अभिषेक उपाध्याय-
ये अखिलेश दुबे के मामले का 9/11 है। ये एक ऐसा आरोप है जो अखिलेश दुबे के मामले में छिपे रहस्यों के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के ट्विवन टॉवर की नींव, प्लिंथ व स्लैब तीनो हिला सकता है!!
अखिलेश दुबे मामले में अखिलेश यादव का सनसनीखेज आरोप-
“मुख्यमंत्री के ऑफिस/आवास में समझौते हो रहे हैं। इस मामले में शामिल IPS पर कार्यवाही इसलिए नहीं। ये मामला इतना गंभीर है कि आप कल्पना भी नहीं कर सकते। इसमें हत्या, ब्लैकमेलिंग, फेक इनकाउंटर, IPS के मामले सब हैं…..!!”
योगी आदित्यनाथ को इस पर तो बोलना चाहिए। इस बार तो सोवियतकालीन स्कड मिसाइल सीधा-सीधा क्रेमलिन की छत पर जाकर गिर गई है!!
सुनें अखिलेश यादव का आरोप, देखें वीडियो-
उधर आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने आज डीजीपी, यूपी को पत्र भेज कर अखिलेश दुबे के सहयोगी इंस्पेक्टर सभाजीत मिश्रा द्वारा गिरफ्तारी के बाद एक आईपीएस अफसर का नाम लेकर लगाए गए आरोपों का संज्ञान लेकर समुचित कार्यवाही की मांग की है.
उन्होंने कहा कि सभाजीत मिश्रा के अनुसार वे अफसरों के आदेशों का पालन कर रहे थे. उन्होंने यह भी कहा कि क्या किसी पुलिस अफसर में उसे आईपीएस अफसर को गिरफ्तार करने की हैसियत है, जिसने अखिलेश दुबे के लिए सारे नियम और कानून तक पर रखकर काम कर आए थे, चाहे वह पिंटू सेंगर मर्डर केस से आरोपियों के नाम निकाले जाने का मामला हो या फिर वक्फ संपत्ति पर कब्जा करने का.
अमिताभ ठाकुर ने कहा कि उन्होंने पूर्व में भी एडीजी रैंक के एक आईपीएस ऑफिसर के बारे में शिकायत की थी, जिनके संबंध में शिकायतकर्ता रवि सतीजा ने डीजीपी की मौजूदगी में अखिलेश दुबे को बचाने का प्रयास किए जाने की बात कही थी.
उन्होंने डीजीपी से इन समस्त तथ्यों का संज्ञान लेकर उस आईपीएस अफसर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है.

वहीं, दूसरी तरफ इस प्रकरण में उत्तर प्रदेश में एसआईटी (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) द्वारा जारी समन और नोटिसों को लेकर क्षेत्रीय अधिकारियों के रवैये पर सवाल खड़े हो गए हैं। कई मामलों में देखा गया है कि अधिकारी एसआईटी के सामने पेश होने से बच रहे हैं और नोटिसों को हल्के में ले रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को जब भी एसआईटी ने तलब किया, उनमें से कई ने अपने स्तर पर अनुपस्थिति दर्ज कराई। इससे एसआईटी की कार्यवाही पर असर पड़ रहा है। उच्चाधिकारियों की इस अनदेखी पर डीजीपी कार्यालय को भी रिपोर्ट भेजी गई है।
कानपुर समेत कई जिलों के संवेदनशील मामलों में एसआईटी की पूछताछ अहम मानी जा रही थी। बावजूद इसके, कई अफसर नोटिस को ‘न्योता’ मानकर गंभीरता नहीं दिखा रहे। अदालत में भी इस रवैये पर सख्ती का रुख अपनाया जा सकता है।
इधर, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि एसआईटी की नोटिस की अवहेलना करना सीधा-सीधा कानून की अवमानना की श्रेणी में आता है। वहीं, राजधानी में जल्द होने वाली सुनवाई में ऐसे लापरवाह अधिकारियों का भविष्य तय हो सकता है।

साफ है कि एसआईटी की जांच और नोटिसों को हल्के में लेने की प्रवृत्ति प्रशासनिक सिस्टम में जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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subodh kumar
September 15, 2025 at 7:50 pm
Ye jungle raj nahi to kya hai?