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सुप्रिय प्रसाद ने फिर साबित किया, उनका तोड़ कोई नहीं!

यशवंत सिंह-

हिंदी टीवी न्यूज़ चैनल्स में टीआरपी की जंग चल रही है। बस कट्टा बम बंदूक़ टैंक गोला बारूद नहीं चल रहे, इसके अलावा जंग के सारे तौर तरीक़े आज़माए जा रहे। टीवी9 भारतवर्ष कई हफ़्ते तक नम्बर एक रहा। फिर इंडिया टीवी नम्बर एक बना। इस बार फिर से आजतक ने अपनी गद्दी वापस ले ली।

जो बड़े न्यूज़ चैनलों में बड़े पदों पर काम करते हैं वो जानते हैं कि टीआरपी का खेल पर्दे के पीछे बहुत सारे परत समेटे होता है और हर परत में कई दुनियाएँ होती हैं, उनके आका होते हैं। ये सब कुछ समझना जानना राकेट साइंस को बूझ लेने जैसा है।

पर एक बात तो सच है। हिंदी न्यूज़ चैनल की जब बात होती है तो आजतक निर्विवाद रूप से नम्बर एक पर होता है। कहा जाता है कि अधिकांश दर्शक खबर जानने के लिए पहले आजतक देखता है। फिर वहाँ से अन्य चैनलों पर क्या चल रहा है, यह पता करने / देखने रिमोट उठाता है।

पिछले जिन दिनों में आजतक नम्बर एक नहीं था, आजतक और इसके बॉस सुप्रिय प्रसाद के दिन लदने की भविष्यवाणी कर दी गई थी। सैकड़ों पोस्ट ट्वीट शेयर फ़ॉर्वर्ड हुए। पर आज जब आजतक फिर से नम्बर एक पर आ गया है तो कहना पड़ेगा कि आजतक को बहुविध उपक्रमों से कुछ हफ़्तों के लिए साइडलाइन तो किया जा सकता है, उसे नम्बर एक से परमानेंट नहीं हटाया जा सकता।

आजतक की बहुत सारे कारणों से बहुत बार निर्मम आलोचना की जा सकती है। ये एक स्वस्थ परंपरा है। मीडिया पर भी सवाल खबरें व्यंग्य लिखा पढ़ा जाना चाहिए, वो भी एक दो बार नहीं बल्कि लगातार। पर उसके कुछ स्थाई भाव को भी समझ लेना चाहिए।

आजतक का स्थाई भाव सुप्रिय प्रसाद हैं और नम्बर वन की कुर्सी है। आजतक को इन दोनों चीजों से देर तक अलग करके नहीं देखा जा सकता। विजेता हारते हैं, हराए जाते हैं पर उनके युद्ध कौशल और जीतने की जिजीविषा को नष्ट नहीं किया जा सकता। सुप्रिय प्रसाद हिंदी टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री के ऐसे ही विजेता योद्धा हैं। उन्हें पिछले पंद्रह सोलह बरस से नज़दीक से आबज़र्व कर रहा हूँ। हारने पर धैर्य नहीं खोते, जीतने पर अहंकारी नहीं बनते। जीवन में इतने उतार चढ़ाव उनने देखे हैं, इतने लंबे समय तक शीर्ष पर रहे हैं कि उनके लिए अब कोई चीज़ चौंकाने वाली नहीं होती।

आज के दिन जब फिर से Supriya Prasad और उनकी टीम आजतक को नम्बर एक पर ले आई है, एक बधाई बनती है।

बाक़ी जंग जारी है! देखते रहिए न्यूज़ चैनलों की टीआरपी की लड़ाई।

आज जिस तरह की राजनीति है और जिस क़िस्म की शासन सत्ता है, उसके बीच एक पुराने नम्बर वन चैनल का फिर से नम्बर वन बन जाना बड़ी बात है। बदलते वक्त के साथ हर जगह जहां बहुत कुछ बदल गया, बहुत कुछ ऊपर नीचे हो गया, टीआरपी की दुनिया भी बदलते बदलते फिर से पुराने ट्रैक पर आ गई और आजतक नम्बर वन हो गया।

सुप्रिय जी को एक व्यक्ति और मित्र के रूप में मैंने हमेशा लाजवाब पाया। मुश्किल वक्त में कल्पना से परे जाकर और सांस्थानिक सोच से अलग हट कर वे मदद का सक्रिय प्रयास करते हैं, मेरे बहुत सारे निजी मामलों में ये देखा आज़माया हुआ है। आजतक के फिर से नम्बर एक बन जाने पर आज सुप्रिय जी और उनकी टीम की ख़ुशी में शामिल हूँ!

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