मोतीलाल ओसवाल सिक्यूरिटीज के जरिए शेयर बाजार में जाएंगे तो लुट जाएंगे, पढ़िए इनका फ्रॉड

यह किस्सा मेरे एक नजदीकी मित्र के साथ ही घटा है. इस किस्से की शुरुआत किसी आम मार्केटिंग कॉल से होती है जो आपके हमारे पास सबके पास रोज आती है. 2010 की शुरुआत में किसी एक दिन यह कॉल मुंबई के नरेश बौंठियाल के पास भी आई. कॉल से सुमधुर आवाज में पूछा गया क्या आप शेयर बाजार में डीमेट खाते के माध्यम से इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सहारा-सेबी सांठगांठ : इनकी नौटंकी से लाखों निवेशकों को आज तक नहीं मिली फूटी कौड़ी

प्रॉपर्टी के खरीददार नहीं मिलने का करते हैं दिखावा

मुंबई। सहारा ग्रुप के मालिक घोटालेबाज सुब्रत रॉय और सेबी की सांठगांठ की वजह से उसकी अरबों की प्रॉपर्टी जब्त नहीं हो पाई है। इसकी वजह से लाखों निवेशकों को आज तक फूटी कौड़ी नहीं मिली, लेकिन सेबी के माध्यम से सरकार की भी निवेशकों के प्रति दिखावे की राजनीति चल रही है। केंद्र में कांग्रेस सरकार के बाद भाजपा सत्ता में आई, लेकिन आज तक निवेशकों का पैसा नहीं मिला। अब एक बार फिर सेबी ने दिखावे के लिए सहारा ग्रुप को निवेशकों के पैसे हड़पने का आरोप लगाते हुए लौटाने का निर्देश दिया है। Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Sebi orders Samruddha Jeevan Foods India to repay investors money in 3 months

NEW DELHI: Markets regulator Sebi today asked Samruddha Jeevan Foods India and its directors to refund in three months money collected from investors through unauthorised cattle and goat farm schemes. The company and its directors — Mahesh Kisan Motewar, Vaishali Mahesh Motewar, Ghanshyam Jashbhai Patel and Rajendra Pandurang Bhandar — have also been barred from the capital market for four years. The Securities and Exchange Board of India (Sebi) has begun the probe after receiving complaints about the company agents promising “more than 12 per cent fixed returns and other unusual returns on investments in cattle and goat farms”.

The company was running Collective Investment Scheme (CIS) without obtaining regulatory approvals. A Sebi probe found that the firm was collecting money from the public in order to carry out business of “purchase and rearing of goats/buffaloes’ and also of sheep farming. Under its various schemes, the company was offering to double the money in five and half years, while also promising an amount equivalent to 1.5 times of the contract value as ‘accidental death help’.

The company’s financial statements showed that ‘advance from customers’ in fiscal year 2011-12 stood at over Rs 331 crore, at over Rs 163 crore in 2010-11 and Rs 36 crore in 2009-10. It spent over Rs 56 crore towards ‘advertisement and sales promotion (including commission)’ in 2011-12, Rs 39.5 crore in 2010-11 and Rs 22 crore in 2009-10. In an order passed today, Sebi has the company and its directors to “wind up the existing CIS and refund the money collected by the said company under the schemes with returns which are due to its investors…within a period of three months.”

Thereafter, the firm has to submit a winding up and repayment report within 15 days, including the trail of funds claimed to be refunded, bank account statements indicating repayment to investors among others. In addition, they have been barred from selling any assets of the company, except for the purpose of making refunds to its investors. In case, they fail to comply with the order, Sebi said Samruddha Jeevan and its directors will continue to be barred from the securities market, even after the completion of four years of restrictions imposed on them “till all the CIS are wound up and all the money mobilised through such schemes are refunded to its investors with returns which are due to them.”

Besides, it would make a reference to State Government/ Local Police and register a civil/criminal case against Samruddha Jeevan and would make a reference to the Ministry of Corporate Affairs to initiate the process of winding up of the firm.

इसे भी पढ़ें…

चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन’ से सावधान, इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा घोटाले वाला होने वाला है!

xxx

‘प्रजातंत्र लाइव’ के मीडियाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने चिटफंडिये मालिक को ललकारा

xxx

चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

xxx

चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

xxx

विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ में बवाल, पुलिस पहुंची, मालिक से शिकायत

xxx

अपने मालिक की बर्थडे पार्टी को सबसे बड़ी ख़बर बताकर पूरे दिन प्रसारित करता रहा लाइव इंडिया

xxx

ये लाइव इंडिया नहीं ये है चिट फंड इंडिया

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पीएसीएल को निवेशकों का 49100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश बरकरार

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) ने बाजार नियामक सेबी के उस आदेश पर रोक लगाने से इन्कार कर दिया जिसमें प्रॉपर्टी डेवलपर पीएसीएल को निवेशकों का 49,100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश जारी किया गया था। सेबी ने अवैध सामूहिक निवेश योजना को लेकर पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की थी। इसके बाद पिछले साल सेबी के आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने ट्रिब्यूनल में अपील किया था। लेकिन ट्रिव्यूनल ने पीएसीएल की अपील खारिज करते हुए उसे सेबी के निर्देशों पर तीन महीने में अमल करने को कहा।

सेबी ने अवैध योजनाओं के जरिये निवेशकों से धन जमा करने के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पीएसीएल लिमिटेड (पहले पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन) को तीन महीने के भीतर 49 हजार 100 करोड़ रुपये निवेशकों को लौटाने का आदेश दिया था। सेबी ने कंपनी से अवैध सामूहिक निवेश योजना (सीआईएस) को बंद करने को भी कहा है।  सेबी के आदेश के बाद पीएसीएल ने इसे प्रतिभूति अपीलीय ट्राइब्यूनल (सैट) में चुनौती दी। वहीं, पीएसीएल के बयान में कहा गया कि दुर्भाग्य से सेबी इस बात पर ध्यान नहीं दे सका कि कंपनी ने कहा था कि उसे सीआईएस नहीं माना जाए। कंपनी ने कहा है, ‘पीएसीएल ने सेबी की बेंच के सामने कहा था कि वह सीआईएस नहीं चला रही है। कंपनी ने अपने रीयल एस्टेट कारोबार के लिए जो धन जुटाया है, उसके पास उचित मात्रा में परिसंपत्तियां हैं।’

सेबी ने कहा है कि वह उच्चतम न्यायालय के एक दिशानिर्देश के अनुसार कंपनी तथा निदेशकों के खिलाफ धोखाधड़ी तथा व्यापार में अनुचित व्यवहार करने वह सामूहिक निवेश योजनाओं (सीआइएस) के बारे में सेबी के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पीएसीएल के खिलाफ कार्रवाई की है।  भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने इस संबंध में 92 पृष्ठ का आदेश जारी किया था। इसके अनुसार कंपनी ने खुद स्वीकार किया है कि उसने 49,100 करोड़ रुपये जुटाये है और अगर पीएसीएल एक अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच जुटाये गये कोष का पूरा ब्योरा दे तो यह राशि और भी अधिक हो सकती है। जिन निवेशकों से यह राशि जुटायी गयी, उनकी संख्या करीब 5.85 करोड़ है। इनमें वे ग्राहक भी शामिल है। जिन्हें जमीन आवंटित करने की बात कही गयी थी और उन्हें अभी तक जमीन नहीं दी गयी। अवैध तरीके से धन जुटाने के मामलों में यह न केवल राशि के लिहाज से बल्कि निवेशकों की संख्या को लेकर भी सबसे बड़ा मामला है।

वही, पीएसीएल तथा निर्मल सिंह भांगू समेत उसके शीर्ष कार्यकारियों के खिलाफ सीबीआई भी जांच कर रही है। साथ ही यह सेबी की जांच के घेरे में पुराने मामलों में से एक है। नियामक ने 16 साल पहले फरवरी 1998 में पीएसीएल को कहा था कि वह न तो कोई योजना शुरू कर सकती है और न ही अपनी मौजूदा योजनाओं के तहत कोष जुटा सकती है। कंपनी ने अपनी दलील में कहा कि वह कोई अवैध योजना नहीं चला रही है और जमीन की खरीद-बिक्री में शामिल है। सेबी ने अवैध तरीके से धन जुटाने की योजना चलाने को लेकर 1999 में पीएसीएल को नोटिस जारी किया था। बाद में मामला अदालतों में गया। उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल फरवरी में आदेश जारी कर सेबी को यह पता लगाने को कहा कि क्या पीएसीएल का कारोबार सामूहिक निवेश योजना के दायरे में आता है या नहीं और कानून के मुताबिक कार्रवाई करने को कहा।

इसे भी पढ़ें…

पीएसीएल पर सेबी ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया, देने होंगे 7269 करोड़ रुपये

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

पीएसीएल पर सेबी ने अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना लगाया, देने होंगे 7269 करोड़ रुपये

नई दिल्‍ली। बाजार नियामक सेबी ने पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) और इसके चार डायरेक्‍टर्स पर 7,269 करोड़ रुपए की पेनल्‍टी लगाई है। पीएसीएल को यह रकम 45 दिनों के भीतर चुकानी होगी। सेबी द्वारा किसी कंपनी पर लगाई गई यह सबसे बड़ी पेनल्‍टी है। सेबी के अनुसार पीएसीएल के डायरेक्‍टर्स तरलोचन सिंह, सुखदेव सिंह, गुरमीत सिंह और सुब्रता भट्टाचार्य ने लोगों से अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। इसके चलते कंपनी पर इतना बड़ा जुर्माना लगाया गया है। ज्ञात हो पर्ल और पीएसीएलल की तरफ से ही एक न्यूज चैनल पी7 न्यूज चलाया जाता था। साथ ही कई पत्रिकाएं भी निकाली जाती थीं। बाद में कंपनी के फ्राड का खुलासा होने और कई एजेंसियों के शिकंजे में फंसने के बाद ये मीडिया हाउस बंद हो गया। यहां के कर्मचारियों ने अपने बकाया वेतन के लिए लंबा आंदोलन चलाया जिसके बाद उन्हें उनका हक मिल सका। हालांकि अब भी ढेर सारे कर्मी अपना बकाया पाने के लिए भटक रहे हैं।

