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सुख-दुख

अमित शाह बार बार नाक में उँगली क्यों करते हैं?

शीतल पी सिंह-

नजला / ज़ुकाम मेरी खानदानी रवायत में है, जिसके चलते खाना खाते समय नाक से स्त्राव होने की समस्या बनी रहती है । औसतन दूसरों से ज़्यादा नाक से स्त्राव होना अतिरिक्त सावधानी बरतने के लिए प्रेरित करता है। बचपन से ही मां ने टोक टोक कर रुमाल साथ रखने और बीच बीच में बाथरूम विजिट कर नाक साफ़ रखने की आदत बनवा दी। मेरे आस-पास टिश्यू पेपर न पड़े हों तो मैं वैसा ही असहज हो जाता हूं जैसा मोबाइल छूट जाने पर कोई दूसरा ।

यह कोई शेखी मारने की बात नहीं है लेकिन सार्वजनिक तौर पर बार-बार नाक में उंगली डालकर नाक की गंदगी से गोली बनाना और अगल बगल उसे चिपका देना नितांत फ़ूहड़ लगता है, घिन सी आती है।

यह निश्चित ही असभ्यता में ही दर्ज़ किया जा सकता है। कई वीडियो और चित्र सार्वजनिक हो जाने के बाद उम्मीद है कि देश के गृहमंत्री इसे भविष्य में दोहराने से बचेंगे ।

उन्हें बच्चों की तरह नाक में उंगली डालकर गोली बनाते देखना घिन पैदा करता है।


सत्येंद्र पीएस-

यह वीडियो देखकर मुझे फरहान अख्तर की याद आ गई। वह एक खबर बना रहे थे और किसी की बाइट लेकर आए। उन्होंने खबर के लिए बयान का अंश काट लिया।

मैंने वीडियो देखा तो बोला कि बॉस यह तो नास हो गया।
वो बोले, क्या हुआ भाई?
मैंने कहा, जिसकी बाइट आपने ली है, वह नाक में उंगली घोभिया रहा है?
वो बोले, क्या बात कर रहे हैं?
मैंने कहा, आप ही देख लें!

उन्होंने देखा तो उनका मूड ऑफ हो गया। बोले कि एक ही खबर है। स्लॉट में इसे लिखवा दिया हूँ। समझ में नहीं आ रहा है कि क्या करूँ? यह विजुअल काटने पर तो किसी साइड से इसका वाक्य ही नहीं पूरा हो रहा है!

जेठ की तपती दोपहर और उस पर से इतना बड़ा केएलपीडी!उन्होंने बाइट देने वाले नेतवा को फोन मिलाया। सलाम दुआ हुई। फिर फरहान मियां बोले कि यह क्या कर रहे थे आप! फोन पर उधर से बन्दा पता नहीं क्या बोल रहा था। फरहान जी उसे बोले, थोड़ी देर के लिए डांग में उंगली डालकर बैठ गए होते, वो कैमरे में नहीं आता।

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