पत्रकार अतुल अग्रवाल का मामला एक्स्ट्रा मेरिटल अफ़ेयर से जुड़ा हुआ है!

श्याम मीरा सिंह-

जितना मोटा-माटी समझा हूँ, जितनी पुलिस की कहानी पढ़ी है.. उस हिसाब से पत्रकार अतुल अग्रवाल का मामला एक्स्ट्रा मेरिटल अफ़ेयर से जुड़ा हुआ है. कोई भी पार्टनर इस तरह की खबर लगने के बाद बहुत नॉर्मल नहीं रह पाता. अतुल के लिए नहीं मालूम लेकिन उनकी पत्नी के लिए ज़रूर ये “रहस्योद्घाटन” मुश्किल कर रहा होगा.

आपमें से बहुतों को उनकी पत्रकारिता के ढंग से आपत्ति रही होगी, लेकिन पति के किसी काम के लिए पत्नी को टार्गेट करने का Idea बहुत प्रगतिशील और तार्किक नहीं है. रही बात अतुल की तो उन्हें ओयो जाने का, बाक़ी जगहों पर जाने का पूरा हक़ है. जैसे आपको और हमको है.

इस देश में ही नहीं पूरी दुनिया में विवाहेत्तर संबंध बहुप्रचलित हैं, चूँकि इसे समाज में सामूहिक स्वीकृति नहीं है इसलिए जिसका इस बात से रहस्य उठ जाता है वो “कमतर” और बाक़ी मज़े लेने वाले चरित्रिक रूप से “उच्चतर” बन जाते हैं… तर्क ये भी हो सकते हैं कि उसने पुलिस की झूठी कहानी बुनी. इसलिए आलोचना क्यों नहीं की जानी चाहिए….

इससे सहमति है पूरी, आलोचना ही नहीं IPC की धाराओं के तहत तय सजा भी मिलनी चाहिए. मगर पुलिस की आड़ में किसी के विवाहेत्तर संबंधों को अपनी “चर्चाओं” का खाद-पानी बनाने का हक़ आपको नहीं है. ओयो, एक्स्ट्रा मेरिटल अफ़ेयर्स, चित्रा त्रिपाठी… इन विषयों में से ऐसा कोई विषय नहीं है जहां अगर ढंग से स्क्रूटनी हो तो आप भी वहीं कहीं आसपास मिल जाएँ..

पंकज श्रीवास्तव-

पत्नी का डर देखिये क्या-क्या करा देता है। मशहूर एंकर चित्रा त्रिपाठी के पति अतुल अग्रवाल एक चैनल के मालिक हैं। पिछले दिनों अपने संग नोएडा में हुई लूट पर एक बड़ी पोस्ट लिखी थी।

नोएडा पुलिस ने कैमरा फुटेज और अन्य सबूतों के साथ खुलासा किया है कि पूरी अतुल की पूरी कहानी फर्जी है और अंदर की कहानी ये है कि जनाब अपने एक महिला मित्र के साथ ओयो रूम्स का मजा ले रहें थे। घर देर से पहुँचे और पूरी मन गढंत कहानी व्यक्त कर दिया।

कहानी में जान डालने के लिए पोस्ट लिखकर यूपी के कानून व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया। अब इस झूठ का क्या अंजाम होगा ये दुसरी बात है। इस बीच बाबा रामदेव की फर्म ने इन पर हरिद्वार में एक एफआईआर दर्ज कराई है ब्लैकमेलिंग और ऑफिस में आकर धमकाने की क्योंकि इनके चैनल को पतंजली ने विज्ञापन देना बंद कर दिया है।

बीना सह्याद्रि-

झूठ एक ‘मर्द’ ने गढ़ा, सोशल मीडिया पर पोस्ट एक ‘मर्द’ ने किया; अपनी निजी करतूतों को कवर करने की हल्की कहानी गढ़ पुलिस और दूसरों को गुमराह करने की कोशिश एक ‘मर्द’ ने की।

सो उसके कांड की व्याख्या उसकी घरेलू हिंसा का शिकार एक औरत और अलग रह रही उसकी ‘पत्नी’ का नाम जोड़कर चटपटे ढंग से करना एक बीमार सोच व विक्षिप्त मर्दवाद को जाहिर करता है।

2016 से दोनों अलग रह रहे हैं, अलग काम कर रहे हैं। जिसने यह कांड किया है वो खुद सेलेब्रिटी है। फिर अगले का नाम जोड़कर मसाला लगाकर उसे प्रचारित प्रसारित करने की जरूरत क्या है? दोनों दो अलग शख्सियत हैं, समझने वालों को यह समझना चाहिए।

तो कथित प्रगतिवादी अपनी मिसोजिनी के कचरे को अपने तक सीमित रखें और अपनी सोच पर पड़े जालों को साफ़ करने का महानतम कष्ट उठा लें। बाक़ी ठहरे हुए पानी सरीखे रूढ़िवादी, मेरे लिए टोटल होपलेस केस हैं, वो खुद भाड़ में दफ़ा हो सकते हैं।

प्रशांत सिंह-

यूपी पुलिस केवल कहानी लिखना ही नहीं बल्कि मनगढ़ंत कहानियों का भंडाफोड़ करने की कला में भी पारंगत है। बताइए… न तो कोई कम्पलेन, न ही किसी तरह का दबाव। फिर भी जांच हुई और सब छीछालेदर हो गया।

चित्रा त्रिपाठी पर कोई सवाल नहीं उठा रहा, सवाल अतुल पर है। सवाल भी उनके हिंदी पत्रकार होने के हैसियत से है। इतनी मनगढ़ंत कहानी लिखनी ही है तो फिक्शन लिखें न कि पत्रकारिता पर धब्बा। सोशल मीडिया पर जिस तरह से उन्होंने फर्जी कहानी लिखी, वो रूह कंपाने वाली थी, पर अब बात फर्जी निकली है तो सवाल उठना लाजमी है।

अधिकतर पत्रकार उसी नोएडा के इर्दगिर्द रहते हैं, ऐसी कहानियां सुनने के बाद उनके भी मन में डर पैदा होगा। शाम होते ही बाहर जाने से डरेंगे, आम इंसान की बात ही छोड़ दीजिए। बाकी जिस लहजे से अतुल ने उन लड़कों का जिक्र किया, साफ मालूम चल रहा था कि जाट-गुर्जर की ओर इशारा है। अब ऐसी कहानियां पढ़कर हम आप भी इन दोनों जातियों को लेकर भला बुरा कहेंगे, देखते ही शक की निगाह से देखने लगेंगे। लुटेरा हत्यारा न जाने क्या क्या!

बाकी अतुल की गलतियों का खामियाजा हिंदी पत्रकारिता क्यूं भुगते? बंद कर दे खुद को पत्रकार कहना और बनिया एंकर बताना, कोई सिंगल सवाल नहीं पूछेगा।

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One comment on “पत्रकार अतुल अग्रवाल का मामला एक्स्ट्रा मेरिटल अफ़ेयर से जुड़ा हुआ है!”

  • naveen sinha says:

    लोग खुलेआम त्रिपाठी जी का नाम लिख रहे हैं ,भड़ास ने भी नाम छाप दिया ,किसी की निजता को यूँ खराब नही करना चाहिए ,जिन्हें नही पता अग्रवाल की पत्नी कौन है उनको सार्बजनिक रूप से क्यों बताया जा रहा हैं,दूसरी बात अगर अतुल पत्नी से लड़ अकेले ओयो में रुका हो तो ? मुझे किसी की पत्नी का नाम सीधे सीधे छापने से आपत्ति है

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