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समाजवादी पत्रकार दाह-संस्कार योजना, सूचना विभाग ने लागू की गाइड लाइन

लखनऊ। पत्रकारों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों से हत-आहत लोगों के लिए एक नायाब राहत योजना शुरू की गई है। सूचना विभाग द्वारा लागू की गई इस योजना का नाम “उप्र समाजवादी पत्रकार दाह संस्कार एवं राहत योजना” दिया गया है। इस योजना को उप्र मान्यता पत्रकार समिति के शीर्ष पदाधिकारियों के निर्देशन में संपादित किया जाएगा, जिसको विभिन्न जिलों में समिति द्वारा चयनित पुलिस अफसरों द्वारा लागू किया जायेगा। 

लखनऊ। पत्रकारों पर लगातार हो रहे जानलेवा हमलों से हत-आहत लोगों के लिए एक नायाब राहत योजना शुरू की गई है। सूचना विभाग द्वारा लागू की गई इस योजना का नाम “उप्र समाजवादी पत्रकार दाह संस्कार एवं राहत योजना” दिया गया है। इस योजना को उप्र मान्यता पत्रकार समिति के शीर्ष पदाधिकारियों के निर्देशन में संपादित किया जाएगा, जिसको विभिन्न जिलों में समिति द्वारा चयनित पुलिस अफसरों द्वारा लागू किया जायेगा। 

आप अवगत होंगे कि पिछले कुछ बरसों के दौरान प्रदेश के विभिन्न जनपदों में पत्रकारों पर घातक और नृशंस हत्या की सूचनाएं मिली हैं। इनमें हाल ही शाहजहाँपुर में एक मंत्री के इशारे पर पुलिस और माफिया के लोगों ने पेट्रोल डाल कर फूंक दिया था। इस को लेकर लखनऊ में भी भारी हंगामा हुआ था।

ऐसे हादसों और उसको लेकर भड़के बवाल को थामने के लिए उप्र मान्यता पत्रकार समिति ने गहन अध्ययन के बाद सूचना विभाग के अफसरों से बातचीत के बाद फैसला कराया है कि ऐसे हादसों में मारे गए व आश्रित लोगों के लिए समाजवादी पत्रकार दाह-संस्कार एवं राहत योजना लागू करा दी गई है।

इस योजना के तहत राहत के लिए आश्रितों से मोल-तोल करने के लिए उप्र मान्यताप्राप्त पत्रकार समिति के अध्यक्ष और महासचिव को अधिकृत किया गया है। इस समिति पर पिछले 3 बरस से जबरन कब्जाए ऐसे लोगों और पुलिस विभाग से उनके करीबी रिश्तों के अनुभव के आधार पर ही उन्हें चयनित किया गया है।

तय किया गया है कि कई बंदिशों के चलते ही यह राहत मिल सकेगी। शर्तों के तहत किसी भी अभ्यर्थी के लिए 20 से 30 लाख रुपये के बीच ही यह रकम होगी लेकिन लाभार्थी के लिए इस बारे में किसी भी अखबार या न्यूज़ चैनल को कोई भी बाइट नहीं दे सकेगा। साथ ही यह भी बाध्यकारी होगा कि लाभार्थी सीबीआई जांच जैसी कोई भी ऐसी भी मांग नहीं करेगा जो सरकार के लिए संकट उत्त्पन्न कर सके। अन्य मसलों को समिति की अध्यक्ष व महा सचिव का फैसला ही अंतिम माना जाएगा।

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1 Comment

1 Comment

  1. Sunil Amar

    March 23, 2016 at 12:39 pm

    Hahahaha ! Shabas !

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