टीवी न्यूज़ इंडस्ट्री में रिपब्लिक टीवी के सर्वेसर्वा अर्नब गोस्वामी इन दिनों जितने चर्चा में हैं उतनी ही चर्चा उनकी पत्रकारिता के बदले हुए एंगल की भी हो रही है। लोग दाँतों तले उंगली दबाकर उन्हें सुन और देख रहे हैं। लेकिन अर्नब गोस्वामी के हृदय परिवर्तन के पीछे एक दूसरी कहानी भी है।
सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक मिनट 33 सेकंड का एक वीडियो घूम रहा है। इस वीडियो में अर्नब और रिपब्लिक भारत की घटती अर्निंग पर बात की जा रही है। वीडियो में अर्नब की कंपनी के तीन साल के डाटा का विश्लेषण किया गया है। कहा गया है कि पिछले तीन साल में अर्नब की मीडिया कंपनी के रेवेन्यू में भारी गिरावट आई है।
इसके अलावा कंपनी का प्रॉफिट भी डिक्लाइन हुआ है। कंपनी के पास पैसे न होने की बात भी कही गई है। कारण है कि हिंदी और इंग्लिश के न्यूज चैनलों को टीआरपी मिल नहीं रही है।
दर्शकों को लेकर कहा गया कि उन्हें पता है कि अधिकतर न्यूज चैनल प्रो मोदी हो गए हैं। दर्शकों को टीवी खोलते ही पता लग जाता है कि एंकर्स का स्टैंड क्या होगा।
वीडियो में एनडीटीवी का भी जिक्र है। जो दर्शकों के पक्ष में और सरकार से सवाल करने के लिए मशहूर था। एनडीटीवी को अडानी ने खरीद लिया। जिसके बाद अब एक भी न्यूज चैनल ऐसा नहीं है जो एंटी गवर्नमेंट हो।
ऐसी आवाजें जो सरकार से सवाल करती थीं, वह सभी एक-एक कर यूट्यूब पर शिफ्ट हो गईं। और जो लोग यूट्यूब पर शिफ्ट हुए हैं चाहें वो रवीश कुमार हों या देशभक्त हों, 4पीएम हो कोई और.. इन सभी चैनलों का टीवी न्यूज के यूट्यूब चैनलों की अपेक्षा रेटिंग बहुत हाई है। और तो और व्यक्तिगत न्यूज चैनलों का रेवेन्यू कभी कभी न्यूज चैनलों के यूट्यूब के बराबर रेवेन्यू हो जा रहा है।
अब अर्नब को यही एक उम्मीद दिखती है जहां से वे पैसे बना सकते हैं। यही एक स्पेस है जो खाली है कि कोई भी एंटी गवर्नमेंट चैनल नहीं है। यही कारण रहा कि अर्नब ने हाल ही में जो दो मुद्दे उठाए अरावली और कुलदीप सेंगर.. उसका उन्हें तुरंत फायदा भी मिला। रिपब्लिक चैनल और यूट्यूब दोनों जगह एंगेजमेंट बढ़ा है, टीआरपी भी इनक्रीज हुई है।
वीडियो में कहा गया है कि अर्नब बेहद चालाकी से खेल रहे हैं। क्योंकि सभी चैनल प्रो मोदी हैं और ऐसे वक्त में अर्नब एंटी मोदी या एंटी गवर्नमेंट अपनी मार्केट बना रहे हैं। और यह कोई अचानक नहीं हुआ है अर्नब प्योरली बिनेस माइंड आगे बढ़ रहे हैं।
यह वीडियो देखें…
अर्नब गोस्वामी के हृदय परिवर्तन (सत्ता से सवाल पूछने वाली पत्रकारिता करना) का राज क्या है?
अर्नब ने सत्ता से सवाल पूछना शुरू किया तो सुधीर चौधरी ने मजा लेते हुए इशारे में कह दिया – अर्नब ने पार्टी बदल ली!
(संदर्भ – odd even वाली टिप्पणी)
मतलब सुधीर चौधरी के लिए पत्रकारिता सत्ता या विपक्ष की गोद में बैठना है।
वहीं एक खुलासा आया है कि अर्नब गोस्वामी की कंपनी बहुत घाटे में चली गई है, उन्हें मोटा माल चाहिए। इसलिए मोदी सरकार को ब्लैकमेल कर रहे हैं, सच्ची पत्रकारिता करके!
सच्चाई क्या है भगवान जानें!
-यशवंत सिंह



