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ऑल इंडिया रेडियो में भी अखबारों की तरह अंडरटेकिंग प्रावधान से मची अंधेरगर्दी

नई दिल्ली : केंद्र सरकार भी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुरस्तान टाइम्‍स और दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कार द्वारा अपनाए गए अवैध और असंवैधानिक तरीके से ऑल इंडिया रेडियो को चलाने का ठेका यहां के कुछ अधिकारियों को दे दिया है। पिछले बीस-बीस सालों से काम कर रहे आकस्मिक (कैजुअल्‍स) उदघोषकों और प्रस्तोताओं से इन अखबारों की तरह ही अवैध अंडरटेकिंग लेने के आदेश जारी किए गए हैं। 

नई दिल्ली : केंद्र सरकार भी दैनिक टाइम्स ऑफ इंडिया, हिन्दुरस्तान टाइम्‍स और दैनिक हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण और दैनिक भास्कार द्वारा अपनाए गए अवैध और असंवैधानिक तरीके से ऑल इंडिया रेडियो को चलाने का ठेका यहां के कुछ अधिकारियों को दे दिया है। पिछले बीस-बीस सालों से काम कर रहे आकस्मिक (कैजुअल्‍स) उदघोषकों और प्रस्तोताओं से इन अखबारों की तरह ही अवैध अंडरटेकिंग लेने के आदेश जारी किए गए हैं। 

इस अवैध अंडरटेकिंग में इन अखबारों की ही तरह आकस्मिक उद्घोषकों और प्रस्तोताओं को हस्ताक्षर करने को बाध्य किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि कोई भी ऐसा आकस्मिक कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए देश की किसी भी अदालत का दरवाजा नहीं खटखटा सकता। किसी भी हालत में अपने को स्थायी करने की मांग नहीं कर सकता। और भी ऐसी कई शर्तों का इस अंडरटेकिंग में प्रावधान है। ये प्रावधान कुछ हिन्दुस्तान टाइम्स के कर्मचारियों से कराए अंडरटेकिंग पर हस्ताक्षर की ही तरह है, जिसमें कर्मचारियों पर कई तरह के वैधानिक उपाय न अपनाने की शर्ते थोपी गईं हैं। 

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह सब कथित रूप से एक ऐसे बड़े अधिकारी की शह पर किया जा रहा है, जिस पर एक समय में यौन शोषण का आरोप लगा था। इतना ही नहीं, अंडरटेकिंग ऑल इंडिया रेडियो या किसी सरकारी लेटर हेड या स्टांप पेपर पर साइन नहीं कराया जा रहा है। साथ ही अलग-अलग कर्मचारियों से अलग –अलग तरह के मसौदे पर हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। यह उस वक्त हो रहा है, जब कर्मचारियों के एक मामले पर कैट के मुख्य बेंच के समक्ष सुनवाई होनी है।

मजीठिया मंच एफबी बाल से 

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