अभिषेक उपाध्याय का पत्र पढ़ें-
आदरणीय प्रशांत कुमार जी
डीजीपी, यूपी
आपको मेल भी कर रहा हूं और ओपेन फोरम पर लिख भी रहा हूं कि पिछले दो दिनों से लगातार मेरे फोन कॉल्स को डिस्टर्ब किया जा रहा है। मुझे इस बात कि अंदेशा है कि कुछ सस्ते जेम्स बॉंड अपने आकाओं का हुक्म बजाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। अब ये जांच आप कीजिए कि कहीं जेम्स बॉंड की ये पायरेटेड कॉपी आपके महकमें में ही तो नही बैठी है!!!
सो अपयश को ही “यश” समझने वाले उन सस्ते जेम्स बांडों को बता दीजिए कि मेरा फोन हैक करवाने की कोशिश न करें। उनसे कह दीजिए कि जनभावना और न्याय के मानदंडों के सामने अपयश की हर शाख को झुकना ही पड़ता है। ये इतिहास का शाश्वत सत्य है जिसे दुनिया की कोई ताकत बदल नही सकती है।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर लिख गए हैं-
“कह दो उनसे झुके अगर तो जग मे “यश” पाएंगे
अड़े रहे अगर तो ऐरावत पत्तों से बह जाऐंगे!!”
सो इन सस्ते जेम्स बांडों को ये भी बता दीजिएगा कि मेरे फोन, व्हाट्सअप या फिर टेलीग्राम में उन्हें कुछ नही मिलेगा। बड़ी बात यही है कि ऐसा कुछ है ही नही, जिसे मुझे छिपाकर रिपोर्ट करना पड़े। यहां तो सब कुछ खुल्लम-खुल्ला है। सिर्फ रिपोर्ट करने का साहस भर होना चाहिए। उनसे कहिएगा कि फोन हैक करना, मूवमेंट ट्रैक करना, इंटरनेट के जरिए इंट्रूजन करना, ‘काम’ आउटसोर्स करना, ये सब बेहद ही बासी और रद्दी तरीके हो चुके हैं और दुनिया इनसे बहुत आगे बढ़ चुकी है।
मैने आर्मीनिया-अज़रबैजान के वॉर ज़ोन से लेकर, रूस-यूक्रेन व इजरायल हमास के वॉर जोन और सीरिया के Conflict zone तक से रिपोर्टिंग की है। इसलिए “सेफ कम्युनिकेशन” क्या होता है, इसकी जितनी जानकारी मुझे है, उतनी किसी अमिताभ के यश को भी नही होगी। मैं दीवार फिल्म के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के रूस-यूक्रेन इजरायल और सीरिया तक फैले यश की बात कर रहा हूं। कृपया संदर्भों की प्रासंगिकता को बनाए रखें।
महान रूसी लेखक लियो टॉल्स्टॉय अपनी महान कृति “युद्ध और शांति” में लिखते हैं कि “सभी योद्धाओं में सबसे शक्तिशाली ये दो हैं – समय और धैर्य।” सो मेरे पास समय भी है और धैर्य भी। इसलिए प्रतीकात्मक भाषा में लिख रहा हूं कि महाभारत के इस युद्ध में उधर बैठे अहंकार के कुरू वंश के सत्तासीन महारथियों को बता दीजिएगा कि नीति से न भटकें। समय सबका आता है। उनका भी आएगा। जब अनीति रावण और दुर्योधन की नही चली तो वक्त की रेजगारी में खनखनाते चंद लम्हों की बादशाहत के इन फुटकर सिक्कों की क्या चलेगी?
