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पीड़ित पत्रकारों का साथ दूंगा, मीडिया घरानों की नाराजगी की परवाह नहीं : केजरीवाल

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल को मजीठिया वेतनमान दिलाने का आश्‍वासन देकर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह अलग किस्‍म के राजनेता हैं। वह शोषित, पीड़ित और प्रताड़ित वर्ग के हितों की रक्षा करने के लिए बने हैं। इसके लिए उन्‍हें बड़े-बड़े मीडिया घरानों की नाराजगी तक की कोई परवाह नहीं है। शुक्रवार को दिल्‍ली सचिवालय में मुलाकात के दौरान उन्‍होंने कहा, ”हम जनता के वोट से जीत कर आए हैं। इसलिए हम मालिकान के साथ नहीं, पीडि़त पत्रकारों के साथ खड़े हैं।”

दिल्‍ली के मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल को मजीठिया वेतनमान दिलाने का आश्‍वासन देकर एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह अलग किस्‍म के राजनेता हैं। वह शोषित, पीड़ित और प्रताड़ित वर्ग के हितों की रक्षा करने के लिए बने हैं। इसके लिए उन्‍हें बड़े-बड़े मीडिया घरानों की नाराजगी तक की कोई परवाह नहीं है। शुक्रवार को दिल्‍ली सचिवालय में मुलाकात के दौरान उन्‍होंने कहा, ”हम जनता के वोट से जीत कर आए हैं। इसलिए हम मालिकान के साथ नहीं, पीडि़त पत्रकारों के साथ खड़े हैं।”

इन पत्रकारों की समस्‍याओं के समाधान के लिए वह कुछ भी करने को तैयार हैं। उनके साथ उपमुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया और दिल्‍ली सरकार के कई अधिकारी भी उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल में शामिल पत्रकारों ने अपनी समस्‍याओं से संबंधित एक ज्ञापन मुख्‍यमंत्री को सौंपा। उसके बाद मजीठिया मामले का अध्‍ययन कर रहे अधिकारी कपिल सिंह ने पत्रकारों की समस्‍याओं को नोट किया और पत्रकारों के साथ उस पर विस्‍तार से चर्चा भी की।

अरविंद केजरीवाल से मिलकर लौटे दैनिक जागरण नोएडा के चीफ सब एडिटर श्रीकांत सिंह की रिपोर्ट.


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2 Comments

2 Comments

  1. kamlesh pandey

    April 18, 2015 at 10:47 am

    दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल यदि पत्रकारों के हितों की आवाज बनते हैं तो यह पत्रकार विरादरी का सौभाग्य है और अनवरत संघर्ष के बाद एक स्वर्णिम भविष्य का सूचक भी। पत्रकारिता जैसे स्थाई पेशे में ठेका श्रम, अपॉइंटमेंट लेटर नहीं दिए जाने और अधिक कार्यावधि जैसी महामारी का वैधानिक टीकाकरण जरूरी है। उनमें करने का माद्दा भी है। इन मुद्दों का सहारा बनकर वो 2019 की दिशा को मोड़ सकते हैं।

  2. purushottam asnora

    April 19, 2015 at 1:25 am

    वाह! ये हुई न बात, नीति, नियम और कानूनों को ठेंगे पर रखने वाले मीडिया संस्थानों और मालिकान के चमचे संपादकों के लिए निश्चित ही यह बूरी खबर है। कानून जिस दिन अपने पर आता है उस दिन उन्हें अपने कुकर्म पता चलेंगे।
    मार्च 14 में हमने उत्तराखण्ड के मुख्य मंत्री हरीश रावत को पर्वतीय पत्रकार एशोसिएशन उत्तराखण्ड की ओर से ज्ञापन दिया कि उत्तराखण्ड के बडे समाचार पत्रों से पूछा जाय कि किस स्टेशन से कौन पत्रकार खबर भेजता है और आप उन्हें क्या सुविधा और भुगतान कर रहे हैं। अफसोस कि माननीय मुख्य मंत्री ने हमारी मांग तुरन्त खारिज करते हुए कहा-यह केन्द्र का मामला है। मुख्य मंत्री जी! अखबार आपके यहां का, पत्रकार आपके राज्य के तब केन्द्र के पाले में गेंद डाल आप केवल बचने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि तब केन्द्र में भी कांग्रेस नीत सरकार ही थी। मीडिया हाउस के मगरमच्छों और उनके दलाल संपादकों पर हाथ डालने की हिम्मत दूसरी पार्टी के नेताओं में नहीं है।
    दिल्ली के मुख्य मंत्री अरविन्द केजरीवाल यदि मीडिया संस्थानों से पत्रकारों का हक दिला देते हैं तो यह पत्रकारों के लिए बडा कार्य होगा।

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