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सुख-दुख

सेल्फ रिसपेक्ट से दूर सेल्फीमार पत्रकारों के खिलाफ सोशल मीडिया पर हल्ला शुरू

Swapnesh Dubey Real : कितना शर्मनाक है ये? एक पत्रकार और साथ ही न्यूज़ एंकर होने के नाते शर्म से सर निचे झुक गया जब ये तस्वीर सामने आई। ये स्तर है हमारा? दुःख तो इस बात का है कि इन्ही की कम्युनिटी से हम भी आते हैं अपने आप को अलग करे भी तो कैसे?

Swapnesh Dubey Real : कितना शर्मनाक है ये? एक पत्रकार और साथ ही न्यूज़ एंकर होने के नाते शर्म से सर निचे झुक गया जब ये तस्वीर सामने आई। ये स्तर है हमारा? दुःख तो इस बात का है कि इन्ही की कम्युनिटी से हम भी आते हैं अपने आप को अलग करे भी तो कैसे?

Ajit Anjum : एक सेल्फ़ी की खातिर ….. पत्रकार …सेल्फ़ी और ‘सरकार’

Sanjay Kumar Singh : भक्त मीडिया की फौज – एक सेल्फी हो जाए बाबा !!

Shripal Shaktawat : सिर्फ एक सेल्फ़ी का सवाल है “बाबा” ! किसी सड़क पर तम्बू गड़े जड़ी बूंटी बेचते लोगों को करीब से देखा हो तो पता चलेगा कि फोटो में वो या तो दारा सिंह के पास खड़े हैं या फिर धर्मेन्द्र के साथ. वो फोटो उनकी मार्केटिंग में मदद का जरिया होती है .लेकिन अब मार्केटिंग का दौर बदल रहा है .सेल्फ़ी है तो दूकान आसानी से चल सकती है ऐसा हर पत्रकार तो नहीं सोचता लेकिन कई सेल्फिश टाइप पत्रकार ऐसा ही सोचते हैं . इसीलिए सेल्फ़ी के लिए बीजेपी के राष्ट्रीय दफ्तर में पत्रकार मोदी जी की सुरक्षा व्यवस्था की ऐसी तैसी करते हुए टूट से पड़े .एक जमाना था जब नेता पत्रकरों के आगे पीछे होते थे ,उन्हें साधने की ग़रज़ से .अब सत्ता को साधने के लिए पत्रकार सेल्फ़ी सेल्फ़ी के खेल में जुट गए हैं .अजीब है लेकिन नयी तहजीब है !

Chandrakant Tripathi : आह! ये राजधानी के पत्रकार, भाई वाह, गज़ब की बेकरारी- किसलिए !

Samar Anarya : पत्रकारों में प्रधानमंत्री मोदी के साथ सेल्फ़ी लेने की होड़- कोई गिर भी गया है उसे उठाया जा रहा है- एबीपी न्यूज़। हँस भी नहीं पा रहा हूँ इस काव्यात्मक सच पर- जी पत्रकारिता गिर गयी है उसके साथ, उसे कौन उठायेगा? Journalists jostle to get a selfie with PM Modi, someone has fallen down, getting lifted up- ABP News.. Can’t even laugh at the poetic irony- who will help journalism that too has fallen down?

Kumar Anurag : मोदी के बगल में चाटुकारों की फौज

Manish Anand : सेल्फीस सरकार के साथ सेल्फी! पत्रकारों को पूछना चाहिये था, महंगाई पर, मधेशी आंदोलन पर, बिहार चुनाव में हार पर, असहिष्णुता पर सवाल। लेकिन सरकार भी खामोश, चैथा स्तंभ में भी सेल्फी के लिए खामोशी!

Mirza Shakir Ali Beg : यह फोटो सब कहती है कि कौन किस को मैनेज कर रहा है पत्रकारिता कहां अब व्यापार है यह

Drigraj Madheshia : सेल्फ़ी को लेकर pm की खिंचाई करने वाले ही सेल्फ़ी के लिए टूट पड़े।

Sandeep K. Mishra : ये लोग तो सिर्फ अपने वरिष्ठों के दिखाए मार्ग का अनुसरण कर रहे हैं सर!! एक फोटो घर की दीवार पर ना सही फेसबुक पे ही सही

Sonu Sharma : सेल्फी ना हुई गोलियां हो गई सल्फ़ास की…

Manikant Thakur : सेल्फ़ी चाहिये या सेल्फ़ रिस्पेक्ट?

Uttam Kumar : और हम सही रिपोर्टिंग की उम्मीद करते है।

Kumar Pal क्या ये वाक़ई पत्रकार है! या कुछ और?


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1 Comment

1 Comment

  1. rajkumar

    November 29, 2015 at 1:41 am

    kamred v vampanthi ki niche se jalane lagi h, atankvadi ke sath photo par chup, dedrohi arundhatirai, maha bhrast rajdipsar desai v barkha dutta ke chelo kamredo ke pichawade par ab late padegi, congress se malai khane walo ke bure din aagaye h

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