Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तर प्रदेश

यूपी-बिहार में ज़मीन पर रिपोर्टिंग करना कितना मुश्किल काम है!

श्याम मीरा सिंह-

ABP न्यूज़ के पत्रकार सुलभ श्रीवास्तव एक दिन पहले यूपी पुलिस को लिखते हैं कि मैंने जो रिपोर्ट की थी उसकी वजह से शराब मफ़ियाओं से मुझे और मेरे परिवार की जान को ख़तरा है. मुझे हर दिन घर से बाहर निकलते हुए लगता है कोई मेरा पीछा कर रहा है. मेरे जानने वालों ने बताया है कि शराब माफिया मुझसे ख़फ़ा हैं. और अगले ही दिन उनकी लाश मिलती है प्रतापगढ़ में.

इससे अंदाज़ा लगाया जा सकता है ज़मीन पर रिपोर्टिंग करना कितना मुश्किल है. और अगर आप उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्य में पत्रकारिता कर रहे हैं तो आप पर एक ही विकल्प है आप या तो इस खबर को छाप सकते हैं कि मंत्री जी ने आज कौन से शोरूम का फ़ीता काटा, या ये खबर छाप सकते हैं कि आज फलाने रोड पर ट्रक और ट्रोली में हुई टक्कर, पाँच घायल. इसके इतर, भू-माफिया, शराब माफिया पर आप एक खबर नहीं लिख सकते. मैंने कोई पत्रकारिता नहीं की है मगर ETV चैनल के रिपोर्टर के रूप में एक ज़िले में कुछ दिन काम किया था. उस ज़िले में एक शराब माफिया था जोकि उस ज़िले का साँसद भी रहा था उसने अपने एक पुराने ड्राइवर को अपनी बुलेरो गाड़ी से कुचलवा कर मरवा दिया था. मैं उस ज़िले में रिपोर्टर बना ही था तब. आसपास के अख़बारों में कुछ खबर छपी भी मगर कोई कारवाई उस पूर्व सांसद के ख़िलाफ़ नहीं हुई. क्योंकि वो सांसद से ज़्यादा, एक भू माफिया, शराब माफिया और एक दबंग आदमी था. मुझे कोई रिपोर्टिंग करना नहीं आता था, मुझे रिपोर्टिंग का “क” भी नहीं पता था. मगर मैंने अपने चैनल के स्ट्रिंगर से इच्छा जताई कि मैं इस पूर्व सांसद की अवैध शराब पर रिपोर्टिंग करना चाहता हूँ. स्ट्रिंगर बोला “आप पागल हो?” मरोगे?… जो कोई स्थानीय अख़बार वाला उनके ख़िलाफ़ एक खबर छापता है अगले ही दिन उसे उठवा लिया जाता है.

चूँकि मुझे कुछ आता भी नहीं था और न खबर के बारे में मुझे कुछ अता-पता मिला, इसलिए मैं बस सुनता रहा. कुछ दिन बाद निजी कारणों से मैंने उस चैनल से इस्तीफ़ा दे दिया. लेकिन वहाँ बिताए उन कुछ दिनों के कारण मुझे इस बात का भान है कि शराब मफ़ियाओं के ख़िलाफ़ खड़े होने का क्या हश्र हो सकता है. मगर सुलभ श्रीवास्तव जैसे साहसी पत्रकार ने ये ज़हमत उठाई. उसकी खबर छुपाई नहीं बल्कि छापी, कोई पढ़ा-लिखा देश होता तो उस पत्रकार को जो शब्बासी देता, उसकी सुरक्षा का ख़्याल करता, मगर उत्तर प्रदेश सरकार-प्रशासन से सुलभ को क्या मिला? इस देश की सरकार ने एक ट्विटर विवाद पर कंगना रनौत को “वाई” सुरक्षा दे दी, मगर माँगने पर भी एक पत्रकार को दो सिपाही नहीं दिए गए.

बीते दिनों अवैध शराब के चलते अलीगढ़ में नब्बे से अधिक लोगों की जान चली गई. सरकार मुआवज़े की घोषणा करती रही. नब्बे परिवारों ने अपनों को खो दिया, सरकार ने दिखावे के लिए एक दो जगह जाकर अवैध शराब भट्टियों को तुड़वा दिया. ताकि ये भरम रहे कि सरकार सक्रिय है. मगर सरकार का सक्रिय होना लाशों के बाद ही क्यों दिखता है इस बात पर कोई ध्यान नहीं देता. असल में सरकार और शराब मफ़ियाओं में कोई अंतर नहीं है. मैंने अपने ही वृतांत में बताया कि जिस शराब माफिया की मैं बात कर रहा था वो उस क्षेत्र का सांसद रहा है. अब बताइए…

ज़िले के अफ़सरों, पुलिसकर्मियों सबकों पता होता है अवैध शराब कहाँ बनती है. मगर किसी में हिम्मत नहीं है कि इनके ख़िलाफ़ एक्शन ले ले. क्योंकि पुलिस हो या पत्रकार. सबका अंजाम मौत है.

मगर सरकार या पुलिस इस मामले में जो कर सकती थी वो न्यूनतम काम भी सरकार द्वारा नहीं किया गया. जब पत्रकार ने एक दिन पहले ही आपको बता दिया कि शराब माफिया उसका पीछा कर रहे हैं तो क्यों उसे सुरक्षा नहीं दी गई. क्यों शराब मफ़ियाओं पर कार्रवाई नहीं की गई. किस बात का इंतज़ार किया जा रहा था? पुलिस सूचना देने पर भी जान नहीं बचा पा रही है तो क्या पुलिस का काम क्या सिर्फ़ मास्क के चालान काटने के लिए है?

दूसरा सवाल मेरा मीडिया चैनलों से है, उसके एंकरों से है. अगर मीडिया चैनलों के एंकरों में ज़रा सी भी शर्म हो तो उत्तर प्रदेश सरकार की नाक में नकेल डाल दें. कम से कम अपनी बिरादरी की हत्याओं पर तो बोल लें. इस देश में, इसी प्रदेश में, एक पत्रकार के गाल पर थप्पड़ मारने पर पूरे प्रशासन को हिला दिया जाता था, आज एक कथित मेन्स्ट्रीम चैनल के रिपोर्टर की खुलेआम हत्या हो जाती है मगर सरकार के माथे पर सिकन भी वो चैनल नहीं ला पाता. क़ायदे से सभी चैनलों को आज CM योगी आदित्यनाथ से पूछना चाहिए कि प्रदेश में ये कैसी गुंडागर्दी चल रही है. मगर टीवी चैनलों और एंकरों ने अपना आत्मविश्वास, अपना सम्मान, पार्टियों के कार्यालयों में गिरवी रख दिया है.

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन