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लोकतांत्रिक संस्थाओं से निराश भारतीय नागरिक अब केवल मीडिया से उम्मीद लगाए हैं

पत्रकारिता की स्वतंत्रता और मूल्य दोनों की रक्षा से ही बचेगा पत्रकारिता का सम्मान… ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान द्वारा “वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे” पर आयोजित कार्यक्रम में ली शपथ…

ग्वालियर। प्रेस का विस्तार हुआ तो जिम्मेदारियां भी बढीं है। अब प्रेस न केवल प्रिंट या इलेक्ट्रोनिक मीडिया तक सीमित है बल्कि सोशल मीडिया और अब सिटिजन रिपोर्टिंग तक पहुँच गया है। इससे पत्रकारों के काम में नयी चुनौतियां आयी हैं। अब विश्वसनीयता और ब्रेकिंग में देरी को कोई स्थान नहीं है। इसलिए पत्रकारों को और अधिक जागरूक होने की जरूरत होने लगी है। अच्छी बात यह है कि नयी पीढ़ी इस चुनौती का ठीक से जबाव दे पा रही है।

पत्रकारिता की स्वतंत्रता और मूल्य दोनों की रक्षा से ही बचेगा पत्रकारिता का सम्मान… ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान द्वारा “वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम डे” पर आयोजित कार्यक्रम में ली शपथ…

ग्वालियर। प्रेस का विस्तार हुआ तो जिम्मेदारियां भी बढीं है। अब प्रेस न केवल प्रिंट या इलेक्ट्रोनिक मीडिया तक सीमित है बल्कि सोशल मीडिया और अब सिटिजन रिपोर्टिंग तक पहुँच गया है। इससे पत्रकारों के काम में नयी चुनौतियां आयी हैं। अब विश्वसनीयता और ब्रेकिंग में देरी को कोई स्थान नहीं है। इसलिए पत्रकारों को और अधिक जागरूक होने की जरूरत होने लगी है। अच्छी बात यह है कि नयी पीढ़ी इस चुनौती का ठीक से जबाव दे पा रही है।

यह बात ग्रामीण पत्रकारिता विकास संस्थान द्वारा वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम दिवाद पर आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर वरिष्ठ पत्रकार जावेद खान मौजूद रहे जबकि अध्यक्षता संस्थान के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली ने की। कार्यक्रम में खासतौर पर धर्मेन्द्र त्रिवेदी, सुनील पाठक, नासिर गौरी, सर्वेश पुरोहित, तेजपाल सिंह, सुयश शर्मा, लोकेन्द्र पाल, महेश शिवहरे, शैलेन्द्र भदौरिया, सहित बड़ी संख्या में मीडिया से जुड़े लोग मौजूद थे।

अपने अध्यक्षीय भाषण में वरिष्ठ पत्रकार देव श्रीमाली ने कहा कि मीडिया का काम अब और भी चुनौती भरा है। एक तरफ व्यावसायिकता का दबाव है वहीं असमाजिक तत्व और माफिया ताकतों के निशाने पर मीडियाकर्मी है। हर वर्ष दुनिया में चार सौ से ज्यादा मीडियाकर्मी इन्ही के हाथों अपनी जान गंवाते हैं। लेकिन उसके बावजूद मीडिया को अपनी जिम्मेदारियों का अहसास है और वह तमाम चुनौतियों के बावजूद जन हित के मुद्दे उठाता है जो कलानंतर में सत्ता परिवर्तन तक का माध्यम बन जाते। भारत ही नहीं दुनिया में जितने भी बदलाव और परिवर्तन हुए हुए हैं उन सब में प्रेस और मीडिया का योगदान सर्वोपरि है। यही वजह है कि जब लोकतांत्रिक संस्थाओं से लोगों का भरोसा उठता जा रहा हो तब लोगों की उम्मीद केवल मीडिया पर टिकी हुई है।

संविधान पर की चर्चा – वरिष्ठ पत्रकार जावेद खान ने संविधान की प्रति मौजूद पत्रकारों को दिखाई और उसमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वाले आर्टिकल को पढ़कर सुनाया।

पत्रकारिता के मूल्यों की रक्षा की ली शपथ – कार्यक्रम में मौजूद सभी पत्रकारो, फोटोग्राफर्स और केमरापर्सन ने शपथ ली कि वे मीडिया की स्वतंत्रता की रक्षा और मीडया की पवित्रता, जन भरोसे को कायम रखने और नैतिक मूल्यों की रक्षा के लिए सतत प्रयासरत रहेंगे। कार्यक्रम का संचालन नासिर गौरी और आभार प्रदर्शन  तेजपाल सिंह राठौड़ ने  किया…।

देव श्रीमाली
ग्वालियर
मो. 09826087730

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