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पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने मोनालिसा के डायरेक्टर को लीगल नोटिस भेजा!

अभिषेक उपाध्याय-

फ़्रॉड, मासूम लड़कियों के शोषण, शराबबाजी और कास्टिंग काउच के गंभीर आरोपों में घिरे मोनालिसा के डायरेक्टर सनोज मिश्रा को लीगल नोटिस जारी।

टॉप सीक्रेट के ख़ुलासों से बौखलाए सनोज मिश्रा ने हम पर झूठा और मानहानिजनक आरोप लगाया कि हम पैसे लेकर उसकी छवि को धूमिल कर रहे हैं। हम हैरान हैं कि उसने अभी तक हम पर CIA या फिर मोसाद से पैसे लेने का आरोप क्यों नहीं लगाया!

ये वही सनोज मिश्रा है जिसके खिलाफ टॉप सीक्रेट पर एक के बाद दूसरी लडकियों ने सामने आकर मय सबूत फ़्रॉड, शोषण और कास्टिंग काउच की गवाहियाँ दी हैं। ज़िंदगी बर्बाद कर देने के संगीन आरोप लगाए हैं।

संभवतः इन्हीं ख़ुलासों के बाद उसे मोनालिसा के सहारे अचानक मिली पॉपुलैरिटी की इस नाव में उतने ही सेंटीमीटर का बड़ा छेद नज़र आ रहा है जितना उसकी अब तक की डिब्बाबंद और बुरी तरह फ्लाप हुई फ़िल्मों की कुल संख्या है!

दरअसल हमारे खुलासे के बाद देश भर की मीडिया का ध्यान सनोज मिश्रा के इस विवादास्पद और गंभीर आरोपों से घिरे अतीत पर गया और इसके साथ ही “मोनालिसा को बचाओ” कैंपेन भी शुरू हो गया।

एक सीधी सादी लड़की के भविष्य की चिंता अब हर तरफ़ सिर उठा रही है।

इस पर्दाफाश से बौखलाए सनोज मिश्रा को ये भी समझ नहीं आया कि ये सारे आरोप हम नहीं, बल्कि उसके ही साथ काम कर चुके प्रोड्यूसर, फ़ाइनेंसर और एक्टर, एक्ट्रेस लगा रहे हैं!

हमने तो बाक़ायदा सनोज मिश्रा का पक्ष जानने के लिए उसका भी इंटरव्यू किया जिसमें वो लड़कियों के शोषण और सिलसिलेवार फ़ाइनेंशियल फ्रॉड के सवालों पर उसी तरह भड़कता और बगले झाँकता नज़र आया जैसे नया वेतन आयोग लगने से ठीक एक दिन पहले भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में घिरे राज्य सरकार की रोडवेज़ के किसी बड़े बाबू को VRS दे दिया जाए!

अब वो ख़बर रोकने के लिए बेसिर -पैर के आरोप लगा रहा है। किसी C ग्रेड की फ़िल्म की स्क्रिप्ट के पुराने अनुभव को यथार्थ में क्रियान्वित करने की आतुरता में थाने-कचहरी और पुलिस के चक्कर लगा रहा है?

सनोज मिश्रा की परेशानी समझी जा सकती है।

उसके शिकार कोई एक-दो लोग नहीं हैं बल्कि बरसात के मौसम में घाघरा के बढ़ते पानी की तरह ऐसे लोगों की पूरी की पूरी एक बाढ़ है जो इस मामले की रिपोर्टिंग होते ही अपनी-अपनी व्यथा- कथा लेकर सामने आ रहे हैं!

सनोज मिश्रा इन्हीं धागों के खुलने के डर से बुरी तरह परेशान प्रतीत हो रहा है।

संभवतः अपनी डिब्बाबंद फ़िल्मों के सोचे गए क्लाइमेक्स की तरह इस व्यक्ति ने चर्चा की आकांक्षा में किसी नेता के ज़रिए हुई योगी आदित्यनाथ के साथ मुलाक़ात की अपनी तस्वीर को भी अपने सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल पर पिन भी कर रखा है, इस मैसेज के साथ कि वो अकेला नहीं है, योगी उसके साथ हैं!

कभी-कभी तो आरोपों की फ़ेहरिस्त देखते हुए मुझे लगता है कि ये व्यक्ति ख़ुद में एक क्राइम सस्पेंस थ्रिलर फ़िल्म की चलती फिरती पटकथा है और बस रामगोपाल वर्मा की इस पर नज़र पड़ने भर की देर है!

खैर, मेरे विद्वान मित्र और सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड अनूप प्रकाश अवस्थी ने इसके मानहानिजनक आरोपों के खिलाफ इसे लीगल नोटिस जारी कर दी है।

डराने- धमकाने की न तो ये कोशिशें नई हैं और न ही इनसे अप्रभावित रहने और फर्क न पड़ने की हमारी फ़ितरत। सो टॉप सीक्रेट पर तथ्यपरक ख़ुलासों का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।

फ़ैज़ साहब लिख गए हैं-

“यूँ ही हमेशा उलझती रही है ज़ुल्म से ख़ल्क़
न उन की रस्म नई है, न अपनी रीत नई,
यूँ ही हमेशा खिलाए हैं, हम ने आग में फूल
न उन की हार नई है, न अपनी जीत नई!!”

देखें नोटिस…

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