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सुख-दुख

क्रोम ब्राउजर खतरनाक है!

नीरेंद्र नागर-

कुछ दिन पहले नोएडा से कलकत्ता सामान भिजवाने के लिए पैकर्ज़ ऐंड मूवर्ज़ सर्च कर रहा था। अभी सर्च पूरा हुआ भी नहीं था कि कहीं से फ़ोन आ गया। कहा, ‘फलाँ ट्रांसपोर्ट से बोल रहा हूँ। बताइए, क्या रिक्वायरमेंट है आपकी।’ मैं चौंक गया। आख़िर इस बंदे को कैसे पता चला कि मुझे ट्रांसपोर्टर की जरूरत है। इसे मेरा नंबर कैसे मिला? मैंने तो सर्च के दौरान कहीं अपना नंबर नहीं दिया था।

पहला शक मेरा गूगल और क्रोम ब्राउज़र पर गया क्योंकि मैं गूगल पर लॉग्टइन था। संभव है, गूगल और क्रोम यह ट्रैक कर रहे है कि मैंने पैकर्ज़ ऐंड मूवर्ज़ सर्च किया और उन्होंने यह बात कुछ ट्रांसपोर्टरों को बता दी हो। लेकिन क्या उन्होंने उसे मेरा नंबर भी दे दिया? यह तो बहुत ग़लत बात है।

दो दिन बाद मैं फिर गूगल पर गया और फिर वही सर्च किया। फिर दो मिनट के बाद एक फ़ोन आ गया ट्रांसपोर्टर का। साफ़ है कि मैंने सर्च के दौरान कहीं अपना नंबर नहीं डाला था, फिर भी मेरा फ़ोन शेयर किया जा रहा था।

उस दिन से मैेने क्रोम ब्राउज़र को बाइ-बाइ कर दिया। तब से सफ़ारी और मोज़िला यूज़ कर रहा हूँ। ट्रैकिंग को स्ट्रिक्टली ना कर दिया है।

यह पोस्ट दो कारणों से शेयर कर रहा हूँ।

एक, जानकारों से मैं यह पूछना चाहता हूँ कि क्या मैंने ही ग़लती से गूगल और क्रोम को इजाज़त दे दी थी कि वे मेरा फ़ोन नंबर शेयर कर सकते हैं या यह किसी वेबसाइट का ट्रैकर था जो यह काम कर रहा था?

दो, बाक़ी साथियों को मैं आगाह करना चाहता हूँ कि सर्च के दौरान आपका फ़ोन भी हो सकता है, ट्रैक और शेयर किया जा रहा हो और इसीलिए आप भी कोई उपाय अपनाएँ कि ऐसा न हो।

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