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सियासत

अमित शाह की सेहत का संकट!

-संजय कुमार सिंह-

अमित शाह का स्वास्थ्य और योग्यता (क्षमता) बनी रहे… पूर्व तड़ीपार, केंद्रीय गृहमंत्री का बिहार चुनाव से अलग रहना खबर नहीं है। खबर यह है कि वे घोषणा करके भी बिहार नहीं गए। और यही दिलचस्प है। हालांकि अमित शाह को एक आम सांसद या गृहमंत्री के रूप में देखें तो यह भी खास बात नहीं है। पर वे सवा सौ करोड़ की आबादी में चुने गए गिनती के पूर्व तड़ी पारों में हैं जिसे गृहमंत्री बनाने से बचने की जरूरत नहीं समझी गई। ऐसे में उनकी योग्यता और क्षमता जितनी दिखती है उससे बहुत ज्यादा होने की संभावना हमेशा रहती है।

इसलिए, खास बात यह है कि उनके बिहार नहीं जाने का कारण क्या हो सकता है। एक तो उनका स्वास्थ्य है ही। जो लगातार अटकल का विषय रहा है और पता नहीं इसपर क्यों इतनी गोपनीयता बरती जा रही है। हालांकि, इस खबर के अनुसार उन्होंने कहा था कि वे स्वस्थ हैं और बिहार जाएंगे।

मैंने वह प्रसारण नहीं देखा था पर जिन्होंने देखा था उनका कहना था कि वे बहुत बीमार लग रहे थे और संभव है कि नहीं जाएं।

मेरा मानना था कि इस दावे से स्वास्थ्य ठीक होने का संदेश तो जाएगा ही, बाद में नहीं जाने का कोई भी कारण बताया जा सकता है। हालांकि पूछेगा कौन? और कहां ऐसा रिवाज है? एक पत्रकार के रूप में मेरी नजर ऐसे दावों पर रहती है क्योंकि आजकल खबरों को फॉलो करने का रिवाज रह नहीं गया है और सिर्फ प्रचार छपता है। हमलोगों ने यही सीखा और जाना था कि खबर वही है जो छिपाया जाए। चूंकि दावे के बाद बिहार जाने से स्वास्थ्य को लेकर अटकल खत्म हो सकती थी, और दावे की जरूरत ही नहीं थी इसलिए दावे पर मेरी नजर थी।

मैं नहीं जाने का आधिकारिक या घोषित कारण जानना चाह रहा था। पर अभी कारण नहीं बताया गया है। हालांकि अभी समय है और दौरा अभी भी हो सकता है। देखा जाए। दूसरा कारण बिहार में हार की आशंका है। वैसे, इस बारे में मेरा मानना है कि जीते कोई सरकार भाजपा की ही बनेगी। किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने की उम्मीद नहीं है और तोड़-फोड़ में भाजपा से कौन जीत सकता है। जब मध्य प्रदेश में सरकार नहीं चली, राजस्थान में बेशर्म कोशिश हुई बिहार में 2015 में अंतरात्मा की आवाज बिक गई थी तो इस बार कोई नहीं बिकेगा यह सपना भी नहीं आना चाहिए।

तेजस्वी जीत जाएं यह तो संभव है। पिछली बार भी जीते ही थे। पर अपने विधायकों को बचा लेंगे – यह ज्यादा मुश्किल है। बिहार जैसे राज्य में जहां समुद्र तट नहीं है, वहां के विधायक किस रेसॉर्ट में रहेंगे और कौन रखने को तैयार होगा। ये सब आने वाले समय की दिलचस्प राजनीति के सवाल हैं। इनके जवाब मिलने नहीं हैं। अटकलों में ही खबर और मनोरंजन भरपूर है। देखते रहिए। चुनाव परिणाम के बाद की राजनीति और दिलचस्प होगी। राज्यपाल रात में जगेंगे कि दिन में ही खेल करेंगे यह भी देखना है।

ऐसे में संभव है अमित शाह तब जाएं और सीधे अपना कमाल दिखाएं। मैं इंतजार में हूं। उनकी क्षमता पर भूरा भरोसा है। ईश्वर उनका स्वास्थ्य ठीक रखे। भारत की भक्त जनता को उनकी बहुत जरूरत है। उस पार्टी और सरकार को तो है ही। तभी तो सवा सौ करोड़ लोगों में पूर्व तड़ी पार ही गृहमंत्री बने। बेशक उनका कोई विकल्प नहीं है। वैसे ही जैसे नरेन्द्र मोदी का कोई विकल्प नहीं है। जय हो भारतीय राजनीति की। यह जोड़ी भले-फूले। भारतीय राजनीति अब सुधरनी तो है नहीं है। ठीक से बर्बाद ही हो जाए।

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