प्रधानमंत्री आवास योजना के लाखों लाभार्थियों से धोखाधड़ी, अफसरों ने अपनों को सौंपी घर की चाबी

Share the news

मुंबई। तीन दिनों पूर्व शिर्डी में साईबाबा मंदिर परिसर के लेंडीबाग में राज्य सरकार ने ढिंढोरा पिटते हुए 5 करोड़ रुपए खर्च कर प्रधानमंत्री आवास योजना के ढाई लाख पात्र लाभार्थियों का ई-गृह प्रवेश कराया। दस लाभार्थियों को प्रतिनिधिक के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों मकान की चाबी प्रदान की गई।

इस कार्यक्रम में सरकारी अधिकारियों ने फर्जी (अपात्र) लाभार्थियों के साथ आर्थिक संबंध बनाकर आवास योजना का लाभ दिलाया। इतना ही नहीं सरकारी जमीनों पर अपनी मनमर्जी से अतिक्रमण कर ग्राम पंचायत ने इस योजना का फायदा देकर उन्हीं लाभार्थियों को प्रधानमंत्री के हाथों से चाबी दिलाई।

नागरिकों के अपने घर का सपना हुआ चकनाचूर
इस कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2022 तक प्रत्येक बेघर को घर देने का सपना देशवासियों को दिखाया। प्रधानमंत्री के इस वाक्य ने उन नागरिकों की उम्मीदें जगाई, जो इस जीवन में खुद के मकान में अपना कदम रखने का सपना वर्षों से देख रहे हैं। उनके सपनों को चकनाचूर करते हुए अधिकारियों ने करोड़ों रुपयों की लूट की है।

एक लाभार्थी के नाम पर दो मकान
इस कार्यक्रम के दौरान नाशिक जिले के कलवण तहसील स्थित अभोना ग्राम पंचायत परिसर निवासी रत्नाबाई ढुमसे नामक महिला को आवास की चाबी प्रदान की गई। संबंधित महिला वर्तमान में अनेक वर्षो से इंदिरा घरकुल आवास योजना के बनाए गए आवास में निवास कर रही है। उसी महिला को फिर से प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभार्थी बनाकर शिर्डी में प्रधानमंत्री सामने खड़ा किया गया। जिसके लिए अशिक्षित रत्नाबाई को दो दिनों की ट्रेनिंग भी दी गई थी।

सरकार के आंखों में भी झोंकी धूल
प्रधानमंत्री आवास योजना अंतर्गत अभोणा ग्राम पंचायत ने बेघरों के नामों का पंजीकरण किया। इस दौरान रत्नाबाई ने अपना नाम दर्ज कराया। अभोणा ग्राम पंचायत के सरपंच, सदस्य व ग्रामसेवक ने अपनी सुविधा के अनुसार लाभार्थी निश्चित किए और उनके निवासी घरों को पुर्नजीवित किया। इस मकान को प्रधानमंत्री आवास योजना में दिखाकर शासन की आंखो में धूल झोंकी। रत्नाबाई को जिस जमीन पर घर दिया गया है, वह जमीन असल में राजस्व विभाग की है।

इस राज्सव विभाग की जमीन पर सालों से सरकारी बाबुओं की मिलीभगत से अतिक्रमण किया जा रहा है। ग्राम पंचायत इस जमीन को अपनी गावठण जमीन बता कर उस पर अवैध निर्माण कर रही है, ऐसे में सिर्फ लाभार्थी ही नहीं सरकार और वरिष्ठ अधिकारियों की आंखों में धूल झोंकने काम यहां के अधिकारी बड़ी बखूबी कर रहे हैं। शिर्डी के कार्यक्रम में रत्नाबाई को इसी जमीन पर मिले घर की चाबी दिला कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि अब वे मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री से भी नहीं डरते।

जांच करने की मांग
इस तरह का एक प्रकरण कार्यक्रम के दो दिनों बाद नाशिक में सामने आया है। इसके बाद सभी मामलों की पुन: जांच करने की मांग की जा रही है। आरोप लगाया जा रहा है कि, प्रशासन योजना के असली हकदारों को नजर अंदाज करते हुए अपनी दादागिरी के साथ अपने लाभार्थियों का चयन कर रहा है।

प्रधानमंत्री आवास योजना बेघरों के लिए है, इसमें धांधली हुई है। संबंधित ग्राम पंचायत की कार्य प्रणाली की जांच जरूरी है। इससे पूर्व मुख्यमंत्री के हाथों कर्जमाफी का प्रमाण पत्र लेने वाले फर्जी लाभार्थी सामने आए हैं। अब प्रधानमंत्री के कार्यक्रम में चाबी लेने वाले फर्जी (अपात्र) लाभार्थी की चर्चा से सरकार की कार्य प्रणाली पर संदेह पैदा हो रहा है। सरकार को इसका जवाब देना होगा।
राधाकृष्ण विखे-पाटील
विपक्ष नेता

यह काम स्थानीय ग्राम पंचायत का है। इस पर जिला परिषद को ध्यान देना चाहिए था। इस मामले में जमीन राजस्व विभाग की होने की बात कही जा रही है। जिसकी पूरी जांच होगी। सच्चाई सामने आने के बाद दोषियों पर कर्रवाई होगी।
– बी राधाकृष्णन, जिलाधिकारी, नाशिक

सभी दस्तावेजों की जांच करने के बाद लाभार्थी निश्चित हुए हैं। इसमें किसी प्रकार की धांधली नही हुई है। प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ही उसे लाभ दिया गया है। जिस जमीन पर उसका मकान बना है। वह खुद उसकी मालिक है। जिसका ग्रामपंचायत के आठ क्रमांक के दस्तावेज पर पंजीकरण है। इसलिए उसे फर्जी लाभार्थी कहाना उचित नहीं होगा। संबंधित जमीन गावठण की है।
डीएम बहिरम, गटविकास अधिकारी,
कलवण, नाशिक

लेखक उन्मेष गुजराथी दबंग दुनिया अखबार के मुंबई एडिशन के संपादक हैं.

भड़ास व्हाट्सअप ग्रुप ज्वाइन करें- BWG9

भड़ास का ऐसे करें भला- Donate

भड़ास वाट्सएप नंबर- 7678515849

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *