ताजमहल में टिकट बिक्री का घोटाला (देखें वीडियो)

दुनिया की नायाब और हसीन इमारतों में शुमार ताजमहल को देखने के लिए दुनिया भर के पर्यटक आते हैं और इसकी ख़ूबसूरती के क़ायल हो जाते हैं। लेकिन ताजमहल में जाने के लिए जो टिकट ली जाती है, वो प्रयोग की हुई होती है। इसी टिकट का काला सच एक वीडियो में सामने आया है। वीडियो में एक विदेशी पर्यटक को एक हज़ार रुपये वाले टिकट देने की बजाए चालीस रुपए वाला टिकट थमा दिया जाता है। इस वीडियो से पुरातत्व विभाग से लेकर ताजमहल से जुड़े कई विभागों में हड़कंप मच गया है।

ताज़महल में टिकट के इस खेल से सरकार को राजस्व का करोड़ो का चूना लगाया जा रहा है। ताजमहल के विदेशी टूरिस्ट को पश्चिमी गेट की विंडो से दी गई यूज की हुई टिकट। रोज़ होती है यूज की हुई टिकिटों से अवैध कमाई। केनरा बैंक के पास है ताज की टिकट का ठेका। वहीं पुरात्तव अधीक्षण भुवन विक्रम सिंह ने बताया कि वीडियो की जाँच पड़ताल की जा रही है। जो सच होगा, वह सामने आएगा। रीसेलिंग इज़ वेरी डिफिकल्ट। अगर 1000 का टिकट 40 में बेचेंगे तो ठीक नहीं है। यह कभी हो नहीं सकता है। लेकिन फिर भी इस वीडियो की सच्चाई की हम जांच करेंगे।

देखें वीडियो…

आगरा से फरहान खान की रिपोर्ट. संपर्क : 9411948123

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पीएफ घोटालेबाज यूएनआई के खिलाफ कार्यवाही शुरू

हाल ही में पॉयनियर अखबार में एक खबर छपी है. इसमें बताया गया है कि पीएफ घोटालेबाजों में न्यूज एजेंसी यूएनआई भी है और इसके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है. खबर के मुताबिक यूएनआई पर अपने कर्मचारियों के पीएफ का 3.81 करोड़ रुपये बकाया है. इसकी वसूली के लिए यूएनआई की संपत्तियों को जब्त करने का काम पीएफ डिपार्टमेंट ने शुरू कर दिया है. पढ़िए पायनियर अखबार में प्रकाशित पूरी खबर….

Three EPF defaulters held in two months

New Delhi : Three Employee Provident Fund (EPF) dues defaulters from three establishments were arrested in the last two months and immovable properties of two of the establishments were attached. The three accused have been identified as Rajesh Vig owner of Weltech India Pvt Ltd, Rajbeer Singh partner of New Jagran Enterprises, who was in service of the Delhi Police and Jyoti Singh Rawat, owner of Jyoti Sweets and Bakery, Hari Nagar.

Abhay Ranjan, Regional Provident Fund Commissioner (I), North Delhi told The Pioneer that his office was making all out efforts to recover dues from defaulters. The Regional Provident Fund Commissioner (North Delhi) is the head of the entire zone. Meanwhile, Nidhi Singh, RPFC (Recovery) said that recently her office had recovered Rs10,24,715 from Dayanand Model School and Rs16,02,224 from Gayatri Securities Services by way of Bank Attachment and the bankers had also given a demand draft in favour of the RPFC. She said that stringent action was being taken against all defaulting establishments and owners.

“In case of another major defaulter, UNI, out of the total outstanding of Rs 3.81 crore, an amount of Rs2.25 crore has been recovered by way of attachment of bank account of the establishment and prohibitory orders against the debtors. This establishment has been directed to liquidate the dues in three months, otherwise chairman and directors will have to face stringent action as provided in the EPF & MP Act, 1952 and the schemes framed there under.

Also the properties of Hotel D Romana, Weltech & Vig Lables have been attached where sizable amount of recovery is pending and arrest warrants against these employers have already been issued by the Recovery Officer.” said Singh

Robin Banerjee, recovery officer, said his office was taking action as provided under Section 8B to 8F of the Employee Provident Fund Act & Scheme, 1952 against major defaulters like UNI, HT Media, M3 Media, Alkarna and others. In respect of UNI Rs2.25 crore and Alkarna more than Rs61 lakh has been recovered.

Banerjee said, “The defaulters were brought before me and they were kept in office custody since morning. Confinement orders for sending them to prison were ready but their relatives arrived at the EPF office and deposited the dues. in case of Rs2,85,367 from Weltech India, Rs92,611 from Jyoti Sweets and of Rs50,407 from New Jagran Enterprises were recovered.”

“In a major breakthrough the office has recovered Rs 95 lakh in November 2016 from Centaur Hotel. The establishment promised to deposit the remaining Rs 65 lakh in December 2016,” he added.

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कथित पत्रकार ने ‘इंडिया टीवी’ के नाम पर आधा दर्जन सरपंचों से लाखों रुपये की ठगी कर ली

अपने आपको पत्रकार बताने वाले एक व्यक्ति ने इंडिया टीवी के नाम पर आधा दर्जन सरपंचों को ठग लिया. छत्तीसगढ़ में जांजगीर-चांपा से खबर है कि अपने आपको इंडिया टीवी का पत्रकार बताते हुए शातिर ठग ने पहले सचिवों तथा सरपंचों से उनके गांव के विकास कार्यों के बारे में जानकारी ली. फिर कुछ दिनों बाद वो वापस पहुंचकर समाचार के बदले पन्द्रह पंद्रह सौ रुपए की मांग करने लगा. पन्द्रह सौ रुपए का चेक दिए जाने पर उस शातिर ठग ने उसमें कूटरचना कर आधा दर्जन सरपंचों से लाखों रूपए ठग लिए. निर्माण कार्यों के लिए राशि निकलवाने बैंक पहुंचने पर सरपंचों को खाते में राशि नहीं होने पर ठगे जाने का अहसास हुआ जिसके बाद सरपंचों ने मामले की शिकायत जांजगीर थाने में की है.

