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नेशनल दुनिया के मालिक ने जारी किए फर्जी चेक

: तीन माह के बकाए वेतन के लिए जारी किए थे चेक : मेरठ से खबर है कि नेशनल दुनिया के मालिक ने कर्मचारियों को तीन माह के बकाया वेतन का जो चेक दिया था, वह बाउंस हो गया.  अखबार मालिक शैलेंद्र भदौरिया ने कोर्ट द्वारा टाइट किए जाने के बाद ये चेक कर्मचारियों को सौंपे थे. हालांकि कर्मचारियों को पहले से ही आशंका थी कि चेक बाउंस हो सकते हैं. नेशनल दुनिया मेरठ के कर्मचारियों ने बकाया वेतन का भुगतान न होने पर डिप्टी लेबर कमिश्नर से शिकायत की थी. श्रम विभाग ने अखबार के मालिक शैलेंद्र भदौरिया व स्थानीय संपादक सुभाष सिंह को नोटिस पर नोटिस जारी किया. ये दोनों नोटिसों की अनदेखी करते रहे.

: तीन माह के बकाए वेतन के लिए जारी किए थे चेक : मेरठ से खबर है कि नेशनल दुनिया के मालिक ने कर्मचारियों को तीन माह के बकाया वेतन का जो चेक दिया था, वह बाउंस हो गया.  अखबार मालिक शैलेंद्र भदौरिया ने कोर्ट द्वारा टाइट किए जाने के बाद ये चेक कर्मचारियों को सौंपे थे. हालांकि कर्मचारियों को पहले से ही आशंका थी कि चेक बाउंस हो सकते हैं. नेशनल दुनिया मेरठ के कर्मचारियों ने बकाया वेतन का भुगतान न होने पर डिप्टी लेबर कमिश्नर से शिकायत की थी. श्रम विभाग ने अखबार के मालिक शैलेंद्र भदौरिया व स्थानीय संपादक सुभाष सिंह को नोटिस पर नोटिस जारी किया. ये दोनों नोटिसों की अनदेखी करते रहे.

एक पेशी पर सुभाष सिंह ने लिखित तौर पर बयान दिया कि 26 मई को मालिक शैलेंद्र भदौरिया के आने पर एक माह का वेतन व तीन माह के बकाये का भुगतान कर दिया जाएगा. लेकिन उनके न आने पर न तो वेतन आया और न ही तीन माह के भुगतान की तारीख बताई गई. संपादक पेशी की तिथि पर बीमारी का बहाना बताकर अपने प्रतिनिधि आईटी कर्मचारी नितिन को भेजकर अनुपस्थित होने का कारण बताया. लेबर कोर्ट ने अखबार के मालिक शैलेंद्र भदौरिया व मेरठ संपादक सुभाष सिंह के खिलाफ अवमानना के लिए अर्थदंड लगाया.

अर्थदंड के बचाव में मालिक ने कर्मचारियों के तीन माह के बकाए वेतन के चेक जारी कर दिए. कर्मचारियों को आशंका थी कि कहीं चेक बाउंस न हो जाए. तभी अवमानना के लिए तिथि पांच जुलाई को संपादक ने अपने प्रतिनिधि हरिओम (विज्ञापन विभाग के कर्मचारी) के जरिए फिर असमर्थता जताते हुए लेबर कमिश्नर को प्रबंधन द्वारा चेक के बजाए बैंक ड्रॉफ्ट जारी करने की योजना बताई. देखना यह है कि जब वह चेक से भुगतान नहीं कर पाए, तो क्या ड्रॉफ्ट से भुगतान कर पाएंगे. डीएलसी को भेजे गए प्रार्थना पत्र में पेशी पर न आने की असमर्थता जताते हुए मालिक ने लिखा है कि प्रबंधन ने डिसीजन लिया है कि चेक के बजाए बैंक ड्रॉफ्ट जारी किए जाएंगे. कृपया कर्मचारी चेक न लगाएं.  इधर नेशनल दुनिया मेरठ के 40 कर्मचारियों ने अखबार मलिक के खिलाफ कोर्ट की शरण ली है.

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