पिछले साल सेबी ने पीएसीएल को पिछले 15 साल में फर्जी स्‍कीमों के माध्‍यम से जुटाए गए 49,100 करोड़ रुपए निवेशकों को वापस करने का आदेश दिया था। हालांकि इस आदेश के खिलाफ पीएसीएल ने सिक्‍युरिटी अपीलेट ट्रिब्‍युनल (सेट) में अपील की थी। लेकिन पीएसीएल की अपील को खारिज करते हुए पिछले महीने सेट कंपनी की अपील खारिज करते हुए निवेशकों को पैसा वापस करने को कहा था। सेबी ने अपने आदेश में कहा है कि पीएसीएल ने पिछले एक साल में भारी मात्रा में निवेशकों से अवैध स्‍कीमों के माध्‍यम से पैसा जमा किया है। इसके चलते कंपनी का मुनाफा सिर्फ एक साल के भीतर बढ़कर 2,423 करोड़ हो गया। सेबी ने इस मामले में कड़े शब्‍दों का प्रयोग करते हुए कहा कि जिस तरह कंपनी ने अवैध तरीके से पैसा जुटाया है। उसे देखते हुए अभी तक की सबसे बड़ी पेनल्‍टी लगाए जाने के लिए पीएलसीएल से बेहतर कोई दूसरा मामला नहीं हो सकता।

सेबी के अनुसार पीएसीएल पर उसका यह सख्‍त रवैया अवैध तरीके से पैसा जुटाने की कोशिश में जुटी फाइनेंस कंपनियों को एक कड़ा संदेश देगा। पिछले कुछ वर्षों में इस प्रकार की गतिविधियों में तेजी आई है। देश में लाखों लोगों की बड़ी रकम इन्‍हीं स्‍कीमों में निवेश के चलते डूब गई है। ऐसे गंभीर मामलों को हल्‍के में नहीं लिया जा सकता। सेबी के नियमों के तहत यह फर्जी तरीके से धन जुटाने वाली कंपनियों पर 25 करोड़ रुपए से लेकर उनके सालाना मुनाफे के तीन गुना तक पेनल्‍टी वसूलने का अधिकार है। जहां तक मौजूदा मामले का सवाल है, सेबी ने इसी नियम का पालन करते हुए कंपनी पर उसके मुनाफे की तीन गुनी पेनल्‍टी लगाई है।

इसे भी पढ़ें….

पीएसीएल को निवेशकों का 49100 करोड़ रुपया लौटाने का आदेश बरकरार

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

चिटफंड कंपनी ‘समृद्ध जीवन’ से सावधान, इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा घोटाले वाला होने वाला है!

आजमगढ़ । समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के मेरठ ब्रांच के पूर्व शाखा प्रबंधक संदीप राय ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के उपर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि ये सोसायटी देश में चल रही चिटफंड कंपनियों में अग्रणी है और इसका भी हाल पीएसीएल और शारधा चिट फंड घोटाले जैसी कंपनियों वाला होने वाला है। पीएसीएल और शारधा चिटफंड कंपनियों ने आम नागरिकों की 60 हजार करोड रुपये से भी ज्यादा की खून पसीने की कमाई को जी भर कर लूटा था। इसी कडी में अगला एपिसोड समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी का होने वाला है। राय ने कंपनी पर आरोप लगाते हुये प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सोसायटी प्रबंधन से कई बिंदुओं पर जवाब मांगा है।

1-वर्ष 2002 सें अब तक कंपनी को अपने नाम क्रमशः गुरूकृपा डेयरीज, समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लि0, प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड, समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी एवं गोल्डन पेटल नाम क्यों रखने पड़े। क्या ये किसी संदिग्धता की भावना के चलते तो नहीं किया गया।

2-जब सेबी ने दिनांक 2013 ने समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड एवं प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड पर बैन लगाया एवं किसी भी प्रकार की नयी कंपनी अथवा लुभावनी स्कीम्स के संचालन से रोक लगाई तो समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी का गठन किस आधार पर किया गया क्योंकि दोनों के संचालक मंडल एवं कार्य करने का प्रकार क्रमशः एक जैसा ही है।

3-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के बॉयलाज में यह उल्लेखित होने पर कि मांग पर भुगतान किया जायेगा, आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के तहत अनुबंध कराया जा रहा हैं, जिसमें मात्र परिपक्वता पर भुगतान दिये जाने का उल्लेख किया गया। इस प्रकार समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा अपने बॉयलाज की मंशा के विपरीत कार्य किया जा रहा है, क्यों।

4-सेबी द्वारा 26 नवंबर 2013 को जारी अपनी जांच रिपोर्ट में समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड द्वारा करायी गयी पालिसी मुख्यतः आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान पर तत्काल से कस्टमर से धनराशि ना लिये जाने के आदेश जारी किये गये थें। जबकि समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड द्वारा आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के अंतर्गत करवायी गयी पालिसी को देश भर में समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के नाम के तहत जारी रखा गया, जोकि सेबी के आदेशों का पूर्णतः उल्लंघन है।

5-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा बॉयलाज की मंशा के विपरीत आय0 पी एवं एस0 आय0 पी प्लान के अंतर्गत जो योजना चलाई जा रही हैं बांड के अनुसार उसमें लाइव स्टाक देने की बात लिखी जाती हैं, जबकि कस्टमर को किसी भी प्रकार का लाइव स्टाक नही दिया जाता हैं बदलें में धनराशि ही दी जाती हैं, इसका उल्लेख सेबी द्वारा अपनी जांच रिपोर्ट में भी किया गया हैं। इस प्रकार बिजनेस प्लान के नाम पर सोसायटी द्वारा एक प्रकार से टर्म डिपाजिट लेकर बैंकिग का ही कार्य किया जा रहा हैं जोकि कृषि मंत्रालय एवं सहकारिता के नाम पर धोखा हैं।

6-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा समृद्ध जीवन फूडस इंडिया लिमिटेड एवं प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया लिमिटेड द्वारा कस्टमर के नाम जारी चेक को भुगतान किया गया हैं एवं इस प्रकार बैंकिग रेग्यूलेशन एक्ट 1949 के पैरा-49-ए का पूर्णरूप से उल्लंघन किया गया हैं।

7-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के लखनउ एवं हल्द्वानी स्थित शाखायें जोकि प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया के नाम से खरीदी गयी थी एवं जिसमें आज दिनांक तक समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी का कार्य चल रहा हैं इस तथ्य से साबित होता हैं कि नाम बदले हैं काम नही ।

8-मध्य प्रदेश हाइकोर्ट के आदेश दिनांक 13 जुलाई 2012 के संदर्भ में राय ने सोसायटी प्रबंधन से जवाब मांगा हैं कि क्यों आपकों माननीय मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर बेंच ने भगोडा घोषित किया था।

9-उडीसा राज्य के तलचर, जाचपुर एवं बाडगाह जिलों में दर्ज सोसायटी प्रमुख श्री महेश किसन मोतेवार के खिलाफ दर्ज 420 के मुकदमों के बारे में सोसायटी प्रबंधन का क्या जवाब है।

10-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी किस आधार पर ऐजेंटों की नियुक्ति करती हैं एवं किस आधार पर उनकों ओ0आर0सी0 ;ओवर रायडिंग कमीशनद्ध एवं एम0एफ0ए ;मंथली फिल्ड ऐलाउंस का वितरण करती हैं जबकि उसको कृषि मंत्रालय एवं सहकारिता की मूल भावना के अंतर्गत केवल सदस्यों के माध्यम से ही व्यवहार करना था।

11-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी के कर्मचारी का पी0एफ जोकि उनका मूलभूत अधिकार हैं उसमें अपना अंशदान क्यों नहीं जमा करती।

12-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज कोआपरेटिव सोसायटी अपने कर्मचारियों को राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय अवकाश क्यों नही प्रदान करती।

13-अभी हाल ही में पंजाब सरकार के कापरेटिव सोसायटी के रजिस्ट्रार ने आपको चिन्हित किया था कि आपके पास पंजाब राज्य में कार्य करने हेतु आवश्यक अनापत्ति प्रमाण पत्र नही था फिर भी आपने संपूर्ण राज्य में अनाधिकृत रूप अपनी अनेक शाखाओं के माध्यम से करोडों का हेरफेर किया, आखिर क्यों ।

14-उत्तराखंड राज्य में आपकी समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी की निबंधन तिथि 8 जून 2012 थी एवं उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करने की अनुमति 28 मार्च 2013 को प्राप्त हुई, जबकि समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी द्वारा निबंधन तिथि से पूर्व ही समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के नाम की जमा रसीद कस्टमर को दी गई, इस प्रकार से यह स्पष्ट हैं कि आपके द्वारा अपने निबंधन से पूर्व ही उत्तराखण्ड राज्य में कार्य करना आरंभ कर दिया गया था जोकि अवैध है।

15-निबंधक सहकारी समितियां उत्तराखण्ड के कार्यालय पत्रांक 27107/अधि0-सं-का/मल्टी स्टेट को0 आप/निरीक्षण-जांच 2014-15 दिनांक 4 जुलाई 2014 में मुख्य जांच अधिकारी श्री नीरज बेलवाल की जांच रिपोर्ट में जिसमें की आपके ध्वस्त होने एवं कानून व्यवस्था बिगडने तक की बात कही गयी हैं उसके बार में सोसायटी प्रबंधन का क्या कहना है।