ग्राम पंचायत हरदी हरि के सरपंच नारदप्रसाद कश्यप पिता लल्लूराम कश्यप ने बताया कि एक माह पूर्व एक व्यक्ति खुद को इंडिया टीवी का पत्रकार बताते हुए आया और गांव में हुए विकास कार्यों के बारे में इंटरव्यू लिया. फिर वहा सरपंच श्रीमती सुकबाई के पास पहुंचा तथा उससे भी गांव में हुए विकास कार्यों के संबंध में इंटरव्यू लिया. जाते समय समाचार चलने पर शुल्क लगने की बात कही. दो दिन बाद उसने समाचार के एवज में पन्द्रह सौ रूपए की मांग की. उस समय पैसा नहीं दिए जाने पर बाद में आने की बात कहकर वह चला गया.

20 जून 2016 को फिर आने पर सरपंच एवं सचिव ने अपने हस्ताक्षर कर उसे ग्रामीण बैंक शाखा जांजगीर का एक हजार पांच सौ रूपए का चेक क्रमांक 786269 पंचायत प्रस्ताव की कापी के साथ दे दिया. दो दिन बाद वापस गांव पहुंचकर ठग ने उस पंचायत प्रस्ताव के आधार पर बैंक से राशि नहीं निकलने की बात कहते हुए अपने हाथ से लिखकर लाए गए पंचायत प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जिस पर सरपंच एवं सचिव ने हस्ताक्षर कर दिए. 16 जुलाई को सांसद मद से ग्राम पंचायत हरदी हरि में बनवाए गए सीसी रोड का पैसा निकलवाने के लिए सरपंच एवं सचिव जब ग्रामीण बैंक की जांजगीर शाखा पहुंचे तो उन्हें अपने खाते में राशि नहीं होने और 6 लाख 1 हजार पांच सौ रूपए निकलवाए जाने की जानकारी हुई.

नवागढ़ सचिव संघ के अध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह गहलौत ने बताया कि अपने आपको इंडिया टीवी का रिपोर्टर बताने वाले उस ठग के शिकार नवागढ़ ब्लाक के ही आधा दर्जन पंचायत के सरपंच हुए हैं. शातिर ठग ने सभी से 1 हजार 5 सौ रूपए का चेक लिया था जिसमें कूटरचना कर ग्राम पंचायत जगमहंत के खाते से 3 लाख 1 हजार 5 सौ, हरदी हरि के खाते से 6 लाख 1 हजार 5 सौ, पचेड़ा के खाते से 2 लाख 1 हजार 5 सौ, ग्राम पंचायत गौद के खाते से 91 हजार 5 सौ तथा दो अन्य पंचायतों के खाते से भी लाखों रुपये निकाल लिए.

इंडिया टीवी के नाम से जो बिल ठग ने सरपंचों को दी है उसे देखते ही उसके फर्जी होने का अहसास हो रहा है. बिल में इंडिया टीवी का मोनो अथवा लेटर पेट के स्थान पर सामान्य रूप से ही इंडिया टीवी लिखा है तथा उसके कार्यालय के रूप में भारत टाकीज, जुब्लेरी बिल्डिंग इन्द्रपुरी भोपाल मध्यप्रदेश का पता तथा प्रधान कार्यालय शाप नं.9, शिवाजी नगर, एलएमरोड, बोरीबली वेष्ट, लैन्डमार्क माउस प्रोयसर चर्च मुम्बई 400103 भारत लिखा हुआ है. बिल में दिए ईमेल एड्रेस सहित इसके नियम और शर्ते इसे संदेहास्पद बनाते हैं जिसमें कंपनी के नाम पर चेक बनाए जाने की जगह चेक अथवा ड्राफ्ट प्रतिनिधि या ब्यूरो चीफ के नाम से ही बनाए जाने की बातें लिखी है वहीं संवाददाता के नाम के स्थान पर आशीष तिवारी लिखा गया है. थाना प्रभारी जांजगीर बी.एस. खूंटिया ने बताया कि सरपंचों द्वारा ठगी का शिकार होने की लिखित शिकायत की गई है. मामले की जांच के बाद उचित कार्यवाही की जावेगी.

नीचे दी गई तस्वीर में थाने में शिकायत करने पहुंचे ठगी के शिकार सरंपच और सचिव दिख रहे हैं.

छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के संपादक राजेश सिंह क्षत्री की रिपोर्ट.

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क्या ‘प्याज’ घोटाला छिपाने के लिए दिया गया फुल पेज का विज्ञापन?

नई दिल्ली: प्याज को लेकर घोटाले के आरोपों से घिरी दिल्ली सरकार ने घोटाले के आरोपों को नकार दिया है. लेकिन आज केजरीवाल सरकार ने अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन छापकर आजतक चैनल पर निशाना साधते हुए बदनाम करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है. बीजेपी ने कहा है कि करोड़ों का विज्ञापन देकर सरकार ने प्याज घोटाला छुपाने की कोशिश की है. केजरीवाल सरकार पर सस्ते में प्याज खरीदकर जनता को महंगा बेचने का आरोप लगा है. बड़ा सवाल ये है कि प्याज में घोटाला हुआ या नहीं.

प्याज की बिक्री पर कथित घोटाले के आरोपों के बीच केजरीवाल सरकार ने हर बड़े अखबारों में पूरे पेज का विज्ञापन छापकर न्यूज चैनल आज तक पर बदनाम करने के लिए झूठी खबरें चलाने का आरोप लगाया. विज्ञापन में लिखा है कि केंद्र सरकार ने नासिक से प्याज 18 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी. केंद्र सरकार ने ही दिल्ली सरकार को प्याज 33 रुपये किलो की दर से बेची. दिल्ली सरकार ने 33 रुपये प्रति कोल के ऊपर ट्रांसपोर्टेशन, लोडिंग-अन लोडिंग और दुकनदारों के मार्जन मनी पर 7 रुपये अतिरिक्त खर्च करके भी जनता को तीस रूपये किलो की दर से प्याज उपलब्ध कराई. केंद्र सरकार ने अपनी दो एजेंसियों डीएमएस और सफल के माध्यम से प्याज 35 से 40 रुपये किलो तक बेची.