गंभीर आरोपों की मेघमाला से घिरी आपकी पुलिस के बस में एफआईआर करना और गिरफ्तारी करना भर है। वो कीजिए। जमकर कीजिए। राई रत्ती की परवाह नही है। पर उससे आगे जाने की कोशिश न की जाए।
मशहूर लेखिका जेन ऑस्टिन अपनी महान कृति “प्राइड एंड प्रीजूडिस” में लिखती हैं कि “मेरे अंदर एक ज़िद है कि मैं कभी भी दूसरों की इच्छा से डरना बर्दाश्त नहीं कर सकती। मुझे डराने की हर कोशिश पर मेरी हिम्मत हमेशा बढ़ जाती है।”
सो मैं ये स्पष्ट कर दू्ं कि इस तरह की सस्ती कोशिशें मेरे भीतर के निर्भयत्व को अमरत्व देती जा रही हैं।
आप आज डीजीपी हैं। कल नही रहेंगे। आप रिटायर होंगे। कल कोई और आपकी जगह लेगा। आज जो केवल अपने पद द्वारा अर्जित यश को अमित यानि अमिट मानकर स्वयं को शहंशाह फिल्म का अमिताभ समझ कर बैठे हैं, वक्त तो एक रोज उनके भी इस कथित यश का पूरा हिसाब कर देगा। वक्त से शक्तिशाली और कुछ नही होता, प्रशांत जी।
सो अपने समय की थोड़ी निष्पक्ष और न्यायशील स्मृति छोड़कर रिटायर होइएगा। फिर लिख रहा हूं कि ये मेरी न तो शिकायत है और न ही कोई प्रार्थना। ये सिर्फ एक संदेश है जो मेरा नही बल्कि वक्त का संदेश है। बाकी कानून के दायरे में आने वाली मेरी हर जांच करा लीजिएगा।
हजरतगंज कोतवाली के जिन प्रभारी विक्रम सिंह ने मेरे खिलाफ फॉरेन फंडिग से काम करने और विदेशी ताकतों के साथ मिलकर योगी सरकार के खिलाफ साजिश करने की रिपोर्ट दर्ज की है, उन्हें भेज दीजिएगा, मेरे सारे खाते की जांच कर लेंगे और ये भी जांच कर लेंगे कि इस फॉरेन फंडिग से मैने अपनी मां के नाम अयोध्या में कोई ज़मीन तो नही खरीदी है!!!!!
सादर
अभिषेक
यूपी पुलिस का जवाब पढ़िए-

उपरोक्त जवाब पर अभिषेक की प्रतिक्रिया पढ़ें-
यूपी के डीजीपी प्रशांत कुमार की धमकी और उस पर मेरा जवाब।
“आदरणीय प्रशांत जी,
सवालों का जवाब वैधानिक कार्यवाही की धमकी नही होता है।
वैधानिक कार्यवाही की धमकी देकर सवालों को न आपके पहले कोई रोक सका है और न ही आप रोक सकेंगे।
आप एक बार फिर से खुद को “ईश्वर” का अवतार मानने वाली परंपरा पर मुहर लगा रहे हैं कि आपके और आपकी पुलिस के कृत्यों के खिलाफ कोई लिख बोल नही सकता है।
ये बेहद लाचारगी की स्थिति है कि आपके पास मेरे उठाए एक भी सवाल का जवाब नही है सिर्फ इस धमकी के कि आप वैधानिक कार्यवाही कर देंगे।
अगर आप या आपकी पुलिस वैधानिक कार्यवाही कर रही होती तो मेरे खिलाफ दर्ज हजरतगंज कोतवाली की एफआइआर न तो योगी आदित्यनाथ जी को ईश्वर घोषित किया जाता और न मुझ पर फॉरेन फंडिंग और विदेशी ताकतों का वाहियात आरोप लगाया जाता।
बाकी फिर लिख रहा हूं कि 36 एफआईआर और कर लीजिए और जो भी ताकत के अहंकार के अतिरेक में बनता हो कर लीजिए।
सवालों को रोक पाना किसी भी पुलिसिया तंत्र के बस में नहीं है।
रही बात कार्यवाही की तो कार्यवाही तो ऐसे भ्रामक जवाब लिखने वालों के खिलाफ बनती है।
अगर आपने ये खुद से लिखा है तो कानून के दायरे में आप स्वयं पर होने वाली कार्यवाही का भी विश्लेषण कर लें। मुझे लगता है कि देश की सर्वोच्च अदालत को इसका संज्ञान लेना चाहिए।
बाकी शक्ति के मद में चूर होकर आप या आपकी पुलिस जो कदम उठाना चाहे उठा सकती है, इस तरह का हास्यास्पद जवाब लिखकर खुद को एक्सपोज क्यों कर रहे हैं?
सादर
अभिषेक”
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