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सुख-दुख

कल जब बेंगलुरु पुलिस अतुल के घर पहुंची तो शरीर फंदे से लटका मिला और दीवारों पर लिखा था- JUSTICE IS DUE!

विवेक के त्रिपाठी-

“मेरा नाम अतुल सुभाष है. बेंगलुरु में रहता हूं और आज मैं सुसाइड कमिट करने जा रहा हूं.. कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देना मेरी अस्थियों को.”

“मेरे मरे हुए शरीर के आसपास मेरी पत्नी और उसके परिवार का कोई नहीं आना चाहिए..”

“मेरा अस्थि विसर्जन तब तक नहीं होना चाहिए जब तक मेरे हर आरोपी को सजा नहीं मिलती..”

“इतने सारे एविडेंस.. सब कुछ होने के बाद भी अगर कोर्ट जज और बाकी के आरोपियों को सजा नहीं देती है तो मेरी अस्थियां वहीं कोर्ट के बाहर किसी गटर में बहा देनी चाहिए.. ताकि मैं जान जाऊं कि इस देश में क्या वैल्यू है एक लाइफ की..”

बेंगलुरु में रहने वाले यूपी के अतुल सुभाष के फांसी पर लटकने से पहले बनाया वीडियो और उसकी दर्दनाक कहानी आज सबको व्यथित कर रही है.. अतुल महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में डीजीएम के पद पर काम करते थे.

मात्र 34 साल की उम्र थी.. अच्छा खासा पैकेज था.. लेकिन पत्नी निकिता सिंघानिया ने जीवन नर्क बना दिया था. ऐसा नर्क कि अतुल के पास मरने के अलावा कोई और रास्ता बाकी नहीं रह गया था.. जरा सोचिए, कोई व्यक्ति अपने ही देश की कानून व्यवस्था से.. पुलिस से.. अदालतों से.. सिस्टम से.. इस हद तक निराश हो गया कि आखिरी इच्छा में कह रहा, “अगर न्याय न मिले तो मेरी अस्थियां कोर्ट के बाहर ही गटर में बहा देना..”

शर्म है हम सबके लिए.. अतुल कितने मानसिक दबाव में रहा होगा. ये समाज कितना गैर जिम्मेदार और अमानवीय है जो अतुल की पीड़ा, निराशा, त्रासदी को समझ नहीं सका!!

अतुल पिछले तीन दिन से अपनी जीवन लीला खत्म करने के बारे में सोच रहा था. उसकी पत्नी निकिता जौनपुर की है. 5 साल पहले ही दोनों की शादी हुई थी. शादी के कुछ दिन बाद ही निकिता उसे छोड़कर जौनपुर लौट आई और वहां उसके खिलाफ दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा समेत तमाम धाराओं के कई मुकदमे दर्ज करा दिए.. 2 साल के भीतर कोर्ट की 120 तारीखें लगीं, जिसमें से 40 तारीखों पर अतुल बेंगलुरु से जौनपुर आ चुका था..

निकिता उसे सुसाइड के लिए उकसाती थी. मरने से पहले अतुल ने कहा कि निकिता तलाक के बदले हर महीने 2 लाख रुपए गुजारा भत्ता मांग रही थी. मेरे बच्चों को उसने छीन लिया था..

अतुल का आरोप है कि जौनपुर की फैमिली कोर्ट की जज रीता कौशिक ने भी उसे परेशान किया.. जज रीता कौशिक उस पर 3 करोड़ रुपए की एलिमनी देने का दबाव बना रही थी.. अतुल जब कोर्ट जाता था तो पेशकार रिश्वत मांगता था. अतुल के रिश्वत देने से इनकार करने पर उसके खिलाफ हर महीने 80 हजार रुपए मेंटिनेंस देने का आदेश जारी कर दिया गया..

अतुल ने 40 पन्ने का सुसाइड नोट लिखा है जिसमें अपनी मौत का जिम्मेदार पत्नी निकिता सिंघानिया, सास निशा, साले अनुराग सिंघानिया उर्फ पीयूष और चचेरे ससुर सुशील सिंघानिया को दोषी ठहराया है..

उसने मरने से पहले बनाए गए वीडियो में कहा, खुद को खत्म कर लेना ही बेस्ट है क्योंकि मैं जो पैसा कमा रहा हूं उसी से अपने दुश्मन को बलवान बना रहा हूं.. मेरा पैसा मुझे ही बर्बाद करने के लिए इस्तेमाल हो रहा है.. मेरे ही टैक्स के पैसे से ये पुलिस, ये कोर्ट, ये सिस्टम मुझे और मेरी फैमिली और बाकी लोगों को भी हैरेस करेगा.. तो जो सप्लाई है वैल्यू का, उसी को खत्म कर देना चाहिए..

कल जब बेंगलुरु पुलिस अतुल के घर पहुंची तो दरवाजा बंद था. दरवाजा तोड़कर पुलिस भीतर घुसी तो अतुल का शरीर फंदे से लटका मिला. कमरे की दीवारों पर लिखा था.. JUSTICE IS DUE.. यानि न्याय अभी बाकी है..

अतुल को न्याय मिलना ही चाहिए..

फैमिली कोर्ट की जज और निकिता समेत सभी आरोपियों की गिरफ्तारी होनी चाहिए..


शिवानी साहू-

अतुल सुभाष की मौत और उसके कारणों को पढ़कर दिमाग शून्य सा हो गया। पत्नी के साथ महिला जज ने जो बर्ताव किया वह बत्तमीजी है। आखिर जज ही ऐसा करे तो कोई न्याय की उम्मीद लिए कहा जाएगा? उस जज की एक लाइन मुझे परेशान कर रही, अतुल इतना कमाते हो तुम, 5 लाख मैं लूंगी, केस सेटल करवा दूंगी।

क्या यह किसी जज की भाषा हो सकती है? पत्नी के साथ इन महिला जज को भी सजा मिलनी चाहिए। यह इनसे न्याय की उम्मीद करना बेईमानी है।

परिवार की यह फोटो भावुक करने वाली है।

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