संजय सिंह ने बताया कि कोई घोटाला नहीं हुआ. घोटाले की फर्जी खबर दिखाई जा रही है. अगर ऐसी खबरें दिखाई जाएंगी तो जवाब देना होगा.. चाहे विज्ञापन देना पड़े. विज्ञापन में आंकडों के हवाले से वही दावा किया गया है जो घोटाले के आरोप में सफाई में दिल्ली सरकार कह चुकी है. अब बीजेपी कह रही है कि प्याज घोटाला छिपाने के लिए अखबारों में करोड़ों का विज्ञापन छपवाया गया. एबीपी न्यूज ने दिल्ली सरकार का विज्ञापन देने वाली संस्था डीएवीपी के रेट के आधार पर जब विज्ञापनों के खर्च का हिसाब लगाया तो ये 23 लाख 65 हजार रुपये तक पहुंचा. अगर ये अनुमान सही है कि विज्ञापन के खर्च के पैसे से 72 हजार 2 किलो प्याज आ जाता जो केजरीवाल सरकार एक दिन में 72 हजार लोगों को एक-एक किलो फ्री में बांट सकती थी. एबीपी न्यूज ने ईमेल भेजकर आप सरकार से विज्ञापन पर खर्च का हिसाब मांगा है जिसका जवाब अभी तक नहीं मिला है. दिल्ली सरकार के सूत्रों के मुताबिक प्रत्येक सरकारी काम नियमों के तहत होता है. तय DAVP रेट पर पारदर्शी तरीके से विज्ञापन जारी किया जाता है. विधिवत तरीके से सारी जानकारी सरकार से ली जा सकती है. इधर आरटीआई के जरिये खुलासा करके घोटाले का दावा करने वाले विवेक गर्ग ने एंटी करप्शन ब्रांच और उपराज्यपाल के पास घोटाले की शिकायत दर्ज कराई है. केजरीवाल सरकार पर 24.45 रुपये की दर से प्याज खरीदकर तीस रुपये किलो बेचने का आरोप लगा था जिसके बाद दिल्ली सरकार ने दस्तावेज जारी करके दावा किया था कि केंद्र सरकार से खरीदकर प्याज बाजार में चालीस रुपये के भाव का पड़ा था जिसे तीस रुपये किलो बेचा गया. बड़ा सवाल ये है क्या विज्ञापन देकर जनता के पैसे की बर्बाद की? (साभार- एबीपी न्यूज)

मूल खबर…

प्‍याज घोटाले का आरोप लगने पर केजरीवाल सरकार ने आजतक न्‍यूज चैनल पर निशाना साधते हुए अखबारों में निकाला पूरे पेज का विज्ञापन

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प्‍याज घोटाले का आरोप लगने पर केजरीवाल सरकार ने आजतक न्‍यूज चैनल पर निशाना साधते हुए अखबारों में निकाला पूरे पेज का विज्ञापन

नई दिल्‍ली। दिल्‍ली में केजरीवाल सरकार पर कम दामों में प्‍याज खरीदकर ज्‍यादा दामों में बेचने के आरोप लगने के बाद आप की सफाई आई है। उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया ने रविवार को एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस करते हुए कहा कि हमने प्‍याज 32.86 रुपए में खरीदे और बाजार में अपनी जेब से पैसे भरते हुए कम कीमत पर बेचे। जबकि केंद्र सरकार 33 रुपए में खरीदा प्‍याज ज्‍यादा दामों में बेच रही थी। उन्‍होंने आरोप लगाया कि यह सब लोगों का ध्‍यान हटाने के लिए किया जा रहा है। मीडिया को कागज दिखाते हुए उन्‍होंने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि हमने केंद्र की एजेंसी एसफएसी से प्‍याज खरीदे थे।

उन्‍होंने केंद्र पर आरोप लगाते हुए कहा कि, ‘यह पूरी तरह गलत है कि हमने नासिक से प्‍याज खरीदे। इसकी बजाय नाफेड और एसएफएसी ने केंद्र की तरफ से महाराष्‍ट्र से 18 रुपए प्रति किलो की दर से प्‍याज खरीदे और हमें यही प्‍याज 32.86 रुपए प्रति किलो की दर से बेचे। इसमें जो 14 रुपए अतिरिक्‍त हैं वो एडमिनिस्‍ट्रेटिव एक्‍सपेंस के रूप में बीजेपी सरकार ने चार्ज किए हैं। अगर कोई गड़बड़ है तो वो नफेड और एसएफएसी की तरफ से है।’

सि‍सोदिया ने आजतक न्यूज चैनल पर भी निशाना साधा और कहा कि वो लगातार झूठी खबर दिखा रहा है। सिसोदिया ने कहा कि भाजपा विपक्ष में है और उसका हक है सवाल करना जिसका हम जवाब देंगे लेकिन एक न्‍यूज चैनल इस तरह की झूठी खबरें कैसे दिखा सकता है। नफेड के दावे को लेकर उन्‍होंने कहा कि नफेड ने 19 रुपए किलो की कीमत पर प्‍याज देने के लिए कहा था तो हमने पत्र लिखा की आप दिल्‍ली में हमें यह उपलब्‍ध करा सकते हो जिसका अब तक कोई जवाब नहीं आया। सिसोदिया ने कहा कि ये जानबूझकर उस वक्‍त किया जा रहा है जब दिल्‍ली सरकार लगातार मेहनत करते हुए डेंगू पर नियंत्रण पाने लगी है।

इस मामले को लेकर फेसबुक पर आईं कुछ टिप्पणियां इस प्रकार है…

Sandeep Verma : कजरी सरकार तो विज्ञापन देने में माहिर सरकार है. मुझे लगता है यह इस मद में भाजपा को बखूबी पछाड़ सकते हैं. मोदी सरकार की बनियों के साथ मिलकर की जा रही मुनाफाखोरी का पर्दाफ़ाश जिस मीडिया को करना था, उसने उलटे कजरी को फंसाया.. डबल फायदा… मोदी सरकार की चमचागिरी और कजरी से विज्ञापन…

Sanjay Kumar Singh : ‘जंग लगी’ सरकार के राज में जनता का पैसा ऐसे ही बर्बाद होता है। मीडिया को टीआरपी की मलाई के साथ-साथ विज्ञापन की सौगात भी।

