Connect with us

Hi, what are you looking for?

Local News Community

उत्तराखंड

हरक सिंह रावत पर फर्जीवाड़ा कर 107 बीघा जमीन हड़पने का आरोप, राज्यपाल से जांच की मांग

देहरादून : जन संघर्ष मोर्चा ने पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत द्वारा सहसपुर क्षेत्र में फर्जीवाड़ा कर हड़पी गई 107 बीघा भूमि की जांच किए जाने की मांग की है। मोर्चे ने इस संबंध में राज्यपाल को एक ज्ञापन भेजा है। जनसंघर्ष मोर्चे के अध्यक्ष एवं जी0एम0वी0एन0 के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी का कहना है कि वर्ष 2002 में तत्कालीन राजस्व मन्त्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने अपने पद का दुरूपयोग कर शंकरपुर, सहसपुर में सुशीला रानी नामक महिला की लगभग 107 बीघा भूमि यानि 8.209 हे0 भूमि फर्जी पावर आफ एटार्नी के जरिये हड़पने का काम किया।

देहरादून : जन संघर्ष मोर्चा ने पूर्व मंत्री डा. हरक सिंह रावत द्वारा सहसपुर क्षेत्र में फर्जीवाड़ा कर हड़पी गई 107 बीघा भूमि की जांच किए जाने की मांग की है। मोर्चे ने इस संबंध में राज्यपाल को एक ज्ञापन भेजा है। जनसंघर्ष मोर्चे के अध्यक्ष एवं जी0एम0वी0एन0 के पूर्व उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह नेगी का कहना है कि वर्ष 2002 में तत्कालीन राजस्व मन्त्री डाॅ0 हरक सिंह रावत ने अपने पद का दुरूपयोग कर शंकरपुर, सहसपुर में सुशीला रानी नामक महिला की लगभग 107 बीघा भूमि यानि 8.209 हे0 भूमि फर्जी पावर आफ एटार्नी के जरिये हड़पने का काम किया।

उनके द्वारा अपन करीबी वीरेन्द्र सिंह कण्डारी निवासी रूद्रप्रयाग को मोहरा बनाकर 5 दिसंबर 2002 को सुशीला रानी नामक फर्जी महिला से पावर आफ एटार्नी इनके नाम सम्पादित करा दी तथा गवाह के रूप में सुशीला रानी के पुत्र भीम सैन वर्मा नामक फर्जी व्यक्ति से पावर आफ एटार्नी में गवाही करा दी। इस फर्जी पावर आफ एटार्नी के सम्पादित हो जाने के बाद नेता प्रतिपक्ष द्वारा 31 मार्च 2004 को इस भूमि में से 4.663 हे0 भूमि दीप्ती रावत पुत्री मान सिंह कण्डारी निवासी श्रीनगर, पौड़ी एवं शेष भूमि 3.456 हे0 लक्ष्मी राणा पुत्री जसपाल सिंह निवासी जखौली रूद्रप्रयाग के नाम फर्जी पावर आफ एटार्नी के माध्यम से वीरेन्द्र सिंह कण्डारी द्वारा इनके नाम बैनामा सम्पादित करा दिया गया।

18 सितंबर 2002 को सम्पादित वसीयतनामा व मुख्तारनामा 5 दिसंबर 2002 के दस्तावेजों में वसीयतनामा व मुख्यतानामा कराने वाली महिला के हस्ताक्षरों में कहीं सावित्री देवी वर्मा तो कहीं सुशीला रानी दर्शाया गया है तथा इन दोनों दस्तावेजों में निशानी अंगूठा में भारी भिन्नता है। उक्त के अतिरिक्त वसीयतनामा वाले दस्तावेजों में सावित्री देवी वर्मा के हस्ताक्षर हैं तथा मुख्तारनामा में सुशीला रानी नामक महिला के हस्ताक्षर हैं।

मुख्तारनामा वाले दस्तावेजों में गवाह (भीम सैन वर्मा) के जो हस्ताक्षर कराये गये हैं, वो व्यक्ति किराये पर (हायर कर) लालच देकर लाया गया तथा सम्भवतः वह विकासनगर का निवासी है। इसी कड़ी में वर्ष 2010 में भीम सैन वर्मा द्वारा हस्तलिखित प्रपत्र से इस दस्तावेज, जो कि गवाह के रूप में इस्तेमाल किया गया, की भिन्नता का भी पता आसानी से लग जाता है। जिलाधिकारी देहरादून द्वारा करायी गयी जांच में सुशीला रानी वर्मा की मृत्यु 1974 में होना दर्शायी गयी है तथा प्रशासन ने इन सभी दस्तावेजों को संदिग्ध माना है तथा इसी कड़ी में शासकीय अधिवक्ता (राजस्व) ने कब्जेदारों की बेदखली तथा फर्जी मुख्तारनामा सम्पादित करने वालों के विरूद्व एफ0आई0आर0 हेतु सुझाया गया था, लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी। उन्होंने राज्यपाल से मांग की है कि इस भूमि की जांच कराई जाए।

CosmoQuick: AI Recruitment For Media Jobs
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

भड़ास लीगल टीम : Bhadas Legal Team

भड़ास मेल: [email protected]

Latest 100 भड़ास

विज्ञापन