर्क नहीं पड़ता लेकिन उनके साथ दूसरे लोग भी पिसते हैं जो सिर्फ एक ही सैलरी पर आश्रित हैं। कमाल तो ये है कि सिर्फ अंदर अंदर घुटते रहते हैं, हुक्मरानों के आगे कोई नहीं बोलता।

यूनीवार्ता में बिना सेलरी के काम करते हैं मीडियाकर्मी!

एक ऐसा संस्थान जहां लोग पैसे कमाने के लिए नहीं जाते. दिल्ली में एक मीडिया संस्थान ऐसा है जहां कर्मचारियों को हर महीने सैलरी नहीं मिलती. इसके बावजूद न कोई कर्मचारी छुट्टी करता है और न ही मजबूती से सेलरी न दिए जाने का विरोध ही करता है. एक एडमिन विभाग है लेकिन वहां सैलरी के बारे में नहीं पूछ सकते. अकाउंट्स विभाग भी है लेकिन वहां बैठे साहब महीना पूरा होने के बाद ‘इस हफ्ते इस हफ्ते’ कहकर हफ्तों निकाल देते हैं.

यूएनआई के ऑडिट में घोटाले का अंदेशा, वेतन के लिए कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

जरूरी नहीं, कि जो सबकी खबर दे उसके बारे में भी सबको खबर हो। देश की शीर्ष समाचार एजेंसी यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (यूएनआई) के संदर्भ में यह बात सटीक बैठती है। दुनिया भर की खबर देने वाली यूएनआई की अपनी खबर यह है, कि आज यूएनआई में हड़ताल रही। बीते दो महीनों से वेतन …

Delhi HC issues notice to top editorial staff of UNI

New Delhi : Taking strong cognizance of the torture and humiliation of a dalit employee of United News of India (UNI), a prestigious news agency of the country, the Delhi High court yesterday issued notice to two high profile scribes of UNI including Joint Editor Neeraj Bajpayee, Journalist Ashok Upadhyay and an another employee of the agency Mohan Lal Joshi.

बकाया वेतन के लिये यूएनआई के पूर्व मीडियाकर्मियों की कानूनी लड़ाई तेज हुई, मदद की अपील

सरकार ने अखबारों एवं संवाद समितियों के कर्मचारियों एवं पत्रकारों के लिये मजीठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं को लागू कर दिया है। उच्चतम न्यायालय ने भी इन अनुशंसाओं को अक्षरश लागू करने का निर्देश दिया है लेकिन इसके बावजूद दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान टाइम्स, स्टेसमैन, यूएनआई जैसे मीडिया संगठनों ने सरकार एवं उच्चतम न्यायालय के आदेशों को धत्ता बताकर या तो मजीठिया वेतन बोर्ड की अनुशंसाओं को लागू ही नहीं किया है या मनमाने तरीके से लागू किया है। यही नहीं जिन पत्रकारों ने मजीठिया वेतन बोर्ड की सिफारिशों के अनुसार वेतन वृद्धि लागू किये जाने की मांग की उनके प्रबंधकों ने उनका तबादला करने और उन्हें नौकरी से निकालने के हथकंडे अपनाये।

यूएनआई का हालचाल : मजीठिया मसला, जमीन की लूट-खसोट, छुट्टा चेयरमैन…

नई दिल्ली । एक समय हिन्दी अखबारों के बीच काफी लोकप्रिय यूएनआई/वार्ता प्रबंधन के भ्रष्टालचार और लूट- खसोट के कारण कर्मचारियों को वेतन भी नहीं दे पा रही है। प्रबंधन ने आधिकारिक रूप से मान लिया है कि संस्थान सात साल से घाटे में चल रहा है। मजीठिया देने की बात पर नोटिस बोर्ड लटका दिया गया है कि अमूक तारीख से यूएनआई में मजीठिया वेज बोडर्स की सिफारिशें लागू कर दी जाएगी। शायद सुप्रीम कोर्ट के डंडा से बचने के लिए। सूत्रों का कहना है कि दिल्ली सरकार का भी डंडा पड़ा है और सुप्रीम कोर्ट में मजीठिया वेज बोडर्स की सिफारिशों को लागू न करने की रिपोर्ट भेज दी गई है। इतना ही नहीं कुछ साथी अपने हक के लिए अब यूएनआई की माली हालत की चिंता छोड़ सुप्रीम कोर्ट में जाने की तैयारी कर रहे हैं। वकीलों के अनुसार यूएनआई के साथी अभी भी सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं।

यूनीवार्ता के भोपाल ब्यूरो चीफ ने कहा- फर्जी नहीं, बिलकुल सही खबर रिलीज की गई

भड़ास को भोपाल से एक सज्जन ने मेल कर यूनीवार्ता द्वारा एक खबर रिलीज किए जाने को लेकर जानकारी दी जिसके मुताबिक खबर फर्जी है. वहीं यूनीवार्ता के भोपाल ब्यूरो चीफ का कहना है कि खबर बिलकुल सही है. पहले भोपाल से आई मेल पढ़िए और फिर यूनीवार्ता की तरफ से जारी अधिकृत जानकारी….