Mohammad Anas : आज पूरे देश के अख़बारों में अरविंद केजरीवाल ने प्याज़ मुद्दे पर फुल पेज विज्ञापन दिया है। केजरीवाल सरकार ने आजतक न्यूज़ चैनल पर झूठ बोलने का आरोप लगाया और केंद्र सरकार द्वारा प्याज़ की खरीद बिक्री पर विस्तार से बात की है। अरविंद केजरीवाल जब से दिल्ली पर काबिज़ हैं तब से वे कुछ न कुछ प्रपंच कर रहे हैं। जनता का पैसा बेहिसाब विज्ञापनों पर खर्च कर रहे हैं। राज्यपाल से दिखावे की लड़ाई और मोदी से मिलाई। आज निकाले गए विज्ञापनों का हिसाब लगाया जाए तो करोड़ों रूपए बनते हैं। यदि इन पैसों से प्याज़ खरीद कर दिल्ली वालों को दिया जाता तो कम से कम जनता को फायदा होता लेकिन मीडिया में झूठमूठ के मुद्दों पर बने रहने के लिए केजरीवाल ने जन हित को किनारे रख दिया। केंद्र कैसा है वह पता है, केजरीवाल कैसे हैं वह भी मालूम है। जिस लोकपाल के मुद्दे पर वे जंतर मंतर पर बैठे थे, उसे भूल चुके हैं। केजरीवाल की लड़ाईयों से केंद्र की निरंकुशता पर रत्ती भर फर्क़ नहीं पड़ा। अब धरने प्रदर्शन सिर्फ अपने आप को सही सिद्ध करने के लिए होते हैं। इन सबके बीच किसान/गरीब/आम जनता के मुद्दे पोस्टर बैनर तक सिमट जा रहे हैं। केजरीवाल- मोदी- मीडिया के चकल्लस से किसे फायदा हो रहा? सरकार को। सरकार में शामिल लोगों को। करोड़ों का विज्ञापन निकाल कर आरोप प्रत्यारोप करने से फुर्सत मिल जाए तो प्याज़ सस्ता करवा दीजिएगा।


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शिक्षा विभाग में करोड़ों का घोटाला : रिपोर्टर को जान से मारने की धमकी

लखीमपुर खीरी (उ.प्र.) : जनपद के शिक्षा विभाग में वर्षों से हो रहे करोड़ों रूपये के घोटले का पर्दाफाश करने वाले खोजी पत्रकार को विभागीय अधिकारियों सहित उसके पालतू गुण्डों ने जाने से मारने या मरवाने की धमकी दी है, साथ ही यह चेतावनी दी है कि अखबारबाजी करना छोड़ दो वरना कहाँ, कब मसल दिए जाओगे, पता भी नहीं चलेगा।

उल्लेखनीय है कि सूर्यप्रसाद ने शैक्षिक सत्र 2014-15 में स्कूली छात्रों को सरकार द्वारा निशुल्क वितरित की जाने वाली यूनीफार्म के संबंध में छानबीन की। पता चला कि वित्तपोषित इण्टर कालेज में अध्ययनरत कक्षा 1 से कक्षा 8 तक छात्र-छात्रों को निःशुल्क यूनीफार्म सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जाती है। जनपद के 4-5 हजार सरकारी विद्यालयों में लगभग सात लाख छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया था। इन सभी को प्रति छात्र-छात्रा यूनीफार्म दो सेट देने का दावा किया गया था। इसकी कीमत सरकार ने चार सौ रूपये प्रति छात्र अदा की थी। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने छात्र-छात्राओं को उक्त यूनीफार्म अधिकतम 120 रुपए में तैयार करवाकर वितरित किए थे। इस प्रकार प्रति यूनीफार्म 160 रुपए का घपला किया गया। इस तरह जनपद के सभी छात्रों को वितरित की गई यूनीफार्म में लगभग 10 करोड़ रूपए का घोटाला हुआ था। 

इस खबर पर जब जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी से सम्पर्क साधा गया तो उन्होंने स्वयं बात न कर मामले को सुलटाने के लिए जिले के बहुचर्चित सहायक बेसिक शिक्षा अधिकारी संजय शुक्ला को कहा। प्रारम्भ में तो संजय शुक्ला ने रिपोर्टर से फोन पर प्रस्ताव रखा कि आप मुझसे मिल लें, सारी समस्याएँ दूर हो जाएंगी। झाँसे में न आने पर क्षुब्ध एबीएसए रिपोर्टर के घर पहुंच गया। घर पर उसके न मिलन पर उसने पत्रकार के परिजनों के साथ अभद्र हरकतें कीं। गाली-गलौज कर लौट गया। उसी दिन रात के गभग 9.00 बजे उक्त पत्रकार के घर पर दो बाइकों से छह लोग आ धमके। उनमें से चार गेट पर खड़े रहे तथा दो मकान के अन्दर घुस गए। उन्होंने पत्रकार को धमकी दी कि घोटाला भूल जाओ और कुछ लिखो-पढ़ो नहीं वरना तुम्हें या तो जान से मार दिया जायेगा या मरवा दिया जायेगा। उन्होंने मृत पत्रकारों बब्लू पाण्डेय, अमित चैरसिया, जेपी तिवारी, सीबी सिंह के नामों का उल्लेख करते हुए धमकाया कि वरिष्ठ पत्रकार हो तो उनके बारे में जानते होगे। आज उनके परिजन भूखमरी की कगार पर हैं। 

इस घटना के बाद रिपोर्टर ने पुलिस अधीक्षक, डीआईजी, आईजी लखनऊ जोन, पुलिस महानिदेशक उत्तर-प्रदेश, आयुक्त लखनऊ मण्डल, नोडल अधिकारी/प्रमुख सचिव, लघु सिंचाई, मुख्य सचिव उत्तर-प्रदेश शासन को भी एसएमएस भेज कर घटना की जानकारी देने के साथ-साथ सदर कोतवाली में घटना की प्राथमिकी दर्ज करने के लिए तहरीर भी दी परन्तु अभी तक उक्त प्रकरण पर कोई भी कार्यवाही किसी भी स्तर से नहीं किये जाने से रिपोर्टर दहशत में है।

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डीएवीपी में विज्ञापन का महाघोटाला : हर साल बाबू-अफसर खा रहे करोड़ो का कमीशन

देश में आज तक जितने भी घोटाले हुये हैं उनमें ज्यादातर को उजागर करने का श्रेय मीडिया को जाता है, लेकिन इस देश में एक महाघोटाला ऐसा भी है, जो आज तक उजागर नहीं हुआ, जिसे मीडिया ना सिर्फ सह रहा है बल्कि उसका हिस्सा बनने के लिये मजबूर है। ये घोटाला इतना सुनियोजित है कि इसे सिद्ध करना बहुत टेढ़ी खीर है। करोड़ो का ये घपला सरकारी विज्ञापन जारी करने वाली सरकारी एजेंसी “दृश्य एवं विज्ञापन प्रचार निदेशालय” यानी डीएवीपी में हो रहा है। हर साल डीएवीपी के बाबू और अफसर अखबारों को ब्लैकमेल कर करोड़ो का हेरफेर बड़ी सफाई से कर रहें है। अखबार इस तंत्र का हिस्सा बनने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें अपना अखबार चलाने के लिये हर हाल में धन की आवश्यकता होती है।

