यशवंत का भड़ासी चिंतन : कभी कभी मेरे दिल में खयाल आता है…

Yashwant Singh

मुझे कभी कभी लगता है कि हम सब एक बेहतर सभ्यता लाए जाने से ठीक पहले के अराजक और असुंदर दौर के जीव-जंतु हैं जो जल्द खुद को अपनी करनी से विलुप्त कर लेंगे। उसके काफी समय बाद धरती पर फिर से जीवन प्रकट होगा और उस दौर के मनुष्य टाइप सबसे बुद्धिमान प्राणी के इवॉल्व होने की प्रक्रिया पूरी होने पर उन्हें हमारे अब के दौर की सभ्यता की हाहाकारी कहानियां मिलेंगी जिससे वो खुद के समय के ज्यादा वैज्ञानिक और संवेदनशील समाज संविधान कानून का निर्माण कर पाएंगे। Continue reading

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IPS Ajay Pal Sharma का ये वीडियो भड़ास के यूट्यूब चैनल पर बना नंबर वन, 32 लाख बार देखा गया

Yashwant Singh : जैसे आदमी को कुछ पता नहीं होता कि उसकी तकदीर, भाग्य, नियति में क्या लिखा-छिपा है… वैसे ही यूट्यूब पर चैनल चलाने वालों को पता नहीं होता कि व्यूवर किस वीडियो को सिर माथे पर लेकर उसे सरताज बना देगा और किन अच्छे खासे वीडियोज को ठुकरा कर किनारे लगा देगा…भड़ास के यूट्यूब चैनल पर एक बड़ा उलटफेर हुआ है. Continue reading

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यशवंत ने एक अंग्रेज कैप्टन और उनके घोड़े की कब्र पर जाकर बना दी ये फिल्म, आप भी देखें

Yashwant Singh :  अंग्रेज कैप्टन गिब्बफोर्ड और उनके घोड़े को भारत में क्यों दफनाना पड़ा… यूपी के सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज कस्बे में मालीमैनहा नामक एक गांव अंग्रेज कैप्टन और इनके घोड़े की कब्र है…  कब्र की आज क्या है हालत… क्या हुआ था जो अंग्रेज कैप्टन और उनका घोड़ा यहां मारे गए थे… इस सबको लेकर एक फिलिम का निर्माण किया हूं… डाक्यूमेंट्री भी कह सकते हैं इसे…

इस फिलिम को यूट्यूब पर रिलीज कर दिया हूं… शीर्षक है- ”भारत में दफन अंग्रेज कैप्टन गिब्बफोर्ड और उनके घोड़े की कहानी…”

वीडियो एडिटिंग सीखने का सुख ये है कि फटाफट फिलिम बनाओ और रिलीज कर दो…. माने, मान सकते हैं, अपन भी फिल्म निर्माता हो गए हैं, ‘मोफी’ टाइप… मोफी बोले तो ‘मोबाइल फिल्मकार’… ha ha ha…

फिलिम देखने के लिए नीचे क्लिक करें :

https://www.youtube.com/watch?v=49TZWB_MGEw

भड़ास एडिटर यशवंत सिंह की एफबी वॉल से.

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अगले जनम मोहे बिटिया न कीजौ, न दीजौ… देखें वीडियो

मोनिका की शादी हापुड़ के थाना देहात क्षेत्र के सोटावाली गांव में अपील नामक शख्स से करीब एक साल पहले हुई. ससुराल वाले दहेज़ की मांग करते थे. दहेज के ताने और इसके लिए किए जाने वाले अत्याचारों को मोनिका चुपचाप सहती रही.

3 जनवरी 2018 को मोनिका ने एक बेटी को जन्म दिया. फिर क्या था, दहेज के भूखे भेड़ियों ने बेटे की चाहत के चलते मोनिका पर अत्याचार बढ़ा दिया. हर रोज मोनिका के साथ मारपीट करने लगे. एक दिन ससुराल वालों ने बहुत मारा पीटा. बहू व उसकी एक माह की बेटी को घर से भगा दिया.

मोनिका अपने मायके मुरादपुर गांव आकर परिजनों को आपबीती सुनाती है. परिजन न्याय के लिए एसपी के पास पहुंचे. एसपी हापुड़ हेमंत कुटियाल ने तुरंत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

देखें संबंधित वीडियो :

-हापुड़ से राहुल गौतम की रिपोर्ट.