पीएफ का साढ़े चार करोड़ कब जमा कराएगा यूएनआई प्रबंधन

नई दिल्ली : यूएनआई मैनेजमेंट ने कर्मचारियों का पीएफ का करीब साढ़े चार करोड़ रुपये बकाया कर रखा है। इस मामले में कुछ दिन पहल खबर आई थी कि पीएफ का पैसा जमा न करने के लिए संसद मार्ग थाने में शिकायत कराई गई है। लेकिन अब तक इस दिशा में न तो प्रशासन ने और न ही यूएनआई मैनेजमेंट ने ही कोई फैसला लिया है। 

Killing of the second national news agency ”The United News of India”…

Delayed payment of wages and a virtual blockade of help from the Centre plus mismanagement over the years has led to the virtual killing of the second national news agency, the United News of India in the country with a Hindi and Urdu wing which at times has stood virtually on its own, the Delhi Union of journalists said today. A meeting of office functionaries has called upon the Centre and the new Delhi state government to intervene in all possible ways to save a second national news agency from collapse. It has further noted that hundreds of employees, journalists and non-journalists are on the roads while many have retired with pending dues and they are spread all over the country.

प्रबंधन और यूनियन की मिलीभगत से यूएनआई को ठिकाने लगाने की कोशिश

भारतीय मीडिया जगत में कभी यूएनआई /वार्ता एक सशक्‍त एजेंसी हुआ करती थी। चम्‍मच पीटीआई / भाषा को आगे बढ़ाने के लिए यूएनआई /वार्ता का कुंडा कैसे पिटा, उसकी कहानी कभी बाद में । अभी बस ये कि इस एजेंसी में कैसे मैनेजमेंट वहां के कर्मचारियों को परेशान कर रही है। साथ में बोनस ये कि वहां की यूनियन प्रबंधन के साथ मिलकर कैसे संस्‍था को खत्‍म करने में लगी है। 

भ्रष्टाचार और तानाशाही के चंगुल में फंस कर कराह रहे UNI के कर्मचारियों के लिए आगे आएं

UNI को दलालों, भ्रष्टाचारियों, भू माफियाओं, यूनियन के ठेकेदारों के चंगुल से मुक्त कराने और इस संस्थान के कर्मचारियों को प्रताड़ित होने से बचाने के लिए आप सब आगे आयें… साथियों, देश की प्रमुख समाचार एजेंसी UNI यानि यूनीवार्ता आज जिस दौर से गुजर रहा है उससे आप सब भलीभांति परिचित है. इस संस्थान के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी जो कांग्रेस के पूर्व राज्य सभा सदस्य भी हैं, भ्रष्टाचार में लिप्त होने और सेबी की तरफ से अपनी गिरफ्तारी की संभावनाओं को देखते हुए अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ने के कोशिश कर रहा है. वो खुद को इस संस्था का चेयरमैन बताने से भी इनकार कर रहा है. ऐसे परिस्थिति में इतनी बड़ी और प्रतिष्ठित संस्था का चेयरमैन कौन है, माहेश्वरी को बताना होगा. उसने क्या किसी और को चेयरमैन बना दिया? यदि ऐसा है तो किस तरह यह धोखाधड़ी की गयी?

घोटालेबाज प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

यूएनआई चेयरमैन प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी के खिलाफ विजिलेंस जांच, ब्लैकमनी को ह्वाइट करने के आरोप में भी फंसे

समाचार एजेंसी यूएनआई घोटाला प्रकरण में यूएनआई बोर्ड के अध्यक्ष प्रफुल्ल कुमार माहेश्वरी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की विजिलेंस ने जांच शुरू कर दी है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर तीन हजार करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है. विजिलेंस ने जिन मुद्दों को जांच के दायरे में रखा है उनमें प्रफुल्ल माहेश्वरी द्वारा एनबी प्लांटेशन के नाम पर किया घोटाला प्रमुख है. क्या प्रफुल्ल माहेश्वरी कुछ बड़े बिल्डर और रिएल स्टेट की कंपनियों की ब्लैक मनी को व्हाइट करने के धंधे में भी शामिल है? इस विषय पर भी जांच हो सकती है.

यूएनआई में सेलरी संकट, हालत बेहद दयनीय, एक दिसंबर को धरना-प्रदर्शन

संपादक, भड़ास4मीडिया, महोदय, UNI की दुर्दशा से आप भली भांति वाकिफ होंगे. इस मीडिया संस्थान में कार्यरत पत्रकार और गैर-पत्रकार  अत्यंत दयनीय स्थिति मैं हैं. विगत 14 महीने से तनख्वाह उन्हें नहीं दी गयी है. हर महीना सैलरी नहीं मिल रही. पत्रकारों का मनमाने तरीके से तबादला किया जा रहा है. वित्तीय संकट की स्थिति में स्थानान्तरण का बोझ पत्रकार सहन नहीं कर पा रहे हैं. उनके सामने भूखों मरने की नौबत आ गयी है. UNI में   उर्दू के जानेमाने पत्रकार अलमगीर साहब की 8-9 जून को हुई मौत इसका जीता जागता उदाहरण है.

मोदी को लेटर भेजने का असर : एमिटी के मालिक अशोक चौहान ने ग्रेच्युटी की रकम तो दी ही, माफी भी मांगी

Kavita Surbhi : नरेंद्र मोदी जी के प्रति नमन, जिन्होंने जनवाद के मार्ग को सबसे श्रेष्ठ माना। मैं एमिटी यूनिवर्सिटी से अपनी ग्रेच्युटी प्राप्त करने के लिए निरंतर संघर्ष कर रही थी। परिस्थितियां कुछ ऐसी थीं कि आर्थिक सहयोग की आवश्यकता थी और ग्रेच्युटी मेरा अधिकार भी था। विश्वविद्यालय को काफी मेल कीं। एमिटी के एकाउंट्स विभाग से लेकर फाउंडर श्री अशोक चौहान तक को। एकाउंट्स को फ़ोन करती, तो दादा कहा जाने वाला व्यक्ति कहता, मैडम, यहाँ साल-दो साल तक लोगों को अपनी रकम नहीं मिलती, अभी तो आपको सात महीने ही हुए हैं और चालीस हजार के लिए आप इतनी परेशान हैं?