डीएवीपी विज्ञापन में घोटाले की शुरूआत ना जाने कब से चली आ रही है, लेकिन हमारे पास इस महाघोटाले के तकरीबन 5 वर्षो के आंकड़े मौजूद है। जो उपरी तौर से बड़े साफ सुथरे दिखते हैं। जितना बजट आया उतना विज्ञापन नीति के अनुसार वितरित होता दिखता है। लेकिन जरा बारीकी से देखते ही डीएवीपी के बाबुओं का धन्धा समझ में आ जाता है। आज की तारीख में डीएवीपी एक महाभ्रष्ट सरकारी एजेंसी बन चुकी है जो अखबार मालिकों को ब्लैकमेल कर रही है। 

कोई भी सवाल करेगा कि आखिर मीडिया अपने ही क्षेत्र में हो रहे घोटाले को उजाकर क्यों नहीं कर रहा है। कोई भी पहली नजर में भारतीय मीडिया की विश्वसनीयता पर सन्देह कर सकता है कि अखबार मालिक डीएवीपी के महाघोटाले का हिस्सा बनकर अपना लाभ कमा रहें हैं। लेकिन सच्चाई इसके एकदम विपरीत है। अखबारों को मिलने वाली एकमात्र सरकारी आर्थिक मदद यानि सरकारी विज्ञापन के माध्यम से जारी होने वाला पैसा डीएवीपी के कुछ भ्रष्ट बाबुओं और अफसरों की भेंट चढ़ रहा है।

सरकार प्रिंट मीडिया में प्रचार–प्रसार के लिए हर वर्ष डीएवीपी को तकरीबन अरबों रूपये का बजट सौंपती है। इसमें इलैक्ट्रॉनिक मीडिया, हॉर्डिंग, एड अजेंसी आदि नहीं हैं। विज्ञापन के माध्यम से अकेले प्रिंट मीडिया पर भारत सरकार 1 से 4 अरब प्रति वर्ष खर्च कर रही है। हमने 4 वर्षो के बजट का आनकलन किया है। इसमें वर्ष 2014-15 में अब तक 1,12,47,62,429 रूपये जारी किये जा चुके हैं इसी प्रकार वर्ष 2013-14 में 3,73,38,52,546 रू., वर्ष 2012-13 में 2,90,48,56,416 तथा वर्ष 2011-12 में 2,91,61,07,240 रूपये के विज्ञापन सरकार द्वारा जारी किये गये। पिछले साल 2013-14 में इस बजट का सबसे अधिक 3,73,38,52,546 रूपया विज्ञापन के माध्यम से अखबारों को दिया गया। इस बजट का 15 प्रतिशत हिस्सा डीएवीपी को चला गया जो नीति के अनुसार सही है, लेकिन इसके अलावा पूरे बजट का 30 से 35  प्रतिशत हिस्सा भ्रष्ट बाबू और अफसर खा गये।

कायदे से इस बजट को सरकारी विज्ञापन के रूप में डीएवीपी में सूचिबद्ध अखबारों को एड पॉलिसी 2007 के मुताबिक विज्ञापन दिया जाना होता है। जिसमें सर्कुलेशन एक पैरामीटर होता है, जिसके आधार पर अखबारों को विज्ञापन ज्यादा या कम दिया जाता है। इसके अंतर्गत 35 प्रतिशत विज्ञापन बड़े अर्थात अधिक सर्कुलेशन वाले अखबारों को 35% प्रतिशत लघु समाचारपत्रों को तथा बाकी 30% मझौले सर्कुलेशन वाले समाचारपत्रों में समान रूप से वितरित होना चाहिये। इसमें भाषाई समाचारपत्रों और दूरवर्ती राज्य को और अधिक प्रमुखता देने की सिफारिश है।

लेकिन डीवीपी में बैठे कुछ बाबू और अफसरों ने इसी नीति का लाभ उठाते हुए अपना धन्धा सैट कर लिया है। ये भ्रष्ट अफसर और बाबू अपनी ड्यूटी ठीक से निभाने के बजाये अखबारों के एजेंट के रूप में काम कर रहें हैं विज्ञापनों की बन्दरबांट कर अपनी जेब भर रहे हैं।

ये बाबू और अफसर कोशिश में रहते हैं कि अपने सरकारी वेतन के अलावा 4-5 अखबारों को फिक्स कर ले जिनसे वो सरकार द्वारा अखबार को जारी हुए विज्ञापन में से 30 से 35 प्रतिशत कमीशन खा सकें। डीएवीपी के कुछ अधिकारी इसी का फायदा उठाते हुए अपनी कमीशनखोरी की दुकान चला रहे हैं। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी, असम से लेकर गुजरात तक कोई ऐसा राज्य नहीं है जहां डीएवीपी के विज्ञापन वितरण में घोटाला ना हो रहा हो। सरकारी विज्ञापन घोटाले को समझने के लिये हमने देश के हर राज्यों से कुछ उदाहरण लिये हैं। आइये जानिये कैसे डीएवीपी में जारी है भ्रष्टाचार का खेल।

इसके लिये हमने एक सारणी तैयार की है। सारणी में हर स्टेट से 15/10/2013 मे इम्पैनल्ड समाचारपत्रों को तुलनात्मक अध्ययन के लिये लिया है जिसमें समाचारपत्रों को विज्ञापन जारी करने में हुई अनियमितता स्पष्ट प्रमाणित होती है। एक समान सर्कुलेशन के एक अखबार को जमकर विज्ञापन दिये गये हैं तो दूसरे अखबार को 8-10 या मात्र 2 ही विज्ञापन दे कर टरका दिया गया है। बड़े ही सुनियोजित तरीके से यहां विज्ञापन का घपला किया गया है।

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Dainik Hindustan 200 cr Government Advt Scam : SC to hear SLP of Shobhana Bharatia on 24 March

New Delhi : 200 crore Dainik Hindustan Government Advertisement scandal, the Supreme Court of India(New Delhi) has listed the Special Leave Petition (Criminal) No. 1603 / 2013 (Shobhana Bhartia Vs State of Bihar & another) for hearing on March, twenty four 2015 next. Meanwhile, the Superintendent of Police, Munger (Bihar), Mr. Varun Kumar Sinha has submitted the Counter-Affidavit on behalf of the Bihar Government to Mr.Rudreshwar Singh, the counsel for the Bihar Government in the Supreme Court in the Special Leave Petition (Criminal) No. 1603 of 2013. Now, the Counsel for the Bihar Government, Mr. Rudreshwar Singh has to file the Counter-Affidavit in the Supreme Court and has to argue on behalf of the Bihar Government in this case.