16-आपके द्वारा चार बार नाम बदलने के पीछे कही किसी प्रकार की घृणित मानसिकता तो नही हैं।

17-आपने अफ्रीकी गणराज्य लिथुआनिया की नागरिकता लेने के पीछे जो आपने वहा 10 लाख डालर का निवेश किया हैं कही वो आपका पलायन तो नही दर्शाता है।

18-प्रोस्पेरिटी एग्रो इंडिया पर रोक के बावजूद आपके द्वारा संचालित लाइव इंडिया न्यूज चैनल एवं मी मराठी नाम के चैनल को चलाने का आखिर क्या उद्वेश्य है, कहीं ऐसा तो नही कि आप अपने कारनामों से खुद को बचने बचाने के लिये ऐसा करते हों।

19-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के पास केवल सावधि जमा एवं पिग्मी डिपाजिट का ही लायसेंस हैं वो भी केवल सदस्यों के मध्य में फिर भी आप आय0 पी0 एवं एस0 आय0 पी0 प्लानों का संचालन धडल्ले से कर रहें हैं और वो भी सेबी के प्रतिबंध के बावजूद।

20-समृद्ध जीवन मल्टी स्टेट मल्टी पर्पज को0आपरेटिव सोसायटी के द्वारा सर्कुलरों अथवा विशेष लुभावनी स्कीमों का संचालन जो आपके द्वारा समय समय पर बिजनेस को बढाने के लिये किया जाता हैं  वो आप किस आधार पर करते हैं क्योंकी सहाकारिता आपकों इस बात की इजाजत नही देती हैं।

21-किस प्रकार से आप अपने ऐजेंटो के मध्य 12 साल का कैरियर एवं 12 रैंक देते हैं, इस तरह का कार्य तो केवल मल्टी लेवल मार्केंटिग एवं चिट फंडी करते हैं। आप क्लब मेंबरशिप भी प्रदान करते हैं।

22-अपने भांजे श्री प्रसाद परसवार की शाही शादी जो कि आपने पुणे के बालेवाडी स्टेडियम में की थी वो एवं उसमें तकरीबन 3 लाख लोगों की आमद हुई थी एवं इस शादी के लिये आपने पुणे शहर के तमाम मैरिज हाल, बैंक्वेट हाल एव पंडाल बुक किये थे, साथ ही चार विशेष रेलगाडिया एवं तकरीबन पूरे भारत की 80 प्रतिशत वायु सेवा को आपने बुक किया था। उस शाही शादी में आपने सेलो कंपनी से 80 हजार कुर्सियां खरीदी एवं इस पूरे तामझाम को पूरा करने के लिये आम जनता की गाढी कमाई के 90 करोड़ रुपये आपने खर्च कर दिये, आखिर किस हैसियत से।

23-आपके पास राल्य रायस एवं लुब्रगिनी जैसी गाडियों का काफिला हैं जोकि भारत जैसे देश में भी अल्प मात्रा में उपलब्ध हैं आखिर अपनी शाही जिंदगी के लिये कब तक आप जनता का खून चूसते रहेंगे।

24- 13 साल के आपकी कंपनी के इतिहास में आपने अभी तक 14 हजार करोड रूप्ये की धनराशि आपने 21 राज्यों की जनता से बटोरी हैं उसकों लोटाने के लिये आपके पास पर्याप्त बैलेंस है कि वो आपने लिथुआनिया देश में अपने बुढापें के लिये बचा कर रखा हैं।

मेरा माननीय प्रधानमंत्री जी एवं पाठकों से अनुरोघ हैं कि वो अपने विवके का प्रयोग करें साथ ही इस प्रकार की चिट फंडी कंपनी के खिलाफ एकजुट होकर अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग कर, इस कंपनी के भागने के मार्ग को अवरूद्ध करनें में अपना योगदान दें जिससे की जनता की गाढी कमाई का बचाया जा सकें।

सधन्यवाद,

आपका

संदीप राय

आजमगढ

संपर्क: 07895998665, sandyazam7@gmail.com

प्रेस विज्ञप्ति


इसे भी पढ़ें…

Sebi orders Samruddha Jeevan Foods India to repay investors money in 3 months

xxx

‘प्रजातंत्र लाइव’ के मीडियाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाल कर अपने चिटफंडिये मालिक को ललकारा

xxx

चिटफंड के समारोह का ‘लाइव इंडिया’ करता रहा लाइव प्रसारण, सतीश के सिंह भी मंच पर मौजूद

xxx

चिटफंडिया ‘समृद्ध जीवन फाउंडेशन’ की मददगार बनी अखिलेश सरकार, निष्कासित मीडियाकर्मी संघर्ष की राह पर

xxx

विवादित चिटफंड कंपनी समृद्ध जीवन के अखबार ‘प्रजातंत्र लाइव’ में बवाल, पुलिस पहुंची, मालिक से शिकायत

xxx

अपने मालिक की बर्थडे पार्टी को सबसे बड़ी ख़बर बताकर पूरे दिन प्रसारित करता रहा लाइव इंडिया

xxx

ये लाइव इंडिया नहीं ये है चिट फंड इंडिया

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

धन्यवाद सुप्रीम कोर्ट, शर्मनाक सुब्रतो रॉय !

आज देश की सर्वोच्च अदालत ने ठीक वही कहा, जो हम शुरू से कहते आ रहे हैं. सहारा के मालिक सुब्रतो रॉय की सबसे बड़ी धूर्ततापूर्ण बात तो यही थी कि इतनी बड़ी कम्पनी का मालिक होते हुए भी अपने आप को सहारा परिवार का मुखिया कहता था और पूरे साम्राज्य का मनचाहा इस्तेमाल करता था. 

वह जेल जाने से पहले तक दावा करता रहा कि निवेशक चिंता न करें, उनके पास दो लाख करोड़ से भी ज्यादा का कैश है, वे जब चाहेंगे, तब कोर्ट को पैसा दे देंगे. और अब सवा साल से ज्यादा जेल प्रवास, कोर्ट की सब तरह की डांट-डपट के बाद भी मात्र 10 हजार करोड़ रु. नहीं निकल पा रहे हैं. सहारा की तमाम कम्पनियों के कर्मचारी तनख्वाह को महीनों से तरस रहे हैं, सो अलग. संपत्तियां इस लायक नहीं हैं कि कोई उनके उचित दाम भी लगाए. 

सरकारी दामाद की तरह कोर्ट ने सारी सुविधायें देकर जेल में उनकी जर्रानवाजी की लेकिन अब अदालत भी समझ गई है कि सुब्रतो रॉय केवल देश और अदालात को उल्लू बना रहे हैं, जैसा कि वे और उनके जैसे तमाम चिटफंडबाज दशकों से करते आ रहे हैं.

कोर्ट ने कहा है कि राय अपनी मर्जी से जेल में हैं क्योंकि उन्होंने माननीय न्यायधीशों के समक्ष ये घोषणा की थी कि उनके पास १.८५ लाख करोड़ रु. हैं और अब उनके वकील चिल्ला -चिल्ला कर ये कह रहे हैं कि सहारा कंगाल है और उसके पास १० हजार करोड़ रु. भी नहीं हैं.

यानि अगर सुब्रतो रॉय अदालत द्वारा जेल नहीं भेजे जाते तो आज भी देशवासी इसी भ्रम में रहते कि सहारा के साम्राज्य का कोई ओर-छोर नहीं है और वे सहारा द्वारा बनाए गए तिलिस्म में फंसे रहकर कई लाख करोड़ रु. और डुबो चुके होते.

धन्यवाद सुप्रीम कोर्ट, इसीलिए आप में देश की जनता का भरोसा बरकरार है. अब ज़रा उन कम्पनियों की ओर भी नजरेइनायत कर लीजिये, जो अब भी कानून को मजाक समझ कर सेबी और तमाम नीति नियामक संस्थाओं को धता बता रही हैं। वे भी सहारा के नक़्शे क़दम पर चलते हुए देश की जनता को लूट रही हैं.

हरिमोहन विश्वकर्मा से संपर्क : vishwakarmaharimohan@gmail.com

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

नेटवर्क18 से रिलायंस वाले 3.1% इक्विटी हिस्सेदारी निकालेंगे

मुंबई से खबर है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने नेटवर्क18 मीडिया एंड इंवेस्टमेंट लिमिटेड में से अपनी 3.1 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी निकालने का फैसला किया है. इससे उसे 200 करोड़ रुपए मिलने का अनुमान है. ऐसा सेबी के उस नियम की पालना के लिए किया जा रहा है जिसके तहत किसी भी लिस्टेड कंपनी में पब्लिक शेयर न्यूनतम 25 प्रतिशत होनी चाहिए. या यूं कहें लिस्टेड कंपनी में प्रवर्तकों की इक्विटी हिस्सेदारी 75 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकती. आरआईएल ने पिछले साल इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट (आईएमटी) बनाकर 4000 करोड़ रुपए में नेटवर्क18 को खरीद लिया था.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

एनडीटीवी पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना… सेबी ने मनी लांडरिंग मामले में दोषी माना…

