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सुख-दुख

यशवंत का भड़ासी चिंतन : कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है…

Yashwant Singh

मुझे कभी कभी लगता है कि हम सब एक बेहतर सभ्यता लाए जाने से ठीक पहले के अराजक और असुंदर दौर के जीव-जंतु हैं जो जल्द खुद को अपनी करनी से विलुप्त कर लेंगे। उसके काफी समय बाद धरती पर फिर से जीवन प्रकट होगा और उस दौर के मनुष्य टाइप सबसे बुद्धिमान प्राणी के इवॉल्व होने की प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें हमारे अब के दौर की सभ्यता की हाहाकारी कहानियां मिलेंगी जिससे वो खुद के समय के ज्यादा वैज्ञानिक और संवेदनशील समाज संविधान कानून का निर्माण कर पाएंगे।

ये सब सोचकर मैं वर्तमान के संकटों का एक प्लेटोनिक / एस्केपिस्ट हल तलाश लेता हूँ। फिर संतुष्ट निश्चिन्त भाव से सो जाता हूँ। मुझे पता है, कुछ चीजें धरती के वर्तमान वाले वर्जन से जीवन लुप्त होने तक इंसान ठीक नहीं कर सकता क्योंकि अभी के समय का आदमी महाहरामी चाल चरित्र वाला चीज। लुटेरी कम्पनियां, पूंजीवादी व्यवस्था और आदमियों का बेशुमार फैलाव धरती पर जीवन के लिए सबसे बड़े संकट हैं!

शुभ रात्रि

भड़ास एडिटर यशवंत की एफबी वॉल से.

इस पर कुछ टिप्पणियां…

Manoj Malayanil : क्या इंसान बदला है? क्या इंसान बदलता है? हज़ारों साल का इतिहास हमारे सामने है। उसे पढ़ने जानने के बाद क्या लगता है कि इंसान बदल गया? पीर पैग़म्बर, ईसा, बुद्ध, महावीर, गांधी क्या बदल पाये इंसान को? यशवंत बाबू इंसान कभी नहीं बदला क्योंकि इंसान ऐसा ही होता है। हाँ दिलचस्प बात यह है कि यह पता है कि इंसान कभी बदला नहीं , कभी बदल भी नहीं सकता क्योंकि इंसान होता ही ऐसा है- फिर भी एक डीएनए है कुछ ऐसे इंसानों में इंसान को बदलने की चाहत रखता है!

विजय सिंह ठकुराय : हो सकता है कि यही कारण हो जिसकी वजह से ब्रह्मांड में अब तक हमनें एलियंस सभ्यताओं का दीदार नही किया है। शायद ब्रह्मांड में विकास की मापदंड पर प्रारंभिक स्तर की सभ्यताएं ही अधिक व्यापक हैं क्योंकि जैसे-जैसे एक सभ्यता तकनीकी विकास के पायदानों पर कदम बढ़ाती है, वैसे-वैसे ही वो अपनी आत्महत्या का सामान भी तैयार करती है।

Yashwant Singh : हमारे इस वाले दौर से पहले भी धरती से काफी कुछ लुप्त हुआ। डायनासोर सबसे ताकतवर जीव थे। खत्म हो गए। सिंधु घाटी जैसी सभ्यताओं का खात्मा बहुत कुछ सिखाता बताता है। हम वर्तमान के मनुष्य अपने दिमागी स्तर से बिल्कुल किसी उन्नत सभ्यता के हिस्से नहीं लगते। हम शायद धरती पर जीवन के नए वर्जन के क्रिएट होने से ठीक पहले वाले नींव नुमा इनिशियल फैक्ट्री वर्जन है जिसे अपग्रेड होना बाकी है और ये अपग्रेडेशन फैक्ट्री वर्जन वाले प्रोडक्ट के पूरी तरह किल होने के बाद ही संभव है। इसलिए आइये, हम महामारी की तरह फैल चुके मनुष्य विनाशकारी धतकरम और तेजी से करें ताकि हम खुद का खात्मा कर नए के पनपने का राह प्रशस्त कर सकें!

Umesh Srivastava Socialist : आपकी दूरगामी सोच के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद आपकी इसी सोच के कारण मैं आपका कायल हूं..

Rajiv Tiwari Baba : अब लगता है ज्ञान प्राप्त हो गया आपको…

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