Reliable sources in New Delhi said that the Police Superintendent, Munger (Bihar), Mr.Varun Kumar Sinha, in the Counter-Affidavit to the Supreme Court, had clearly exposed the financial scandal of M/S. H.T.Media Ventures Limited (New Delhi). The Police Superintendent,Munger (Bihar) in his Counter-Affidavit said,” During police investigation and supervision, the Munger(Bihar) police have found ”facts” crystal -clear that theMunger edition of Dainik Hindustan is being printed and published, violating the rules and provisions of the Press & Registration of Books Act, 1867 and getting the government advertisements illegally. On the basis of facts ,coming in course of investigations,supervisions and available documents, the police find sufficient evidences against all the named accused persons in the Munger Kotwali Police Case No.445/2011 including the Chairperson of M/S. H.T.Media Ventures Limited (New Delhi) Shobhana Bhartia. I pray to the Hon’ble Supreme Court to reject the petition of the petitioner,Shobhana Bhartia in this instant case.”

It is worth mentioning that the senior lawyer of Bihar,ShriKrishna Prasad on January 13,2014 last, appearing on behalf of the O.P No.02, Mantoo Sharma (Munger, Bihar), had completed his argument in the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A.Bobde. The lawyer, ShriKrishna Prasad told the court of Hon’ble Mr.Justice H.L.Dattu and Hon’ble Mr.Justice S.A Bobde,” My Lord, this is one of the rarest cases of forgery,cheating and loot of the government revenue on behalf of the powerful media house of India,M/S H.T.Media Ventures Limited (New Delhi).On the order of the Munger Chief Judicial Magistrate, an F.I.R has been lodged with the Munger Kotwali P.S.,bearing case No.445/2011.After investigations and supervisions, the Dy.S.P and the S.P,Munger(Bihar) have submitted their ”Supervision- Reports No.01 & 02 in which they have found all charges against the named accused persons ‘prima-facie true’ And the investigations in this instant case is in full progress.The Hon’ble High Court of Patna has also rejected the prayer of the Chairperson of M/S H.T.Media Ventures Limited,Shobhana Bhartia in the Criminal Miscellaneous Case No.2951 and 16763 of 2012.So, I pray to the Hon’ble Court to reject the prayer of the petitioner,Shobhana Bhartia, and direct the Munger police to expedite the police investigations in this instant case.”

What is the F.I.R ?- On the basis of a Munger court complainant No.993(C)/2011 of the complainant,Mantoo Sharma,s/o Late Ganesh Sharma, resident -Puraniganj,P.S.- Kasim Bazar,District-Munger, an F.I.R has been lodged against (1) the Principal accused Shobhana Bhartia(Chairperson ,Hindustan Publication Group,Hindustan Media Ventures Limited,Head Office,18-20,Kasturba Gandhi Marg, New Delhi,(2) Shashi Shekhar,the Chief Editor, Dainik Hindustan(New Delhi), (3) Aakku Srivastawa,Acting Editor, Patna edition of Dainik Hindustan, (4) Binod Bandhu, Regional Editor, Bhagalpur edition of Dainik Hindustan and (5) Amit Chopra,Printer & Publisher of M/S Hindustan Media Ventures Limited,New Delhi.All of them have been accused of violating sections 8(B),14 & 15 of the Press & Registration of Books Act, 1867, and Sections 420/471 & 476 of Indian Penal Code, printing and publishing Bhagalpur and Munger editions of Dainik Hindustan ,using wrong Registration No. and obtaining the government advertisements of the Union and the State governments in crores in the Advertisement Head by presenting the forged documents of registration.

Statements under section 164 of Cr.P.C in the Munger Judicial Court: In the process of investigation, the Investigating Police Officer,Munger Kotwali,Bihar, has got the statements of the complainant,Mantoo Sharma, and other witnesses,(1) ShriKrishna Prasad,(2) Kashi Prasad,(3) Bipin Kumar Mandal under section 164 of Cr.P.C in the Munger judicial court on April, 14,1012.All the witnesses in their statements before the court have fully supported the allegations against the accused persons in the F.I.R ,bearing No. Munger Kotwali P.S Case No.445/2011.

I, here, annex  the court documents that   have been submitted to the Hon’ble Supreme Court by the Respondent No.02 of the S.L.P(Criminal) No.1603/2013,Mantoo Sharma of Munger(Bihar)

Here, I have annexed the (1)the Synopsis,(2) The List of Important Dates and(3)  the Counter-Affidavit of the Respondent No.02,Mantoo Sharma,Munger,Bihar in PDF files. 

By ShriKrishna Prasad
a senior advocate
Munger
Bihar
M-09470400813                                     

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यह ठगी है तो इस देश में कोई है जो इसे रोक सके!

Vishnu Rajgadia : यह ठगी है तो इस देश में कोई है जो इसे रोके? भारत सरकार द्वारा निर्मल भारत अभियान और स्वास्थ्य अभियान चलाये जाते हैं। अमर उजाला में चार जनवरी को एक विज्ञापन आया है। कोई ”अभियान फाउंडेशन” है जो यूपी में इन योजनाओं के लिए दसवीं बारहवीं पास बेरोजगारों को 11000 तक की नौकरी देगा। कुल 33072 पद हैं। अगर वाकई नियुक्ति हुई तो हर महीने सिर्फ वेतन में 30 करोड़ खर्च होगा। साल में लगभग 350 करोड़। केंद्र या राज्य सरकार के पास ऐसी कौन सी योजना है? या कि इस ”अभियान फाउंडेशन” को सीधे कुबेर का खजाना हाथ लग गया? मजे की बात यह है कि नौकरी लगेगी यूपी में, और आवेदन जमा होगा रांची जीपीओ के पोस्ट बाॅक्स नंबर 97 में।

एक और हिसाब देखिये। 33072 पद हैं। आवेदन के साथ 300 रुपये जमा करने हैं। एक पद के लिए औसत 25 आवेदन आये तो लगभग आठ लाख आवेदन आ सकते हैं। इससे 25 करोड़ से भी ज्यादा की रकम आ सकती है। पैरवी के नाम पर कुछ बेरोजगार अपनी जमीन या जेवर भी बेच डालेंगे। यह वास्तविक नियुक्ति है या ठगी? ऐसे विज्ञापन छापने वाले अखबार का कोई दायित्व है या नहीं?