एक बड़ी खबर बाजार नियामक सेबी से आ रही है. एनडीटीवी पर मनी लांड्रिंग समेत कई किस्म की आर्थिक गड़बड़ियों के आरोप लगे थे जिसकी सुनवाई सेबी में चल रही थी. सेबी ने इन मामलों को लेकर सूचनाएं और तथ्य छिपाने समेत कई आरोपों को सही मानते हुए एनडीटीवी को दोषी करार दिया है. सेबी ने इस कंपनी पर दो करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है. न्यू देलही टेलीविजन लिमिटेड नामक कंपनी के बैनर तले एनडीटीवी 24×7, एनडीटीवी इंडिया समेत कई न्यूज चैनलों का संचालन किया जाता है. कंपनी के कर्ताधर्ता प्रणय राय और राधिका राय हैं. इन पर कई किस्म की आर्थिक अनियमितताओं के आरोप लगे. एनडीटीवी की तरफ से आरोपों से इनकार किया जाता रहा है. पर अब सेबी द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से एनडीटीवी की नैतिक स्थिति काफी कमजोर हो गई है. SEBI finds NDTV guilty of concealing information in money laundering matter… imposes fine of Rs. 2 crore… सेबी का आदेश यूं है…


 ORDER

In  view  of  the  above,  after  considering  all  the  facts  and  circumstances  of  the  case  and exercising the powers conferred upon me under Section 23 I of the SCRA and Rule 5 of the SCR  Adjudication  Rules,  I  hereby  impose  a  penalty  of  Rs.  25,00,000/-(Rupees  Twenty  Five Lacs only) upon the Noticee for violation of Section 23 A and   Rs. 1,75,00,000/-(Rupees One Crore Seventy Five Lacs only) for the violation of Section 23 E of the SCRA. Therefore, a total penalty  of  Rs.  2,00,00,000/-  (Rupees  Two  Crores  Only)  is  imposed  upon  the  Noticee  M/s. New  Delhi  Television  Limited    which  will  be  commensurate  with  the  violations committed by the Noticee. The  Noticee  shall  pay  the  said  amount  of  penalty  by  way  of  demand  draft  in  favour  of “SEBI – Penalties Remittable to Government of India”, payable at Mumbai, within 45 days of receipt of this order. The said demand draft should be forwarded to Mr. Jayanta Jash, Chief General  Manager,  Corporation Finance  Department,  SEBI  Bhavan,  Plot  No.  C – 4 A,  “G” Block, Bandra Kurla Complex, Bandra (E), Mumbai – 400 051.


इस मामले में सेबी द्वारा दिए गए फैसले की कापी भड़ास के पास है जिसे नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ा जा सकता है : Order Copy

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सेबी के रिफंड खाते में 1.3 करोड़ डॉलर लाने के दावे की सहारा ने की तरफदारी

नई दिल्ली : सेबी के साथ लंबे समय से कानूनी विवाद में उलझे सहारा ग्रुप ने अमेरिकी अदालत के सामने नियामक के समक्ष संकट ग्रस्त समूह की कॉर्पोरेट जेट बेचने से मिली करीब 1.3 करोड़ डॉलर की राशि वापस लाने के दावे का समर्थन किया है। समूह ने इस मामले में सेबी के सक्रिय योगदान की भी प्रशंसा की, जो भारत में एक मुकदमे के बाद सहारा समूह के स्वामित्व वाले कॉर्पोरेट जेट की बिक्री के अदालती अदेश से जुड़ा है और एस्क्रो खाते में रखी राशि के वितरण पर विचार के लिए रिसीवर (मुकदमे से जुड़ा संपत्ति का सरकारी प्रबंधक) नियुक्त किया गया था। 

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कोष के दावे के साथ पिछले महीने इंडियानापोलिस अदालत की अदालत का दरवाजा खटखटाया था जिसे सेबी-सहारा रिफंड खाते में हस्तांतरित करने की जरूरत है ताकि भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश का अनुपालन किया जा सके। अमेरिकी अदालत ने यह मांग खारिज कर दी क्योंकि यह दावा तय समयसीमा के बाहर किया गया था और यह इसके आदेश के अनुरूप नहीं था।

अदालत ने रिसीवर को दावे की वैधता की जांच करने और इसके आधार पर फैसला करने के लिए कहा था। इस घटनाक्रम पर सहारा समूह के प्रवक्ता ने सोमवार को कहा कि सहारा समूह की एक कंपनी, हॉस्पिटैलिटी बिजनेस लिमिटेड ने एक नया एयरबस ए319 विमान खरीदा था। प्रवक्ता ने कहा, ‘यह विमान ब्रिटेन के परिचालक को दीर्घकालिक पट्टे पर निजी चार्टर के लिए लग्जरी कार्यकारी जेट के तौर पर चलाने के लिए दिया जाना था। हॉस्पिटैलिटी ने इस विमान को आंतरिक सज्जा और केबिन के काम के लिए इंडियानापोलिस की ‘कॉम्लेक्स’ के पास भेजा। हॉस्पिटैलिटी, कॉम्लेक्स को अनुबंध राशि का भुगतान नहीं कर सकी क्योंकि सहारा समूह विदेशी मुद्रा में सौदे नहीं कर सकता था। कॉम्लेक्स ने इंडियानापोलिस में हॉस्पिटैलिटी के खिलाफ एक मामला दायर किया जिसमें उसके पक्ष में फैसला दिया गया।’

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अमर उजाला का एक और कारनामा : सेबी के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस में अहम जानकारियों को छिपाया, रविंद्र ने आपत्ति दर्ज कराई

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड की नार्दर्न रीजनल ऑफिस के क्षेत्रीय प्रबंधक को लिखे एक पत्र में अमर उजाला धर्मशाला (हिमाचल प्रदेश) के सीनीयर एडिटर रविंद्र अग्रवाल ने बताया है कि अखबार के संबंधित ड्राफ्ट प्रोस्पेक्टस में न्यायिक विवाद से जुड़ी अहम जानकारी को छिपाया गया है। साथ ही मीडिया कर्मियों के लिए घोषित मजीठिया वेजबोर्ड की सिफारिशों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले की अवज्ञा संबंधी तथ्यों का भी उल्लेख नहीं किया गया है। फैसले के तहत अमर उजाला पर अपने संस्थान के कर्मचारियों की करोड़ों रुपये की देनदारी है। अखबार ने इस भुगतान से बचने के लिए अपनी सभी यूनिटों को अलग-अलग दर्शाया है, जो कि वर्किंग जर्नलिस्ट एक्ट 1955 की धारा 2-डी के प्रावधानों का स्पष्ट उल्लंघन है और इसी को लेकर कोर्ट में विवाद लंबित है। अमर उजाला ने गंभीर वित्तीय अनियमितता के साथ ही माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवमानना की है। इसलिए अमर उजाला को आईपीओ की इजाजत देने से पहले सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालय हिमाचल प्रदेश के निर्णय का इंतजार किया जाए। 

रविंद्र अग्रवाल के पत्र (दो पृष्ठों में) की फोटो प्रति इस प्रकार है –

प्रोस्पेक्टस पर दर्ज रविंद्र अग्रवाल के आपत्ति-पत्र का पृष्ठ-एक 

प्रोस्पेक्टस पर दर्ज रविंद्र अग्रवाल के आपत्ति-पत्र का अंतिम पृष्ठ-दो

उल्लेखनीय है कि हिंदी दैनिक अमर उजाला की प्रकाशक कंपनी, अमर उजाला पब्लिकेशंस ने शुरुआती पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के जरिए धन जुटाने के वास्ते पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा करा दिया है। इस ऑफर में 50 करोड़ तक नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि कंपनी के प्रवर्तक राजुल माहेश्वरी, स्नेहलता माहेश्वरी और पन अंडरटेकिंग्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड अपने 26.9 लाख (26,90,234) शेयरों को बिक्री (ओएफएस) के लिए पेश करेंगे। ओएफएस से मिली रकम सीधे संबंधित शेयरधारकों को मिल जाएगी और कंपनी का उसका कोई हिस्सा नहीं मिलेगा। वहीं नए शेयरों से मिली शुद्ध रकम का इस्तेमाल अमर उजाला विस्तार के लिए प्रिंटिंग मशीनों व होर्डिंग्स की खरीद और अपनी एक सब्सिडियरी में निवेश के लिए करना चाहता है। 

 

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

अमर उजाला ने आईपीओ लाने के लिए मांगी सेबी से इजाज़त

मुंबई : हिंदी दैनिक अमर उजाला की प्रकाशक कंपनी, अमर उजाला पब्लिकेशंस ने शुरुआती पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के जरिए धन जुटाने के वास्ते पूंजी बाज़ार नियामक संस्था, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) जमा करा दिया है। इस ऑफर में 50 करोड़ तक नए शेयर जारी किए जाएंगे, जबकि कंपनी के प्रवर्तक राजुल माहेश्वरी, स्नेहलता माहेश्वरी और पन अंडरटेकिंग्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड अपने 26.9 लाख (26,90,234) शेयरों को बिक्री (ओएफएस) के लिए पेश करेंगे। ओएफएस से मिली रकम सीधे संबंधित शेयरधारकों को मिल जाएगी और कंपनी का उसका कोई हिस्सा नहीं मिलेगा। वहीं नए शेयरों से मिली शुद्ध रकम का इस्तेमाल अमर उजाला विस्तार के लिए प्रिंटिंग मशीनों व होर्डिंग्स की खरीद और अपनी एक सब्सिडियरी में निवेश के लिए करना चाहता है। 

डीआरएचपी के मुताबिक आईपीओ से मिली शुद्ध रकम का इस्तेमाल इस प्रकार किया जाएगा: – 31.49 करोड़ रुपए मौजूदा क्षमता को बढ़ाने के लिए प्रिंटिंग मशीनों की खरीद पर लगाए जाएंगे। – 7.88 करोड़ रुपए से आउट ऑफ होम (ओएचएच) विज्ञापन के लिए होर्डिंग खरीदी जाएंगी। – 87.5 लाख रुपए डिजिटल बिजनेस में विस्तार के लिए सब्सिडियरी में निवेश किए जाएंगे। – बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों को पूरा करने में लगाई जाएगी। कंपनी ने कहा है कि वो इश्यू की शुद्ध प्राप्तियों से उसका कोई इरादा सेकेंड हैंड संयंत्र व मशीनरी या विविध अचल संपत्तियां खरीदने का कतई नहीं है। उसने यह भी कहा है कि इस रकम का इस्तेमाल कार्यशील पूंजी ज़रूरतों को पूरा करने में नहीं किया जाएगा। 

