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अजमेर में ट्रेनिंग ले रहे हैं देश के प्रथम नेत्रबाधित न्यायाधीश

अजमेर : बहुत शीघ्र आप एक ऐसी अदालत देखेंगे, जिसके न्यायाधीश नेत्र बाधित होंगे। यहां इन दिनो ब्रम्हानंद शर्मा जज की ट्रेनिंग ले रहे हैं। वह देश के संभवतः पहले नेत्रबाधित न्यायाधीश बनने जा रहे हैं। उनका चयन पिछले दिनों ही राजस्थान न्यायिक सेवा में हुआ है। ब्रम्हानंद उस आखिरी बैच के हैं, जिन्हें राजस्थान लोक सेवा आयोग ने चुना है। अब राजस्थान हाईकोर्ट मजिस्ट्रेटों की भर्ती करेगा।

अजमेर : बहुत शीघ्र आप एक ऐसी अदालत देखेंगे, जिसके न्यायाधीश नेत्र बाधित होंगे। यहां इन दिनो ब्रम्हानंद शर्मा जज की ट्रेनिंग ले रहे हैं। वह देश के संभवतः पहले नेत्रबाधित न्यायाधीश बनने जा रहे हैं। उनका चयन पिछले दिनों ही राजस्थान न्यायिक सेवा में हुआ है। ब्रम्हानंद उस आखिरी बैच के हैं, जिन्हें राजस्थान लोक सेवा आयोग ने चुना है। अब राजस्थान हाईकोर्ट मजिस्ट्रेटों की भर्ती करेगा।

भीलवाड़ा जिले के आसींद के रहने वाले ब्रम्हानंद शर्मा न्यायाधीश पद के लिए चयनित होने से पहले एक साल भीलवाड़ा कलेक्ट्रेट और उसके बाद करीब सालभर सार्वजनिक निर्माण विभाग में कनिष्ठ लिपिक रहे हैं। 7 अगस्त, 1973 को जन्मे ब्रम्हानंद शर्मा आयु की दृष्टि से अपने बैच में सबसे बड़े ही नहीं, जज्बा भी सबसे अधिक रखते हैं, वह अब ये साबित करने के मोहताज नहीं हैं। 

द्वितीय श्रेणी से सेवानिवृत्त शिक्षक रामस्वरूप शर्मा के बेटे ब्रम्हानंद की ज्यादातर पढ़ाई भीलवाड़ा में हुई। समाज शास्त्र में एमए के बाद उन्होंने भीलवाड़ा के राजकीय विधि महाविद्यालय से एलएलबी भी की। ब्रम्हानंद की पढ़ाई अभी छूटी नहीं है। वे वर्द्धमान महावीर खुला विश्वविद्यालय से बिजनेस मैनेजमेंट में एलएलएम भी कर रहे हैं।

ब्रम्हानंद बताते हैं कि उनके पास एक सॉफ्टवेयर है, जिसमें लिखी या टाइप की  हुई सामग्री को स्कैन कर कम्प्यूटर में अपलोड कर दिया जाता है। सॉफ्टवेयर उस सामग्री को आवाज में बदल देता है। इस तरह वह सुनकर मुकदमे की पूरी फाइल समझ लेंगे। पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी भी तो इसी तरह की है। उनका मानना है कि भविष्य में आने वाले ई-कोर्ट उनके लिए वरदान साबित होंगे। 

ये संयोग ही कहा जाएगा कि ब्रम्हानंद शर्मा के रूप में पहले नेत्रबाधित न्यायाधीश अजमेर की उसी अदालत परिसर में हैं, जहां आजादी के पहले देश के पहले नेत्रहीन वकील मुकुट बिहारी लाल भार्गव वकालत किया करते थे। भार्गव देश की संविधान निर्मात्री सभा के एक मात्र नेत्रहीन सदस्य थे और पहली भारतीय संसद के पहले नेत्रहीन सदस्य थे। वे अजमेर के पहले लोकसभा सदस्य चुने गए थे। भार्गव ब्रिटिशकाल में हाईकोर्ट का दर्जा रखने वाली अजमेर-मेरवाड़ा यूनियन प्रोविन्स के ज्यूडिशियल कमिश्नर की अदालत, लंदन की प्रिवी कौंसिल और आजादी के बाद सुप्रीम कोर्ट में भी वकालत किए थे।  

लेखक राजेंद्र हाड़ा अजमरे के जाने-माने वकील और पत्रकार हैं. उनसे संपर्क ”राजेंद्र हाड़ा, 860/8, भगवान गंज, अजमेर- 305 001” या 09829270160 व 09549155160 या [email protected] के जरिए किया जा सकता है.

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