जीपीओ के पोस्ट बाॅक्स क्या ठगी का माध्यम हैं? यूपी और झारखंड की सरकारें अगर ऐसी साफ दिखने वाली ठगी को रोकने लायक नहीं तो किसी आतंकी गिरोह का मुकाबला कैसे करेगी? क्या भारत सरकार के पास ऐसा कोई इंतजाम है जो केंद्र की योजनाओं के नाम पर होने वाली ठगी को रोके? उन दसवीं-बारहवीं पास बेरोजगारों की सोचिये, जो बरसों से नौकरी की आस लगाये बैठे हैं और इस विज्ञापन से फिर एक झूठी आस लगाकर चार-पांच सौ रुपये गंवायेंगे, और कई महीनों इंतजार करेंगे। जिस समाज में शिक्षित और अग्रणी लोग ऐसी ठगी का साथ देते हों, या उसे देखकर भी अंधे बने रहते हों, वैसे समाज को धिक्कार।

वरिष्ठ पत्रकार और सोशल एक्टिविस्ट विष्णु राजगढ़िया के फेसबुक वॉल से.

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घोटालेबाज प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी करने की तैयारी

ऐसी खबर है कि देश की प्रमुख समाचार एजेंसी यूएनआई के चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ सेबी की तरफ से गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर एनबी प्लांटेशन के नाम से करोड़ों की अवैध वसूली का आरोप है. चेयरमैन प्रफुल्ल माहेश्वरी एनबी प्लांटेशन के डायरेक्टर रह चुके हैं. सेबी वही सरकारी एजेंसी है जो सहारा और शारदा चिट फण्ड के खिलाफ कार्रवाई कर चुकी है.

चारों तरफ से घिर चुके प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ अब ह्यूमन राइट कमीशन, मायनॉरिटी कमीशन और नेशनल विमन कमीशन की कार्यवाही के अलावा अब दिल्ली विजिलेंस के लोग भी सक्रिय हो गये हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी पर यूएनआई के अध्यक्ष पर रहते हुए आर्थिक घपले-घोटोलों के तमाम आरोप हैं. उन पर ये सारे आरोप ”सेव यूएनआई मूवमेंट” ने लगाए हैं. कहा जाता है कि घपले-घोटाले करना प्रफुल्ल माहेश्वरी की फितरत में शामिल है. प्रफुल्ल माहेश्वरी मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र से प्रकाशित एक हिंदी अखबार को चलाने वाली कंपनी के प्रमुख निदेशक मालिक-संपादक भी हैं.

प्रफुल्ल माहेश्वरी की यह कंपनी बैंक ऑफ महाराष्ट्रा की ब्लैक लिस्ट ‘विल फुल डिफॉल्टर’ में दर्ज है. प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा से 1541 लाख रुपये का कर्जा लिया था. आदत से मजबूर प्रफुल्ल माहेश्वरी ने बैंक ऑफ महाराष्ट्रा का पैसा वापस नहीं किया. बैंक के अधिकारियों ने कर्जा वापसी की लाख कोशिशें की. हर बार नाकाम रहने के बाद बैंक ऑफ महाराष्ट्रा ने प्रफुल्ल माहेश्वरी की कंपनी को उन देनदारों की सूची में डाल दिया जो जानबूझ कर कर्ज वापस नहीं करना चाहते हैं.

बैंक ऑफ महाराष्ट्रा  के देनदारों की काली सूची में नाम दर्ज होने से भी कोई फर्क नहीं है. सेव यूएनआई के वर्कर्स का कहना है कि प्रफुल्ल माहेश्वरी यूएनआई को भी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की शक्ल में चालाना चाहते हैं. इसी हठधर्मिता की वजह से उन्होंने यूएनआई के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में एक गैर मीडिया पर्सन की एंट्री करवा दी है. आरोपों में कितनी सच्चाई है यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा लेकिन कहा जाता है  कि रिएल इस्टेट कंपनी चलाने वाले गैर मीडिया पर्सन को प्रफुल्ल माहेश्वरी ने यूएनआई की जमीन पर कब्जा दिलाने के सब्ज बाग दिखाए थे. सेव यूएनआई मूवमेंट ने भी प्रफुल्ल माहेश्वरी के कच्चे चिटठे खोले हैं. प्रफुल्ल माहेश्वरी की एक अन्य कंपनी एनबी प्लांटेशन भी आर्थिक अनियमितताओं के चलते सेबी के रडार पर काफी पहले से है. ऐसे भी कयास हैं कि एनबी प्लांटेशन के नाम पर अवैध वसूली के आरोप में सेबी प्रफुल्ल माहेश्वरी के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर सकती है.

उपरोक्त प्रकरण के बारे में जब प्रफुल्ल माहेश्वरी से संपर्क किया और आरोपों पर उनका पक्ष जानना चाहा तो उनका रिवर्ट मैसेज था, ‘Sorry to read all this junk. Pl get in touch with the person who has given this false information and verify yourself…’ ”….I am not the chairman of UNI and can only speak for myself.”

हालांकि, प्रफुल्ल माहेश्वरी को फिर से कुछ सवाल भेजे गये हैं. अगर वो अपना पक्ष रखते हैं तो अगली किश्त में उनको भी प्रकाशित किया जाएगा. इन सब के अतिरिक्त एमपीएसआईडीसी के जमीन घोटाले में भी प्रफुल्ल माहेश्वरी का नाम शामिल है. उसकी जानकारी भी अगली किश्त में विस्तार से दी जाएगी.

भड़ास के एडिटर (स्पेशल प्रोजेक्ट्स) राजीव शर्मा की रिपोर्ट. संपर्क: 09968329365

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प्रफुल्ल के खिलाफ विजिलेंस जांच, ब्लैकमनी को ह्वाइट करने में भी फंसे

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चिटफंड घोटाले में फंसे पत्रकार कुणाल घोष की फोटो लेते वक्त मीडिया कर्मियों पर लाठी चार्ज

शारदा चिटफंड घोटाले में फंसे सांसद कुणाल घोष की फोटो ले रहे मीडिया पर कोलकाता पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। पुलिस ने मीडिया कर्मियों पर उस समय पर लाठी चार्ज कर दिया जब वह कोलकाता के एसएसकेएम अस्पताल के बाहर मीडियाकर्मियों पर लाठी चार्ज किया। दरअसल, पुलिस की ओऱ से अस्पताल में भर्ती कुणाल घोष की फोटो लेने से मना कर रही थी। सांसद कुणाल घोष ने गुरुवार को जेल में आत्महत्या का प्रयास किया था। सांसद घोष सारधा चिटफंड घोटाले के आरोपी हैं और आत्महत्या के समय वह जेल में थे।