ड्राफ्ट प्रॉस्पेक्टस में कहा गया है, “हमें उम्मीद है कि हम भविष्य में अपनी कार्यशील पूंजी ज़रूरतों की पूर्ति आंतरिक प्राप्तियों, मौजूदा ऋण सुविधाओं या क्रेडिट की नई व्यवस्था से कर लेंगे।” एक्सिस कैपिटल और आईडीएफसी सिक्यूरिटीज इस इश्यू के बुक रनिंग लीड मैनेजर हैं, जबकि लिंक इनटाइम इसका रजिस्ट्रार है। वित्तीय स्थिति 31 दिसंबर 2014 को समाप्त नौ महीनों की अवधि में कंपनी की आय 573.03 करोड़ रुपए रही है जिस पर उसने 26.66 करोड़ रुपए के शुद्ध लाभ की घोषणा की है। वित्त वर्ष 2013-14 में कंपनी की आय 17.68 प्रतिशत बढ़कर 640.34 करोड़ रुपए हो गई थी। इससे साल भर पहले कंपनी की आय 544.15 करोड़ रुपए रही थी। वहीं, वित्त वर्ष 2013-14 में कंपनी का शुद्ध लाभ 25.01 करोड़ रुपए रहा था, जो साल भर पहले के 18.51 करोड़ रुपए से 35.08 करोड़ रुपए ज्यादा था। शेयरधारिता प्रवर्तकों व प्रवर्तक समूह के पास अमर उजाला पब्लिकेशंस के 90 लाख शेयर हैं। यह आईपीओ से पहले की इक्विटी का 82 प्रतिशत हिस्सा है। 

इसमें से राजुल माहेश्वरी व स्नेहलता माहेश्वरी दोनों के पास अलग-अलग 20.86 लाख शेयर या आईपीओ से पहले की 19 प्रतिशत इक्विटी है। अंटार्टिका फिनवेस्ट प्राइवेट लिमिटेड के पास कंपनी के 31.8 लाख शेयर या 28.97 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है। वहीं, नॉर्दर्न इंडिया मीडिया प्राइवेट लिमिटेड के पास कंपनी की 14.02 प्रतिशत इक्विटी हिस्सेदारी है। तन्मय माहेश्वरी और वरुण माहेश्वरी, दोनों के पास कंपनी के बराबर-बराबर 0.5 प्रतिशत शेयर हैं। कंपनी का बाकी 18 प्रतिशत मालिकाना पन अंडरटेकिंग्स नेटवर्क प्राइवेट लिमिटेड के पास है। अमर उजाला कंपनी का दावा है कि उसका प्रमुख ब्रांड, अमर उजाला पाठकों की संख्या (स्रोत: आईआरएस 2012, चौथी तिमाही) के लिहाज़ में भारत का चौथा सबसे बड़ा दैनिक समाचार पत्र है। साल 2014 की पहली छमाही में अमर उजाला का औसत सर्कुलेशन एबीसी (ऑडिट ब्यूरो ऑफ सर्कुलेशन) के अनुसार प्रति दिन लगभग 19.5 करोड़ प्रतियों का रहा है। इसका प्रकाशन सबसे पहले 1940 के दशक के उत्तरार्ध में आगरा से शुरू हुआ था। अभी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब व हरियाणा के साथ-साथ नई दिल्ली व चंडीगढ़ से इसके 19 संस्करण निकल रहे हैं। समाचार व समसामयिक मामलों के प्रिंट मीडिया के बिजनेस के अलावा कंपनी शैक्षिक पुस्तकों और पत्रिकाओं का भी प्रकाशन करती है। 

हिंदी टेलीविजन पोस्ट से साभार

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

हाई कोर्ट का आदेश- सहारा क्यू शॉप के खिलाफ शिकायत की सेबी जांच करे

चिटफंडियों के खिलाफ देश में चल रहे अभियान में एक बड़ी सफलता उस वक्त मिली जब इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) को आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ नूतन ठाकुर द्वारा सहारा क्यू शॉप अग्रिम तथा बॉण्ड जारी किये जाने के सम्बन्ध में दी गयी शिकायत की जांच के आदेश दिए हैं. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Zee Media gets Sebi’s nod for Rs 200 crore rights issue

Zee Media Corporation has received capital market regulator Sebi’s approval to raise up to Rs 200 crore through rights issue. In a rights issue, shares are issued to existing investors in line with their holding at pre-determined price and ratio. The company had filed its application with the capital market regulator for the proposed rights issue in January through its lead merchant banker Axis Capital Ltd.

According to the latest update by the Securities and Exchange Board of India (Sebi), the regulator issued its final ‘observations’ on the draft offer documents on February 18. Issuance of ‘observations’ on offer documents by Sebi is considered as a clearance to the issuer to go ahead with the share issues through routes like rights issue, IPOs and FPOs.

Sebi, last month, had sought clarification from the merchant banker regarding the issue. The funds raised from the issue would be utilised towards purchase of equipment and accessories for production and broadcasting, repayment of certain loans availed by the company, funding subsidiaries for repayment of loans, and other general corporate purposes.

Zee Media Corporation Ltd (ZMCL), formerly known as Zee News LtdBSE 2.80 %, broadcasts 10 news channels including two national ones – Zee News and Zee Business. Its regional news channels are Zee 24 Taas, 24 Ghanta, Zee Sangam, Zee Madhya Pradesh Chhattisgarh, Zee Purvaiya, Zee Marudhara, Zee Punjab Haryana Himachal and Zee Kalinga. Earlier in October, the company’s board of directors had “approved, in-principle, raising of funds for an amount not exceeding Rs 200 crore through issue of equity shares of the company to its eligible shareholders.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

Sebi seeks clarification on Zee Media’s Rs 200 cr rights issue

The Securities and Exchange Board of India (Sebi) has sought clarification from the merchant banker of Zee Media Corp on the firm’s proposed Rs 200-crore rights issue. Without disclosing the details, Sebi has said “clarifications (are) awaited from lead manager” for the proposed rights issue. In a rights issue, shares are issued to existing investors in line with their holding at pre-determined price and ratio.

According to the latest weekly update to the processing status of draft offer documents filed with Sebi, the regulator has said clarifications were awaited on the proposed rights issue of Zee Media as on January 23 this year. Sebi had received last communication from the company on the issue on January 21.

The status is updated on a weekly basis by the regulator and the next update of the status as on January 30, would be uploaded on Sebi website on the next working day. Sebi said that it might issue observations on Zee Media document within 30 days from the date of receipt of satisfactory reply from the lead merchant bankers to the clarification or additional information sought from them.

The regulator had received the draft offer documents on January 2 this year through its lead manager Axis Capital. The company’s proposed rights issue is estimated to raise up to Rs 200 crore. The funds raised from the issue would be utilised towards purchase of equipment and accessories for production and broadcasting, repayment of certain loans availed by the company, funding subsidiaries for repayment of loans, and other general corporate purposes.

Zee Media Corporation Ltd (ZMCL), formerly known as Zee News Ltd, broadcasts 10 news channels including two national ones – Zee News and Zee Business. Its regional news channels are Zee 24 Taas, 24 Ghanta, Zee Sangam, Zee Madhya Pradesh Chhattisgarh, Zee Purvaiya, Zee Marudhara, Zee Punjab Haryana Himachal and Zee Kalinga. Earlier in October, the company’s board of directors had “approved, in-principle, raising of funds for an amount not exceeding Rs 200 crore through issue of equity shares of the company to its eligible shareholders.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

‘PACL’ की असलियत : परिपक्वता अवधि पूर्ण होने के बाद भी एजेंट का लाखों रुपये दाबे बैठी है कंपनी

लगता है पीएसीएल कंपनी भी धराशाई होने की कगार पर है. यही कारण है कि यह कंपनी अपने निवेशकों का धन उन्हें परिपक्वता अवधि पूरी होने के बाद लौटा नहीं रही है. भड़ास4मीडिया को भेजे एक मेल में पीएसीएल के एक निवेशक सुरेंद्र कुमार पुनिया ने बताया है कि उनका इस कंपनी में एजेंट कोड Agent Code 1950022771 है. इनके कुल आठ एकाउंट हैं जिसमें कुल चार लाख रुपये यानि 4,00,000/- जमा हैं. इनकी परिपक्वता अवधि दिसंबर 2013 और जनवरी-फरवरी 2014 थी. पर कंपनी पैसे लौटाने में आनाकानी कर रही है. सुरेंद्र ने PACL Amount Refund मामले में भड़ास से दखल देने की गुजारिश की है.

ज्ञात हो कि ऐसे मामलों को सेबी देखती है और सेबी ही वो प्लेटफार्म है जहां निवेशक / एजेंट सीधे मेल कर रिफंड की फरियाद लगा सकते हैं. Surendra Punia की मेल आईडी surendrak.punia@gmail.com है.  सुरेंद्र पुनिया तो मात्र एक उदाहरण हैं. ये मेल लिख भेज लेते हैं इसलिए इनकी बात सुनी भी जा रही है, प्रकाशित भी हो रही है. लेकिन ऐसे हजारों एजेंट हैं जो अपढ़ हैं और मेल वगैरह का इस्तेमाल नहीं करते. वे लोग अपनी शिकायत बात कहां रख पाते होंगे. पीएसीएल के कई एजेंटों का कहना है कि उन्हें परिपक्वता अवधि पर पैसा लौटाने की जगह कंपनी किन्हीं दूसरी योजनाओं में पैसा लगवा दे रही है, वह भी बिना सहमति लिए. ऐसी गुंडागर्दी देखकर आज ये निवेशक / एजेंट उस क्षण को कोस रहे हैं जब उन्होंने अपना पैसा पीएसीएल में लगाने का फैसला किया.

