दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को संकेत दिया कि एशियन न्यूज़ इंटरनेशनल (ANI) और OpenAI Inc. के बीच चल रहे कॉपीराइट उल्लंघन मामले में पक्षकारों की ओर से किए गए सबमिशन पर “अनावश्यक रिपोर्टिंग” नहीं होगी।
यह मामला ANI द्वारा OpenAI पर उसके मूल समाचार सामग्री के अनधिकृत उपयोग के आरोपों को लेकर दर्ज किया गया है।
सुनवाई की प्रमुख बातें:
OpenAI की ओर से सीनियर एडवोकेट अमित सिब्बल ने हाईकोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया कि मामले में फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स और अन्य द्वारा दायर हस्तक्षेप याचिका और OpenAI की प्रतिक्रिया से जुड़ी खबरें मीडिया में प्रकाशित की गई हैं।
इस पर न्यायमूर्ति अमित बंसल ने टिप्पणी की, “कम से कम पक्षकारों के सबमिशन पर अनावश्यक रिपोर्टिंग न हो।”
फेडरेशन की याचिका पर सवाल:
सिब्बल ने फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका का विरोध करते हुए कहा कि उनके पास इस मामले में दखल देने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि याचिका के लिए फेडरेशन के सदस्यों से कोई अधिकारिक मंजूरी नहीं ली गई है।
उन्होंने कहा कि OpenAI की प्रतिक्रिया और फेडरेशन की याचिका को मीडिया में जारी करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
एएनआई का पक्ष:
ANI की ओर से एडवोकेट सिद्धांत कुमार ने कहा कि कॉपीराइट धारकों के मुद्दे में विभिन्न दृष्टिकोणों का होना जरूरी है।
OpenAI की आपत्तियां:
OpenAI ने दिल्ली हाईकोर्ट की क्षेत्रीय अधिकारिता (टेरिटोरियल जुरिस्डिक्शन) पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनके उपयोग की शर्तों के अनुसार विवाद का निपटारा कैलिफोर्निया के कोर्ट में होना चाहिए।
लाइव लॉ के अनुसार हाईकोर्ट ने दोनों हस्तक्षेप याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए OpenAI को दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि यदि हस्तक्षेप याचिकाएं स्वीकार की जाती हैं, तो इनका दायरा केवल कानूनी मुद्दों तक सीमित रहेगा। मामले की अगली सुनवाई 21 फरवरी, 11 मार्च और 18 मार्च को दोपहर 2:30 बजे होगी।
मामले का महत्व:
ANI ने आरोप लगाया है कि OpenAI द्वारा विकसित चैटजीपीटी उसके समाचार कंटेंट को वास्तविक समय में उपयोगकर्ताओं को उपलब्ध कराता है, जिससे इसका व्यावसायिक लाभ उठाया जा रहा है।
ANI का यह भी दावा है कि चैटजीपीटी उनकी सामग्री के गलत और काल्पनिक संस्करण प्रस्तुत करता है, जिसे “हैलूसिनेशन” कहा जाता है। यह फेक न्यूज फैलाने और एजेंसी की साख को नुकसान पहुंचाने का कारण बन सकता है।
यह मामला भारत में चैटजीपीटी के खिलाफ दर्ज पहला मुकदमा है, जो कॉपीराइट कानून और एआई के दायरे में अहम कानूनी मिसाल बनने की क्षमता रखता है।
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