अमरोहा। हिंदी पत्रकारिता दिवस के 200वें वर्ष में प्रवेश के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में वक्ताओं ने पत्रकारिता के बदलते स्वरूप, उसके मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान वरिष्ठ पत्रकार महिपाल सिंह ने कहा कि आज भले ही एकपक्षीय सोच हावी होती जा रही हो, लेकिन भारत की वास्तविक ताकत उसकी समावेशी संस्कृति में निहित है और यही समावेशिता पत्रकारिता को भी बचाए रखेगी।
उन्होंने कहा कि यह दिन केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं, बल्कि उस चेतना का प्रतीक है जिसकी शुरुआत वर्ष 1826 में हिंदी के प्रथम समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ से हुई थी। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता के इतिहास में ऐसे अनेक व्यक्तित्व हुए हैं जिन्होंने शब्दों को केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का सशक्त हथियार बनाया।
महिपाल सिंह ने स्वतंत्रता सेनानी, किसान नेता और पत्रकार विजय सिंह पथिक को याद करते हुए कहा कि उन्होंने ‘राजस्थान केसरी’ और ‘नवीन राजस्थान’ जैसे प्रकाशनों के माध्यम से पत्रकारिता को जनसरोकारों से जोड़ा। उनकी लेखनी ने ब्रिटिश शासन के खिलाफ जनचेतना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और यह साबित किया कि पत्रकारिता सत्ता की चापलूसी नहीं, बल्कि पीड़ित और वंचित वर्ग की आवाज बनने का माध्यम है।
उन्होंने वरिष्ठ पत्रकार और समाज विज्ञानी डॉ. मुस्तकीम को भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने खबरों को केवल सूचना नहीं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से देखा। प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (पीटीआई) में रहते हुए उनकी निष्पक्षता, बौद्धिक गहराई और समाज के प्रति प्रतिबद्धता पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणास्रोत है।
वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान दौर की आपाधापी वाली पत्रकारिता में विजय सिंह पथिक का साहस और डॉ. मुस्तकीम की विद्वत्ता नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने आह्वान किया कि पत्रकारिता की शुचिता, निष्पक्षता और लोकहित के मूल्यों को बनाए रखने का संकल्प लिया जाए।
कार्यक्रम को डॉ. महताब अमरोहवी, डॉ. महेंद्र सिंह मौर्य, नरेश सिंह सागर, विनीत अग्रवाल, इमरान अहमद अंसारी, मनोज कुमार, आनंद चौहान, सतपाल सिंह मान, एहसान अहमद, इकबाल हैदर और नवाब सिद्दीकी सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। कार्यक्रम में पत्रकारिता के आदर्शों को मजबूत बनाने और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का संकल्प भी दोहराया गया।