संबंधित खबरें…

सेबी का आदेश- पीएसीएल नामक कंपनी के पास कोई मान्यता नहीं, जनता पैसा न लगाए

xxx

बिहार में पीएसीएल के चार ठिकानों पर छापेमारी, बैकडेट में जमा करा रहे थे पैसे

xxx

सुब्रत राय की राह पर निर्मल सिंह भंगू… SEBI ने दिया आदेश- निवेशकों को 50 हजार करोड़ रुपये PACL लौटाए

xxx

‘पी7 न्यूज’ के निदेशक केसर सिंह को हड़ताली कर्मियों ने बंधक बनाया, चैनल पर चला दी सेलरी संकट की खबर

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सहारा की कई कंपनियां आज भी मार्केट से पूंजी उठाने में जुटीं हैं… कहां है सेबी?

चिटफंड कम्पनी टिम्बरवर्ल्ड के खिलाफ निर्णय सुनाते हुए दिल्ली की तीसहजारी कोर्ट ने सेबी के हुक्मरानों को भी खरी-खरी सुना दी. कोर्ट ने कहा है कि यदि नियामक संस्थाओं ने सुस्ती या लापरवाही न दिखाई होती और समय पर सख्त कार्यवाई की होती तो आज निवेशकों के करोड़ों रुपये डूबने से बच जाते. कोर्ट ने कम्पनी पर 25 करोड़ का जुर्माना लगाया है. इस कम्पनी ने नियमों की कमजोरी का फायदा उठाते हुए बाजार से सामूहिक निवेश के जरिये 22 करोड़ रुपये उठाये और फिर अन्य चिटफंड कम्पनियों की तरह कभी वापस नहीं किया. Continue reading

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

घोटालेबाज प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

चारों तरफ से घिर चुके प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ अब ह्यूमन राइट कमीशन, मायनॉरिटी कमीशन और नेशनल विमन कमीशन की कार्यवाही के अलावा अब दिल्ली विजिलेंस के लोग भी सक्रिय हो गये हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर यूएनआई के अध्यक्ष पर रहते हुए आर्थिक घपले-घोटोलों के तमाम आरोप हैं. उन पर ये सारे आरोप ”सेव यूएनआई मूवमेंट” ने लगाए हैं. कहा जाता है कि घपले-घोटाले करना प्रफुल्ल माहेश्वरी की फितरत में शामिल है. प्रफुल्ल माहेश्वरी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से प्रकाशित एक हिंदी अखबार को चलाने वाली कंपनी के प्रमुख निदेशक मालिक-संपादक भी हैं.

प्रफुल्ल माहेश्वरी की यह कंपनी बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की ब्लैक लिस्ट ‘विल फुल डिफॉल्टर’ में दर्ज है. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा से 1541 लाख रुपये का कर्जा लिया था. आदत से मजबूर प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा का पैसा वापस नहीं किया. बैंक के अधिकारियों ने कर्जा वापसी की लाख कोशिशें की. हर बार नाकाम रहने के बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्रा ने प्रफुल्ल माहेश्वरी की कंपनी को उन देनदारों की सूची में डाल दिया जो जानबूझ कर कर्ज वापस नहीं करना चाहते हैं.

बैंक ऑफ महाराष्ट्रा  के देनदारों की काली सूची में नाम दर्ज होने से भी कोई फर्क नहीं है. सेव यूएनआई के वर्कर्स का कहना है कि प्रफुल्ल माहेश्वरी यूएनआई को भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शक्ल में चालाना चाहते हैं. इसी हठधर्मिता की वजह से उन्होंने यूएनआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक गैर मीडिया पर्सन की एंट्री करवा दी है. आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन कहा जाता है  कि रिएल इस्टेट कंपनी चलाने वाले गैर मीडिया पर्सन को प्रफुल्ल माहेश्वरी ने यूएनआई की जमीन पर कब्जा दिलाने के सब्ज बाग दिखाए थे. सेव यूएनआई मूवमेंट ने भी प्रफुल्ल माहेश्वरी के कच्चे चिटठे खोले हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी की एक अन्य कंपनी एनबी प्लांटेशन भी आर्थिक अनियमितताओं के चलते सेबी के रडार पर काफी पहले से है. ऐसे भी कयास हैं कि एनबी प्लांटेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप में सेबी प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है.

उपरोक्त प्रकरण के बारे में जब प्रफुल्ल माहेश्वरी से संपर्क किया और आरोपों पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका रिवर्ट मैसेज था, ‘Sorry to read all this junk. Pl get in touch with the person who has given this false information and verify yourself…’ ”….I am not the chairman of UNI and can only speak for myself.”

हालांकि, प्रफुल्ल माहेश्वरी को फिर से कुछ सवाल भेजे गये हैं. अगर वो अपना पक्ष रखते हैं तो अगली किश्त में उनको भी प्रकाशित किया जाएगा. इन सब के अतिरिक्त एमपीएसआईडीसी के जमीन घोटाले में भी प्रफुल्ल माहेश्वरी का नाम शामिल है. उसकी जानकारी भी अगली किश्त में विस्तार से दी जाएगी.

भड़ास के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) राजीव शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 09968329365

इसे भी पढ़ें….

प्रफुल्ल के खिलाफ विजिलेंस जांच, ब्लैकमनी को ह्वाइट करने में भी फंसे

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

बिहार में पीएसीएल के चार ठिकानों पर छापेमारी, बैकडेट में जमा करा रहे थे पैसे

बिहार में ‘जमाकर्ता हित संरक्षण अधिनियम’ के तहत पहली बार आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने पर्ल एग्रो टेक कॉरपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के खिलाफ कार्रवाई की है. इओयू ने कंपनी के पूर्णिया, वैशाली, सासाराम और बिहारशरीफ स्थित कार्यालयों पर छापेमारी कर करीब 20 लाख रुपये नकद बरामद किया और कुछ कार्यालय संचालकों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया. चारों जिलों में कंपनी के नौ निदेशकों सह प्रमोटरों पर एफआइआर दर्ज की गयी है.

बिहार में जिन जिलों में छापेमारी की गयी है, वहां पाया गया कि पीएसीएल लोगों से पैसा तो आजकल में ले रही थी, लेकिन उन्हें रसीद बैक डेट यानी 21 अगस्त, 2014 का दे रही थी. लोगों को यह झांसा दे रही थी कि बैक-डेट से रसीद दे रहे हैं, तो ब्याज भी उसी दिन से देंगे. इस झांसे में लोग बड़े आराम से फंस रहे थे. साथ ही जो लोग अपने पहले से जमा किये पैसे लौटाने की जिद कर रहे थे, उन्हें वर्तमान जमा राशि से ही लौटा रहा था. बिहार में कंपनी का आफर था कि किस्तों में पैसा दें और जमीन ले जाएं. पूर्णिया, वैशाली, नालंदा समेत कई जिलों में लैंड ब्लॉक होने की बात कंपनी कहती थी, लेकिन जांच में ऐसा कुछ नहीं मिला. इसके अलावा कंपनी कई तरह के लोक लुभावने ‘कलेक्टिव इंवेस्टमेंट स्कीम’ के तहत लोगों से पैसा जमा करवाती थी.

पूर्णिया से मिली जानकारी के अनुसार आर्थिक अपराध इकाई के निर्देश पर सोमवार को स्थानीय बस स्टैंड के सामने पाल मार्केट स्थित पीएसीएल ननबैंकिंग कंपनी के कार्यालय में की गई छापामारी में गिरफ्तार हुए शाखा प्रबंधक समेत 11 कर्मियों को मंगलवार को जेल भेज दिया गया है जबकि पुलिस ने इस मामले में कंपनी के डायरेक्टर समेत 23 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है. छापामारी के दौरान गिरफ्तार हुए शाखा प्रबंधक मनोज कुमार कर, सीनियर सहायक गोपाल कुमार मिश्र, बबन कुमार, सहायक गौतम कुमार, स्टोर कीपर अजीत कुमार के अलावा मृत्युंजय कुमार, चन्द्रमणि कुमार सिंह, अमरेन्द्र कुमार गुप्ता, नीरज कुमार सिंह, अरूण कुमार राव एवं रामजी सिंह को पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई के बाद जेल भेज दिया है. पुलिस ने इसके अलावा पीएसीएल कंपनी के डायरेक्टर सुखदेव सिंह तथा दिल्ली स्थित कार्यालय के निर्मल सिंह भंगू, आनंद गुरूवंत सिंह, तरलोचन सिंह, गुरूनाम सिंह, उत्पल, दविन्द्र कुमार, योगिन्द्र सिंह, गुरमीत सिंह, सुब्रतो भट्टाचार्य के साथ-साथ कोलकाता के आईटी सुपरवाइजर शशिकांत मोहंती, पटना शाखा के सीएससी प्रभारी सतीश कुमार जैन, सीनियर असिसटेंट अजय कुमार के खिलाफ भादवि की धारा 406, 420, 468, 471, 109, 120 बी, 34 एवं सेक्शन 3 बिहार प्रोटेक्शन आफ इंटरेस्ट आफ डिपोजिट एक्ट 2002 सेक्शन 66 आई टी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है. सेबी के रोक के बावजूद तीन माह के भीतर ग्राहकों से करीब सवा करोड़ की राशि अवैध तरीके से जमा लिए गए थे जबकि सेबी ने तीन माह के अंदर ग्राहकों को रुपया वापस करने का निर्देश दिया था. 17 नवंबर तक राशि जमा करने वालों को भी 21 अगस्त का ही रसीद दिया जाता था. छापामारी के दौरान पुलिस ने लगभग साढ़े चार लाख नगद एवं पीएनबी एवं एक्सिस बैंक के कई चेक बुक भी बरामद किए थे जो फर्जी तरीके से राशि का लेनदेन करते थे. इस मामले में नामजद अभियुक्तों में से 11 को जेल भेज देने के बाद अन्य अभियुक्तों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई तेज कर दी गई है.