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”दादी अम्मा जिंदा हैं!” ..देखें भड़ास निर्मित एक Documentary Film

ये सड़ा गला भ्रष्ट सिस्टम एक बुजुर्ग महिला को जीते जी कागजों में मार चुका है लेकिन सच यह है कि ”…दादी अम्मा जिंदा हैं…”.  आगरा के वीडियो जर्नलिस्ट फरहान खान की मदद से तैयार और भड़ास के यशवंत द्वारा संयोजित-संपादित इस डाक्यूमेंट्री से पता चलता है कि यह तंत्र अपने बुजुर्गों के प्रति भी कितना असंवेदनशील और अमानवीय हो चुका है. सत्तर साल की एक बुजुर्ग महिला खुद को जिंदा साबित करने के लिए साल भर से संघर्ष कर रही है. जब हर दफ्तर और हर अफसर से निराश हुई तो अब सीएम योगी से गुहार करने के वास्ते जिला मुख्यालय पहुंची. पूरी डाक्यूमेंट्री एक मैसेज देती है…. प्लीज, अपने सीनियर सिटीजन्स के साथ संवेदनशील रहें… उनके साथ हो रहे अन्याय को फौरन दूर करें….

इस डाक्यूमेंट्री को फेसबुक पर साझा करते हुए भड़ास के एडिटर यशवंत सिंह लिखते हैं :  इसे आप भड़ासी डाक्यूमेंट्री कह लीजिए या एक सत्तर साल की बुजुर्ग महिला की पीड़ा देखकर तैयार की गई वीडियो रिपोर्ट… पर असल बात ये है कि इसे बनाने में मैं तीन दिन से कई कई घंटे खर्च कर रहा था.. अब जाकर तैयार कर पाया हूं… डाक्यूमेंट्री का नाम है- ”दादी अम्मा जिंदा हैं”.

प्रिंट मीडिया का आदमी रहा हूं, सो वीडियो एडिटिंग में पारंगत नहीं हो पाया हूं. लेकिन सीख रहा हूं. एक गुरु मिले हैं, जो मूड में होते हैं तो कभी कभार ज्ञान दे देते हैं. अब तक दिए गए उनके शुरुआती तकनीकी ज्ञान के आधार पर ही काम चला रहा हूं. लेकिन असल चीज कंटेंट है. सिर्फ तकनीकी ज्ञान तब तक काफी नहीं होता जब तक उसके लिए ठीकठाक कंटेंट न उपलब्ध हो.

जब इस स्टोरी के रॉ फुटेज देख रहा था तो हृदय द्रवित हो गया. दादी अम्मा के समर्थन में थोड़ा-सा कुछ करने का मन हो गया. आज के दौर में जब बिकाऊ मीडिया को हिंदू-मुस्लिम और इन-उन नेताओं की तूतू-मैंमैं ही दिखाने से फुर्सत नहीं तो ऐसे सोशल इशूज को भला कौन उठाएगा. सोशल मीडिया के लोगों के कंधों पर दायित्व ज्यादा आ चुका है, इसे समझने की जरूरत है.

इस दादी अम्मा की कहानी इकलौती नहीं है. अंधे सिस्टम और इसके करप्ट कारिदों के चलते जो लूटतंत्र चहुंओर जमाने से चल रहा है, उसकी मार ऐसी लाखों-करोड़ों दादी अम्माओं पर पड़ती रही है. हमें इन सीनियर सिटीजन्स के प्रति संवेदनशील और जिम्मेदार होना चाहिए… बुढ़ापा एक रोज सबको घेरेगा दोस्तों. सो, अपने बुजुर्गों के वास्ते आंखों में थोड़ा सम्मान और थोड़ा पानी बचा कर रखना चाहिए.

वक्त हो तो नीचे दिए ”दादी अम्मा जिंदा हैं” डाक्यूमेंट्री को देखिए और  इस बुजुर्ग महिला की न्याय की लड़ाई को आगे बढ़ाइए… इसके लिंक को ह्वाट्सअप, फेसबुक, ट्विटर आदि पर शेयर कर हर ओर फैलाइए…  देखें ये डाक्यूमेंट्री….

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क्या ‘भड़ास टास्क फोर्स’ बनाने का वक्त आ गया है?

भड़ास संपादक यशवंत पर पत्रकार कहे जाने वाले दो हमलावरों भूपेंद्र नारायण भुप्पी और अनुराग त्रिपाठी ने प्रेस क्लब आफ इंडिया के गेट पर हमला किया था. उस हमले से उबरने के बाद यशवंत ने अपने भविष्य की योजनाओं को लेकर काफी कुछ खुलासा किया है. इसमें एक भड़ास टास्क फोर्स बनाने का प्रस्ताव भी शामिल है.

इस बाबत यशवंत ने फेसबुक पर जो लिखा है, वो इस प्रकार है…

यशवंत ने अपनी पूरी बात इस वीडियो में कही है…

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