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आपने “ … पुडुचेरी को वणक्कम” सुना क्या?

आपने नमो ऐप के बारे में खूब पढ़ा है। आप यह भी जानते हैं कि भाजपा और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ का प्रबंध बूथ स्तर तक है। प्रधानमंत्री सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं। उनके लाखो फॉलोअर हैं आदि आदि। पर क्या आपने “पुडुचेरी को वणक्कम” सुना है? यह एक हफ्ते पुराना मामला है जिस दिन हुआ था उस दिन आपको नहीं बताया गया। कल राहुल गांधी ने इसपर चुटकी ली तब भी नहीं बताया गया। आइए, मैं आपको बताता हूं कि यह मामला है क्या? वैसे अंग्रेजी अखबारों में आज भी यह खबर है। देखिए, आपके अखबार में मिले तो मुझे बताइएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वीडियो चैट के जरिए तमिलनाडु के भाजपा कार्यकर्ताओं से रूबरू थे। बातचीत के दौरान एक कार्यकर्ता ने उनसे पूछा कि सरकार मिडिल क्लास से टैक्स तो खूब वसूल रही है लेकिन उनका ध्यान नहीं रख रही है। प्रधानमंत्री ऐसे सवालों के आदी नहीं हैं। उन्हें पसंद नहीं है कि उनसे ऐसे सवाल किए जाएं। इसीलिए वे प्रेस कांफ्रेंस नहीं करते। ऐसे में गुजरे बुधवार को निर्मल कुमार जैन ने जब यह सवाल पूछा तो प्रधानमंत्री असहज हो गए। थोड़ा संभले और फिर टरकाते हुए इतना ही कहा- “आप व्यापारी आदमी हैं तो स्वाभाविक है कि व्यापार की ही बात करेंगे। हम जनता के खयाल रखने के पक्ष के हैं और उनका खयाल रखेंगे आपको विश्वास दिलाते हैं …. चलिए पुंडुचेरी को वणक्कम! ”

यह कोई बहुत गंभीर मामला नहीं था। प्रधानमंत्री से संबंधित था, आम आदमी से जुड़ा था इसलिए खबर तो थी ही पर भाजपा और प्रधानमंत्री के खिलाफ खबर? अखबारों में नहीं चली। सोशल मीडिया पर भले चर्चित हुई। कोई एक हफ्ते बाद, कल क्विंट ने टाइम्स ऑफ इंडिया के हवाले से खबर दी कि प्रधानमंत्री कार्यालय ने फ़ैसला लिया है कि सवालों और सवाल पूछने वालों के चयन में अब और सावधानी बरती जाएगी। ख़बर के मुताबिक़, अब जिन भी लोगों को पीएम से सवाल पूछने होंगे उसके लिए उन्हें रविवार को होने वाले प्रोग्राम से 48 घंटे पहले सवाल का वीडियो बनाकर भेजना होगा। इसके बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया।

राहुल गांधी का ट्वीट

उधर, राहुल गांधी ने कल ही वणकम पुडुचेरी ट्वीट करके चुटकी ली और डेक्कन हेरल्ड की खबर का लिंक लगाया। यह 20 दिसंबर की खबर है और बुधवार यानी 19 दिसंबर की घटना की रिपोर्ट है। इसे मैंने कल शाम को शेयर किया। मैंने लिखा था, “सोशल मीडिया पर तो इस मामले की चर्चा रही पर किसी अखबार में (टेलीग्राफ को छोड़कर) यह खबर नहीं दिखी। आज देखा राहुल गांधी ने इसे ट्वीट किया है। ठीक है, यह उनकी राजनीति का हिस्सा होगा पर आपका अखबार? ऐसा नहीं है कि हिन्दी पट्टी की खबर नहीं है इसलिए नहीं छपी। अमित शाह सबरीमाला मंदिर विवाद पर बोलेंगे या केरल जाएंगे तो खबर छपती है। अपने अखबार को जानिए। और यह मत समझिए कि आप सब कुछ जानते हैं।”

हिन्दी में कल कुछ वेबसाइट पर यह खबर आई पर आपके अखबार ने दी क्या? आपको आपके अखबार ने यह खबर नहीं दी तो कोई बात नहीं पर यह खबर जरूर दी होगी कि प्रधानमंत्री नमो एप के जरिए 2019 आम चुनावों के मद्देनजर अपने पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत करते हैं। इस कार्यक्रम का नाम ‘मेरा बूथ सबसे मजबूत’है। पर यह नहीं बताया होगा कि अब से इसके सवाल 48 घंटे पहले ही तय हो जाएंगे। अगर बताया तो अच्छी बात है। मुझे भी बताइए। नहीं बताया हो तो अपने अखबार को जानिए। और यह मत समझिए कि आप सब कुछ जानते हैं।

वरिष्ठ पत्रकार और अनुवादक संजय कुमार सिंह की रिपोर्ट। संपर्क [email protected]

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