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साहित्य

अनामिका यूँ ही नहीं बना जा सकता है!

अणु शक्ति सिंह-

अनामिका यूँ ही नहीं बना जा सकता है। अनामिका जी का अनूठापन उनके विस्तृत अध्ययन में है। उनकी सौम्यता में है। उनके निश्छल प्रेम में है।

उनके जैसा उनकी भंगिमाओं की नक़ल उतार कर नहीं बना जा सकता है। उनके जितना पढ़-समझ कर ही सम्भव है यह। यह पढ़ना किताबों के साथ-साथ, दुनिया को भी जानना है।

सबको अनामिका जी जैसा बनना है। उन्हीं सबको जिन्हें पढ़ कर लिखना मौलिकता का हनन लगता है। मुझे यह बात ही हतप्रभ करती है, बिना पढ़े-जाने लोग लेखक कैसे बनना चाहते हैं। ऐसा सोचने वालों को अनामिका जी को सुनना चाहिए, हर पंक्ति से विस्तृत अध्ययन टपकता है।

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