आईसीयू से दूसरे वार्ड में शिफ्ट करने के दौरान बीमार हालत में कुणाल घोष ने मीडिया से कहा कि कहा कि सारदा चिटफंड घोटाले के मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए। इस दौरान जैसे ही घोष के साथ सिपाहियों का दल आया। पुलिस ने चारों ओर से कुणाल घोष को घेर रखा था। इस दौरान मीडिया कर्मियों ने फोटो लेने और कुणाल घोष से बात करने की कोशिश की। तभी पुलिस के जवानों की ओर से मीडिया कर्मियों पर लाठी चार्ज हो गया। कोलकाता पुलिस पहले से ही दबाव की स्थति में थी और वो नहीं चाहती थी कि घोष घोटाले के बारे में मीडिया के किसी भी सवालों का जवाब दें। इसी के चलते पुलिस ने मीडिया कर्मियों को धक्का दिया, जिससे बात बिगड़ गई और धक्का मुक्की ने मारपीट का मोड़ ले लिया।

सारधा घोटाले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार टीएमसी से निलंबित सासंद कुणाल घोष ने कहा है किघोटाले के कर्ताधर्ता खुलेआम घूम रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि कुणाल घोष ने एक दिन पहले ही जेल में काफी मात्रा में नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी। सारधा घोटाले में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार टीएमसी से निलंबित सासंद कुणाल घोष ने कहा है कि घोटाले के कर्ताधर्ता खुलेआम घूम रहे हैं, उन्हें जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए। गौरतलब है कि कुणाल घोष ने एक दिन पहले ही जेल में काफी मात्रा में नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी।

कुणाल घोष ने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास करने के पूर्व लिखे सुसाइड नोट में घोटाले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मुकुल रॉय के शामिल होने का आरोप लगाया है। यह पत्र सीबीआई प्रमुख के नाम लिखा गया था। सरधा चिटफंड घोटाले के मुख्य अभियुक्त कुणाल घोष का उक्त पत्र जेल अधिकारियों के हाथ लगा है, जो उन्होंने अलीपुर स्थित प्रेसीडेंसी जेल में आत्महत्या की कोशिश से पहले लिखा था। जेल में मिले इस पत्र की जांच की जा रही है। घोष ने शुक्रवार को 50 से ज्यादा नींद की गोलियां खाकर जान देने की कोशिश की थी। घोष की हालत अब खतरे से बाहर है। इस घटना के बाद से पश्चिम बंगाल सरकार में हड़कंप मचा हुआ है।

मुख्यमंत्री ने ममता ने जेल अधीक्षक सहित 3 अफसरों को निलंबित करने के साथ ही जेल मंत्री हैदर अजीज सफवी को भी हटा दिया। ममता ने तीन अन्य मंत्रियों को भी किनारे लगाने का निर्णय किया है। इसमें खाद्य प्रसंस्करण मंत्री कृष्णेंदु नारायण चौधरी, अल्पसंख्यक राज्यमंत्री गयासुद्दीन मोल्ला व बिना विभाग की मंत्री सावित्री मित्रा शामिल हैं। जेल सूत्रों के अनुसार पत्र बंगाली में लिखा है। इसके पूर्व भी घोष ने राज्य के कुछ ताकतवर लोगों पर आरोप लगाए थे। घोष ने इस पत्र में भी वही सब बातें लिखी हैं, जो उन्होंने कुछ दिनों पहले सीबीआई को भेजे 91 पृष्ठ के पत्र में बताई थीं। हाल ही में घोष ने कोर्ट में कहा था कि घोटाले से जिन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा हुआ उनमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रमुख हैं। उन्होंने मांग की थी कि उन्हें और ममता को आमने-सामने बैठकर सवाल-जवाब किए जाएं।

घोष ने यह दावा भी किया था कि उनकी मौजूदगी में ममता और शारदा समूह के मालिक सुदीप्त सेन के बीच कलीमपोंग के डेलो हिल्स में मीटिंग हुई थी। इसके अलावा घोष ने ममता की उस पेंटिंग का भी जिक्र किया था, जो सेन और दूसरे उद्योगपतियों ने ऊंची कीमत पर खरीदा था। कई सुसाइड नोट मिलेघोष की बैरक से नींद की गोलियां और कई सुसाइड नोट मिले हैं। इसमें से एक सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश के नाम भी है। घोष की तबीयत कई दिनों से खराब थी और जेल के डॉक्टर ने ही उन्हें नर्व, ब्लड प्रेशर व नींद की गोली लेने की सलाह दी थी। पेशे से पत्रकार घोष शारदा ग्रुप की कंपनी बंगाल मीडिया लिमिटेड में मुख्य कार्यकारी रह चुके हैं। कुणाल के खिलाफ भादंवि की धारा 406 (विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत केस दर्ज किए गए थे । 2013 में 22 अप्रैल को एक निवेशक ने यह मामला दर्ज कराया था।

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चिदंबरम ने किया 2जी घोटाला : हंसराज भारद्वाज

लोकसभा चुनाव और हरियाणा व महाराष्ट्र में करारी हार के बाद कांग्रेस में असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। हार के बाद कई नेताओं ने पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की क्षमता पर सवाल खड़े किए थे। अब इस कड़ी में संप्रग शासन में केंद्रीय मंत्री और कर्नाटक के राज्यपाल रहे हंसराज भारद्वाज का भी नाम जुड़ गया है। उन्होंने कहा है कि पार्टी की डूबती नैया को प्रियंका गांधी वाड्रा ही किनारे लगा सकती है।

2जी घोटाला के लिए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को निर्दोष ठहराते हुए वरिष्ठ कांग्रेसी नेता भारद्वाज ने कहा कि 2जी स्पेक्ट्रम घोटालों के लिए पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम दोषी हैं। एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत में भारद्वाज ने चिंदबरम को सीधे तौर पर आरोपी ठहराते हुए कहा कि घोटाला चिदंबरम का किया है, जिसमें मनमोहन सिंह को कोई हाथ नहीं है। भारद्वाज ने बताया कि चूंकि चिदंबरम खुद पीएम बनना चाहते थे इसलिए जो भी चिदंबरम करते थे उसमें उनका साथ कपिल सिब्बल भी देते थे। यही नहीं, उन्होंने कहा कि चिदंबरम के इस खेल में यूपीए की सहयोगी पार्टी डीएमके भी शामिल थी।

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