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शब्दचर्चा (पार्ट-37) : अरुंधति या अरुंधती? रॉय या राय?

बुकर पुरस्कार विजेता Arundhati Roy पिछले दिनों दो कारणों से चर्चा में रहीं। पहला कारण यह कि क़रीब एक माह पहले जम्मू-कश्मीर सरकार ने जिन 25 किताबों पर प्रतिबंध लगाया था, उनमें उनकी किताब ‘आज़ादी’ भी शामिल थी। चर्चा का दूसरा कारण उनकी नई किताब (Mother Mary comes to me) रही जो हाल ही में बाज़ार में आई है।

उनकी नई किताब की ख़बर तो हिंदी मीडिया में कम ही छपी लेकिन प्रतिबंध वाली ख़बर प्रायः हर वेबसाइट पर आई लेकिन उनमें Arundhati Roy का नाम दो तरह से लिखा हुआ मिला।

बीबीसी से लेकर भास्कर, जागरण से लेकर अमर उजाला तक तक़रीबन सभी ने उनका नाम अरुंधति लिखा है। केवल नवभारत टाइम्स और One India Hindi में मुझे अरुंधती दिखा।

Roy को भी ज़्यादातर साइटों ने ‘रॉय’ लिखा लेकिन भास्कर और पत्रिका में मुझे ‘राय’ भी नज़र आया। आज की शब्दचर्चा 37 में हम जानेंगे कि इस मशहूर लेखिका के नाम की सही स्पेलिंग क्या होनी चाहिए।

अरुंधती संस्कृत का शब्द है इसलिए इस नाम की सही वर्तनी हमें संस्कृत या हिंदी के शब्दकोश में आसानी से मिल सकती है। मिली भी। वहाँ है अरुंधती। किसी भी शब्दकोश में मुझे अरुंधति नहीं मिला।

हिंदी शब्दसागर में अरुंधती के ये अर्थ मिले।

  • वशिष्ठ मुनि की स्त्री।
  • दक्ष की कन्या जो धर्म से ब्याही गई थी।
  • एक बहुत छोटा तारा जो सप्तर्षि मंडल में वशिष्ठ के पास उगता है।
  • तंत्र के अनुसार जिह्वा।

यानी सही है अरुंधती। मगर हैरत की बात यह है कि अरुंधती की किताबों का जो हिंदी अनुवाद हुआ है, उनमें भी अधिकतर में उनका नाम अरुंधति ही छपा है (देखें चित्र)। यह इसलिए चौंकाता है कि अनुवादकों, ख़ासकर साहित्यिक और आलोचनात्मक किताबों के अनुवादकों से उम्मीद की जाती है कि उनका हिंदी ज्ञान बेहतर होगा लेकिन मंगलेश डबराल से लेकर नीलाभ तक सभी ने अपने अनुवादों में अरुंधति लिखा है!

केवल प्रियदर्शन और आलोक राय द्वारा अनूदित किताबों में अरुंधती छपा है। यह बताता है कि शाब्दिक शुद्धता के बारे में जो ‘उदासीनता’ हिंदी पत्रकारिता में है, वही हिंदी साहित्य में भी नज़र आती है।

अब आते हैं सरनेम पर। Roy को रॉय लिखा जाए या राय? चूँकि ROY में O है, इसलिए अंग्रेज़ी में तो इसे रॉय ही पढ़ा जाएगा लेकिन हिंदी में क्या लिखा जाए?

यह सवाल इसलिए उठता है कि नामों की रोमन वर्तनी अक्सर धोखा दे जाती हैं। सत्यजित राय का नाम अंग्रेज़ी में Satyajit Ray लिखा जाता है लेकिन बांग्ला में उनका सरनेम ‘रे’ नहीं, ‘राय’ बोला और लिखा जाता है। इसी तरह सौरभ गांगुली की रोमन स्पेलिंग Saurav है, लेकिन उनका नाम ‘सौरव’ नहीं, ‘सौरभ’ है और बांग्ला में यही लिखा और बोला जाता है।

इसलिए Arundhati Roy के सरनेम को कैसे लिखा जाए, इसका पता लगाने के लिए भी हमें उनके नाम की बांग्ला और मलयालम स्पेलिंग्ज़ देखनी होगी। बांग्ला इसलिए कि यह सरनेम उन्हें अपने बंगाली पिता से मिला है और मलयालम इसलिए कि अरुंधती की माँ मलयाली थीं और दो वर्ष की आयु से यानी माता-पिता में तलाक़ के बाद से वह अपनी माँ के साथ ही रह रही थीं।

मैंने पाया कि बांग्ला के अख़बारों और वेबसाइटों में उनका नाम अरुंधती राय (অরুন্ধতী রায়) लिखा जा रहा है। बांग्ला में अनूदित उनकी किताबों में भी अरुंधती राय (অরুন্ধতী রায়) ही मिला।

लेकिन मलयाली अनुवादों में उनका सरनेम राय नहीं, रॉय (അരുന്ധതി റോയ്) लिखा जाता है।

इसलिए इस मामले में फ़ैसला करना मुश्किल है कि अरुंधती राय लिखा जाए या अरुंधती रॉय। अगर यह मालूम हो जाए कि अरुंधती स्वयं क्या बोलती हैं, तभी हम किसी निर्णय पर पहुँच सकते हैं।

जाते-जाते एक रोचक बात बता दूँ। अरुंधती का अर्थ होता है, वह स्त्री जो प्रतिरोध न करे। लेकिन अरुंधती राय/रॉय तो विरोध और प्रतिरोध का ही दूसरा नाम हैं। अपने नाम के बिल्कुल उलट।

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