सोशल मीडिया पर वायरल हो गई यूपी के मुख्य सचिव आलोक रंजन की क्रूर कथा

मुख्‍य सचिव आलोक रंजन को हार चाहिए, न मिले तो नकद तीस लाख रुपया दो… चोरी के आरोप में दो महीनों तक अवैध हिरासत में रखा अपने दो घरेलू नौकरों को… इसी सारे मामले से जुड़ी है लखनऊ के एसएसपी के तबादले की इंटरनल स्टोरी….

-कुमार सौवीर-

लखनऊ : यूपी के मुख्‍य सचिव आलोक रंजन ने अपने घरेलू नौकरों पर जो कहर तोड़ा है, उसने मानवता ही सहम गयी। अपनी बहू के बेशकीमती हार की चोरी पर मुख्‍य सचिव इतना गुस्‍साये कि सारे कानून-कायदों को ही धता बता दिया। वे किसी भी कीमत पर यह चाहते थे कि हार बरामद हो जाए और अगर ऐसा न हो सके तो उस हार की कीमत वसूली पुलिस अफसरों के जिम्‍मे डाली जाए। अब चूंकि लखनऊ के एसएसपी राजेश पाण्‍डेय ने ऐसा कर पाने में अपनी असमर्थता जता दी, तो आखिरकार राजेश पाण्‍डेय को दण्डित कर लखनऊ की बड़े दारोगीगिरी से ही अपमानित कर दिया गया। यह मामला अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में खासा चर्चित हो चुका है और पूरा प्रकरण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

आपको बता दें कि तीन महीने के लिए एक्‍सटेंशन पर मुख्‍य सचिव पद पर जमे आलोक रंजन के घर से विगत 28 फरवरी को एक बेशकीमती हार चोरी हो गया था। यह हार यूपी के एक बड़े उद्योगपति ने आलोक रंजन के बेटे के बहू-उत्‍सव अवसर पर भेंट किया था. लेकिन लाखों की कीमत का ये हार रिसेप्शन की रात चोरी हो गया। हीरों के इस हार के अलावा लाखों रूपए के जेवर और कैश पर भी किसी ने हाथ साफ़ कर दिया था। इस हार को बरामद करने के लिए चीफ सेक्रेटरी आलोक रंजन के दो सरकारी नौकर पुलिस ने हिरासत में लिए। ये नौकर अलोक रंजन के घर पर कई साल से काम रहे थे. सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने इन दोनों नौकरों को दो महीने तक थाने में अवैध हिरासत में रखा और यातनाएं दीं. इस के बाद भी जब हार और कैश नहीं मिला तो सोमवार को चीफ सेक्रेटरी के कहने पर लखनऊ के बडे़ दारोगा राजेश पांडेय को ही हटा दिया गया। ऐसा कहा जा रहा है कि आलोक रंजन चाहते थे कि अगर यह हार नहीं बरामद हो सकता हो तो फिर राजेश पांडेय ही उस हार के बदले पूरी नकदी का जिम्‍मा सभालें।

इंडिया संवाद न्यूज पोर्टल पर अंशुल जैन की एक रिपोर्ट छपी है जिसमें आलोक रंजन के घरेलू नौकर राजेश ने खुलासा किया कि 28-29 फरवरी को हुए रिसेप्शन के 4-5 दिन बाद उसे हार चुराये जाने के शक में पुलिस पकड़कर थाने ले आई। थाने पर उसे और एक अन्य नौकर सुशील रावत को काफी मारा-पीटा गया. यहाँ तक की दोनों को पुलिस ने सीएफएसएल लैब में लाई डिटेक्टर मशीन पर बैठा दिया. क्यूंकि दोनों ने हार चोरी नहीं किया था इसलिए वो चोरी गए हार के बारे में कुछ बता नहीं सके. पत्रकारों को पता न लग सके इसलिए दोनों नौकरों को पुलिस हज़रतगंज थाने से 20 किलोमीटर दूर बक्शी का तालाब थाने ले गई. दोनों नौकरों के खिलाफ पुलिस ने कोई रिपोर्ट तो नहीं लिखी लेकिन दो महीने तक अवैध हिरासत में ज़रूर रखा।

पुलिस सूत्रों का कहना था कि दोनों नौकर बेक़सूर थे लेकिन फिर भी चीफ सेक्रेटरी का हार बरामद करने का दबाव बढ़ता जा रहा था. इस बीच अखिलेश के पुराने मित्र रहे लखनऊ के डिप्टी एसपी अशोक वर्मा ने अखिलेश से मुलाकात की. वर्मा ने बताया कि नौकरों को बहुत ज्यादा यातनाएं देना उचित नहीं होगा क्यूंकि एक नौकर ने आत्महत्या करने तक की कोशिश की है. अखिलेश ने तब चीफ सेक्रेटरी को किनारे कर आदेश दे दिए कि नौकरों को तुरंत छोड़ दिया जाय।

लेखक कुमार सौवीर यूपी के वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार हैं.



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