उल्लेखनीय है कि पर्ल ग्रुप के 45 हजार करोड रुपये के घोटाले की अब तक की जांच के दौरान सीबीआई को अनेक ऐसे दस्तावेज बरामद हुए है जिनसे पता चलता है कि जाली भूमि आवंटन पत्रों को जारी कर भारी मात्रा में निवेश इकट्ठा किया गया. सीबीआई ने ग्रुप के लगभग एक हजार संदेहास्पद बैंक खातों को सील कर दिया है और ग्रुप के निदेशको से अनेक बार पूछताछ करने के बाद उनके विदेश जाने पर रोक लगा दी है. प्रवर्तन निदेशालय ने भी पीएसीएल के खिलाफ मनी लांड्रिग एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर अनेक लोगों से पूछताछ की है. पीएसीएल के इस झांसे में देश के करीब 5 करोड़ निवेशक आ गए . कंपनी में करीब 45 हजार करोड़ रुपये निवेश हुआ. आरोप है कि जब पैसा लौटाने की बात आई तो निेवेशक को नहीं उनका पैसा मिला . पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड यानी पीएसीएल पर जाली दस्तावेजों के जरिए कई भूमि आवंटन करने का आरोप. कंपनी के एक हजार खाते शक के आधार पर सीज. कंपनी के प्रमुख प्रमोटरों के विदेश जाने पर रोक. पीएसीएल के खिलाफ सीबीआई ने आपराधिक षडयंत्र और धोखाधडी के तहत मुकदमा दर्ज किया. पीएसीएल का मामला शारदा घोटाले से अलग एक ही जमीन के कागज कई लोगों के पास अनेक राज्यों में जमीनों के दस्तावेजों की जांच जारी ईडी ने भी लोगों से पूछताछ शुरू की. सीबीआई ने इसी साल फरवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पीएसीएल और उसकी सहयोगी कंपनी पीजीएफ के खिलाफ 45 हजार के तथाकथित घोटाले में जांच शुरु कर अनेक शहरो में छापेमारी की थी. इस छापेमारी के दौरान सीबीआई को एक ट्रक से भी ज्यादा दस्तावेज बरामद हुए थे. इन दस्तावेजों की अब तक की जांच के दौरान सीबीआई को जमीनों के आवंटन को लेकर अनेक ऐसे दस्तावेज मिले है जिनसे पता चलता है कि एक ही जमीन कई लोगों को आवंटित कर दी गई. छापे में मिली जमीनों की सेल डीड ट्रासंफर डीड और टाईटल डीडो की मौके पर पहुंच कर जांच की जा रही है.

कुछ दस्तावेज की जांच से पता चला है कि कई जगहो पर कंपनी ने अपनी जमीनें दिखाई थी लेकिन सीबीआई अधिकारी जब जांच के लिए उन जगहो पर पहुंचे तो वहा वह जमीनें नहीं थी जैसा कि कंपनी ने दावा किया था. सीबीआई ने मध्य प्रदेश सरकार के साथ मिल कर भी कई जमीनों की जांच की है और अनेक राज्यों में सीबीआई की टीमें जमीनों और खाताधारकों दोनों की जांच कर रही है . सीबीआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस मामले में पीएसीएल कंपनी के निदेशको से कई चरणों में पूछताछ की गई है और पूछताछ के बाद पासपोर्ट अथारिटी को सूचित कर दिया है कि कंपनी के मेन प्रमोटर्स के लिए विदेश जाने पर रोक लगा दी गई है. अधिकारी ने बताया कि शक के आधार पर कंपनी के एक हजार बैंक खातों को सीज कर दिया गया है. सीबीआई का अधिकारिक तौर पर कहना है कि इस मामले की जांच के दौरान ऐसे तमाम सबूत मिले है जिनसे पता चलता है कि कंपनी ने आपराधिक षडयंत्र और धोखाधडी के जरिए पैसे एकत्र करने का काम किया मसलन जब पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने पीएसीएल कंपनी को अपनी योजना को खत्म करने और निवेशको का पैसा वापस करने को कहा तो दिल्ली में दूसरे नाम से जाली योजना चलाई गई औऱ इसके लिए दूसरी कंपनी खोल ली गई. आरोप है कि दिल्ली की इस दूसरी कंपनी ने नए निवेशको से फंड इकट्ठा किया औऱ पहली कंपनी के निवेशकों को इसके जरिए पैसा वापस किया गया . पीएसीएल के खिलाफ सीबीआई के अलावा प्रवर्तन निदेशालय ने भी मनी लाड्रिग एक्ट यानि पीएमएलए के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है और इस बाबत अनेक लोगों से पूछताछ की जा रही है ईडी जानना चाहता है कि इस मामले में कहीं हवाला के जरिए पैसा बाहर तो नहीं भेजा गया ईडी ने इस मामले में अधिकारिक तौर पर केवल इतना कहा कि मामले की जांच जारी है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सहारा समूह ने 17,000 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग के लिए फर्जी इनवेस्टर बनाए!

एक बड़ी सूचना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के सूत्रों के हवाले से आ रही है कि सहारा समूह ने मनी लांड्रिंग के लिए ढेर सारे फर्जी निवेशक बनाए. इस आशंका / आरोप की जांच के लिए सेबी ने कहा था जिसके बाद प्रवर्तन निदेशालय सक्रिय हो गया है. सेबी ने ईडी को फर्जी निवेशकों के बारे में अपने पास मौजूद समस्त जानकारी दे दी है. सेबी ने सहारा मामले में जांच की रिपोर्ट भी ईडी को सौंप दी है. सेबी रिपोर्ट के आधार पर पीएमएलए कानून के उल्लघंन का मामला बनाएगी.  ईडी जानबूझ कर बनाए गए फर्जी निवेशकों की जांच कर रहा है.

सहारा समूह ने अपनी तरफ से सेबी को निवेशकों के बारे में जो जानकारी दी थी, वह गलत निकली है. सेबी को 20,000 करोड़ रुपये में से करीब 17,000 करोड़ रुपये की मनी लांड्रिंग का शक है. इस मामले में उत्तरप्रदेश के एक बड़े राजनेता की भूमिका की भी जांच होगी. पूरे खेल के खुलासे के लिए प्रवर्तन निदेशालय की एक टीम जल्द ही सुब्रत रॉय से तिहाड़ जेल में पूछताछ कर सकती है.  ईडी ने सहारा के खिलाफ ईसीआईआर (एनफोर्समेंट केस इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट) दाखिल कर दिया है. उधर, सहारा का कहना है प्रवर्तन निदेशालय इस मामले की जांच नहीं कर सकता क्योंकि सेबी की जांच फिलहाल जारी है.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सेबी का आदेश- पीएसीएल नामक कंपनी के पास कोई मान्यता नहीं, जनता पैसा न लगाए

सेबी ने अखबारों में विज्ञापन निकालकर आम जन को आगाह किया है कि वे पी7न्यूज चैनल चलाने वाली कंपनी / समूह ‘पीएसीएल’ नामक कंपनी में एक भी पैसा न लगाएं क्योंकि इस कंपनी के पास किसी तरह का कोई लाइसेंस या मान्यता नहीं है. सेबी का कहना है कि जो कोई भी इस कंपनी में पैसा लगाएगा या लगाए हुए है, वह खुद जिम्मेदार होगा और इसका जोखिम वह खुद झेलेगा. जनहित में जारी विज्ञापन की कटिंग इस प्रकार है…

उधर, पीएसीएल समेत शारदा, सहारा जैसी चिटफंड कंपनियों में संकट आ जाने के बाद इनके एजेंट बेहद परेशान हैं. आंकड़े कहते हैं कि ये घोटाला उजागर होने से अब तक शारदा से जुड़े ३० एजेंट भी आत्महत्या कर चुके हैं और कई के सामने मरने के अलावा कोई और चारा नहीं बचा है. ऐसा ही सहारा काण्ड उजागर होने के बाद सामने आ रहा है जहां उसके कई एजेंट आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं. ये वो लोग हैं जिन्होंने सहारा, शारदा, रोजवैली और पर्ल्स जैसी कम्पनियों के झांसे में आकर मोटी रकमें जनता से उगा कर दीं और अब परेशान -हलकान हैं. पहले चिटफंड काण्ड में फंसे असम के एक्स डीजीपी बरुआ ने ख़ुदकुशी कर ली और अब सांसद कुणाल घोष ने कोशिश की जान देने की.

आखिर कौन हैं इस सबकी हत्याओं के लिए जिम्मेदार लोग? जो जेल में बंद है और चैन की रोटी खा रहे हैं वो या ममता बनर्जी जैसे लोग, जिन्होंने सत्ता के साथ ऐसे लोगों का कॉकटेल बनाया और आगे बढ़ने के बाद इन कम्पनियों और जनता दोनो को मरने को छोड़ दिया। मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अलावा उड़ीसा में भी अब ऐसी कम्पनियों पर कार्यवाई चल रही है लेकिन बड़ा सवाल ये उठता है कि ऐसी कंपनियां किन कानूनों के लचीलेपन का लाभ उठा कर इतना लंबा रास्ता तय कर लेतीं हैं कि लाखों क-करोड़ों लोग इनके जाल में फंस जाएँ और अपनी जमा पूंजी गवां बैठें।

आज देश के बड़े राज्यों उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र ऐसी कम्पनियों के संजाल में हैं, पच्छिम बंगाल में शारदा और रोजवैली जैसी कम्पनियों का भंवरजाल सामने आ ही गया है, मध्य प्रदेश में लगभग ५० कंपनियां शिकंजे में हैं और हाल ही में छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में बड़ी संख्या में इन कम्पनियों पर कार्यवाई जारी है, लेकिन फिर भी ये सवाल अपनी जगह खड़ा है कि कौन है इन कम्पनियों को बढ़ावा देने वाली वे ताक़तें जो इन्हें अभयदान देतीं है कि वे जनता का आर्थिक शोषण कर सकें? सवाल का जवाब शायद हमारे राजनेता, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का वर्ग दे सके जो इन्हें अपनी नाक के नीचे पलने का मौक़ा देता है लचीले कानूनों की आड़ का बहाना बना कर, क्योंकि इनके लिए ये धन की अमरबेल बन जातीं है.

हरिमोहन विश्वकर्मा की रिपोर्ट.

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

4600 सहारा निवेशकों ने की रिफंड की मांग

नई दिल्ली। सहारा समूह की दो कंपनियों सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के लगभग 4600 निवेशकों ने भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमयन बोर्ड (सेबी) से रिफंड के लिए आवेदन किया है। सेबी का आरोप है कि सहारा समूह की दो कंपनियों ने निवेशकों से तकरीबन 24 हजार करोड़ रूपए जुटाए हैं और ये धन निवेशकों ने नहीं लौटाया जा रहा है। सेबी का कहना है कि सहारा समूह ने फर्जी निवेशकों के बेनामी दस्तावेज तैयार किए हैं और यह धन वास्तव में किसी और का है।

सेबी ने सहारा समूह के बांड खरीदने वाले निवेशकों से रिफंड के लिए आवेदन मांगे थे। इससे जुड़े विश्वस्त सूत्रों ने बताया कि सेबी को अभी तक औसत मांग रूपए 20000 रूपए है और कुल मांग 10 करोड़ रूपए से कम है। सहारा का तर्क है कि जिन्होंने सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉर्पोरेशन लिमिटेड और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड में निवेश करने वाले और अपने निवेश वापसी की मांग करने वाले लोगों को भुगतान कर दिया गया है।

उसका कहना है कि 90 प्रतिशत से अधिक राशि वापस कर दी है और निवेशकों को सीधे भुगतान कर दिया है। शेष्ा धनराशि लगभग रूपए 2500 करोड़ है। सेबी ने अगस्त में निवेशकों से दस्तावेजी सबूत के साथ 30 सितंबर तक रिफंड के लिए आवेदन करने को कहा था। सूत्रों के अनुसार सेबी द्वारा रिफंड की प्रक्रि या शुरू हो चुकी है। निवेशकों के भुगतान के मामले को लेकर सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय लगभग छह माह से तिहाड़ जेल में हैं।

ज्ञातव्य है कि सुप्रीमकोर्ट ने निवेशकों के पुनर्भुगतान हेतु जोर डालते हुए 10 हजार करोड़ रूपए की जमानत राशि जमा कराने को कहा था। इस पर कंपनी ने अपने अमरीका और ब्रिटेन स्थित होटल तथा अन्य संपत्ति बेचने और गिरवी रखने की कोशिश की लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली है। दूसरी ओर सेबी ने पूर्व में निवेशकों की सूची मांगी थी लेकिन इसके जांच का काम अभी पूरा नहीं हुआ है।

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

भंगू, भट्टाचार्या समेत पीएसीएल के नौ प्रमोटरों-डायरेक्टरों के खिलाफ फ्राड-चीटिंग का मुकदमा चलेगा

पहले सीबीआई की रेड, फिर इनकम टैक्स की मार और अब सेबी का प्रहार. एक के बाद एक झटकों से चिटफंड कंपनी पीएसीएल का धंधा चरमराने की कगार पर आ गया है. निवेशकों में आशंका व्याप्त हो गई है. सेबी के ताजे आदेश के बाद पीएसीएल के नौ प्रमोटरों-डायरेक्टरों के जेल जाने की नौबत आ गई है. सेबी ने पीएसीएल के निर्मल सिंह भंगू, सुब्रत भट्टाचार्या, तरलोचन सिंह, गुरमीत सिंह, सुखदेव सिंह, गुरनाम सिंह, आनंद गुरवंत सिंह, उप्पल देविंदर कुमार और टाइगर जोगिंदर के खिलाफ फ्राड, चीटिंग आदि का मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. सेबी के 92 पेजी आदेश पर आधारित एक संक्षिप्त खबर इस प्रकार है…

Capital market regulator Sebi has ordered PACL to return Rs 50,000cr to investors. The company has allegedly collected this money by running illegal Ponzi schemes. Sebi has ordered PACL Ltd to refund the money within three months. Sebi has also announced to initiate further proceedings against the company and its nine promoters and directors for fraudulent and unfair trade practices, as also for violation of Sebi’s CIS Regulations, among others, as per a direction from the Supreme Court.

As per Sebi’s 92-page order, the total amount mobilised by the company, “by its own admission” comes to a whopping Rs 49,100 crore and “this figure could have been even more if PACL would have provided the details of the funds mobilized during the period of April 1, 2012 to February 25, 2013”.

It is estimated that the company has collected the total money from around 5.85 crore, which includes the customers who said to have been allotted land and who are yet to be allotted the land. According to the regulator, this is the biggest ever amount and the largest number of investors found involved in a case of unauthorised ‘collective investment scheme’ by them.

It is to be noted that PACL and its top executives, including Nirmal Singh Bhangoo, are being probed by CBI. PACL claimed it was in the business of purchasing and developing land, adding the developed land was transferred to investors, who could sell it for gains. “It is difficult to believe a person in Uttar Pradesh will purchase 100-150 yards of agricultural land 2,000 km away. The lack of maintenance of proper records/data is a clear indication the activities of PACL are in the nature of a Ponzi scheme,” Sebi said.

“PACL Ltd and its promoters and directors, including Tarlochan Singh, Sukhdev Singh, Gurmeet Singh and Subrata Bhattacharya, shall wind up all the existing collective investment schemes of the company and refund the monies collected under its schemes with returns due to its investors, according to the terms of offer, within a period of three months,” it added.

सेबी के 92 पेज के संपूर्ण आदेश की कापी को डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें: Sebi PACL ORDER

मूल खबर…

सुब्रत राय की राह पर निर्मल सिंह भंगू… SEBI ने दिया आदेश- निवेशकों को 50 हजार करोड़ रुपये PACL लौटाए

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें:

सुब्रत राय की राह पर निर्मल सिंह भंगू… SEBI ने दिया आदेश- निवेशकों को 50 हजार करोड़ रुपये PACL लौटाए

लगता है सहारा के बाद अब पीएसीएल का नंबर है. सुब्रत राय की तरह निर्मल सिंह भंगू पर भी जेल जाने की तलवार लटकने लगी है. भले ही भंगू के जेल जाने में अभी देर हो. पर इतना तो तय है कि सेबी की सक्रियता से चिटफंड के धंधेबाजों में दहशत का माहौल है. बाजार नियामक सेबी ने गैरकानूनी रूप से निवेशकों से धन जमा करने के मामले में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई करते हुए पीएसीएल लिमिटेड की मनी पूलिंग स्कीम पर रोक लगा दी है. आकलन के मुताबिक करीब 50 हजार करोड़ की रकम जुटाने वाली इस स्कीम के निवेशकों को उनकी रकम तीन हफ्ते के भीतर लौटाने का सेबी ने कंपनी को दिया है.

Nirmal Singh Bhangoo

पीएसीएल की स्कीम पर रोक लगाने के साथ ही सेबी ने फर्जीवाडे़ और और नियमों का उल्लंघन करते हुए कारोबार के अनुचित तरीके अपनाने को लेकर कंपनी के नौ प्रोमोटरों और निदेशकों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार कार्रवाई शुरू करने की बात भी कही है. सेबी ने अपने 92 पन्नों के आदेश में कहा है कि कंपनी की स्वीकारोक्तियों के आधार पर इस स्कीम के तहत जुटाई गई रकम 49,100 करोड़ रुपये बैठती है. सेबी के मुताबिक पीएसीएल की ओर से 1 अप्रैल 2012 से 25 फरवरी 2013 के बीच हस्तांतरित धनराशि संबंधी पूरे विवरण उपलब्ध कराए जाने पर स्कीम के जरिए जुटाई गई राशि कहीं अधिक बैठती. सेबी ने बताया कि पीएसीएल की इस स्कीम के जरिए करीब 5.85 करोड़ ग्राहकों से रकम जुटाई गई है. इसमें वह लोग भी शामिल हैं जिन्हें कथित रूप से रकम के एवज में जमीन दे दी गई है और वह भी, जो अभी जमीन मिलने के इंतजार में हैं. गौरतलब है कि इस मामले में सीबीआई निर्मल सिंह भंगू सहित पीएसीएल के शीर्ष प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों से पूछताछ कर चुकी है. पीएसीएल के प्रमोटर और निदेशक पर्ल ग्रुप और पीजीएफ ग्रुप के साथ भी जुडे़ रहे हैं. पर्ल ग्रुप की तरफ से पी7न्यूज नामक न्यूज चैनल भी संचालित किया जा रहा है.

सेबी के 92 पेज के संपूर्ण आदेश की कापी डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें: Sebi PACL ORDER

संबंधित खबरें…

पीएसीएल के संकट से ध्वस्त होने लगा पर्ल ग्रुप, मैग्जीन बंद, चैनल बंद होने की आशंका

xxx

कल्पतरु ग्रुप की हेकड़ी : सेबी की पाबंदी के बाद अब नई कंपनी बनाकर जमीन देने के नाम पर जनता से की जा रही अवैध उगाही

कृपया हमें अनुसरण करें और हमें पसंद करें: