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सुख-दुख

मैं अवनीश दीक्षित को अच्छा पत्रकार मानता हूँ, उन्हें न्याय मिलना चाहिए!

आनंद मिश्रा-

कानपुर में एक ईमानदार पत्रकार अवनीश दीक्षित को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है। यह बात मैं इसलिए कह रहा हूं कि मैंने ईटीवी और भारत समाचार में अवनीश दीक्षित के साथ काफी लंबा समय बिताया है।

करीब 8-10 साल की पत्रकारिता में मैंने अवनीश दीक्षित को बहुत अच्छे से देखा और समझा है। हर व्यक्ति पैसे कमाने और अमीर बनने की इच्छा रखता है। ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो गरीब रहना चाहता हो। मैं यह मान सकता हूं कि पैसा कमाने के लिए व्यक्ति थोड़ा बहुत इधर-उधर हो सकता है लेकिन कोई माफिया होकर, डकैत हो ऐसा वह नहीं कर सकता है।

अवनीश दीक्षित भी कानपुर के अच्छे पत्रकारों में आते हैं और लंबे समय तक समाज में हर वर्ग के लिए काम किया है। पत्रकार कोई एक वर्ग के लिए काम नहीं करता है। प्रेस क्लब के अध्यक्ष रहे हैं और कानपुर में सम्मानित व्यक्ति के तौर पर जाने जाते हैं इसलिए मेरा यह मानना है कि सरकार को और पुलिस को पूरी जांच पड़ताल करने के बाद ही कोई कार्यवाही करनी चाहिए। हो सकता है कोई पक्ष गलत जानकारी किसी अधिकारी को सरकार को नेता को दे रहा हो।

न्याय हमेशा जांच पूर्ण करने के बाद ही माना जाता है। लखनऊ में पत्रकार चुनाव लड़ रहे हैं लगातार मैदान में हैं लेकिन एक भी पत्रकार न्याय के लिए आगे नहीं आ रहा है। कौन सा पत्रकार संगठन कौन सा पत्रकार चला रहा है, यह भी देखना होगा। पत्रकारों के लिए कम से काम आगे तो आइये।


ज्ञानेन्द्र शुक्ला-

कानपुर प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अवनीश दीक्षित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। रात ढाई बजे मेडिकल हुआ। रात में ही मजिस्ट्रेट को जगाकर विधिक औपचारिकताएं पूरी करके सुबह पांच बजे जेल भेज दिया गया।

आज से डेढ़ दशक पहले जब मैं ईटीवी में कार्यरत था तब अवनीश हमारे कानपुर के रिपोर्टर हुआ करते थे, तेजतर्रार छवि के अवनीश अच्छे क्राईम रिपोर्टर थे। भले ही बीते कई वर्षों से अवनीश से अधिक संपर्क नहीं रहा पर किसी के साथ काम करके उसके बारे में काफी कुछ पता जरूर चल जाता है।

अवनीश पर दबंगई-बहस करने के आरोप तो समझ में आ सकते हैं पर कानपुर पुलिस ने डकैती का जो आरोप लगाया है वो समझ से कतई परे है, तार्किक तौर से भी उचित नहीं प्रतीत हो रहा है। क्योंकि क्राईम रिपोर्टिंग से जुड़ा कोई भी पत्रकार ऐसी किसी गतिविधि में शामिल होने से बचेगा जो उसके लिए कानूनी तौर से मुश्किलें पेश कर सकती हैं, अपवाद के तौर पर भी ऐसा हो पाना मुश्किल है।

कानपुर के प्रेस रिपोर्टर्स ने बताया कि जिस वक्त पुलिस कथित डकैती की बात कह रही है उस वक्त अवनीश अपने घर पर थे, घर से निकलने का सीसीटीवी फुटेज भी मौजूद है। कानपुर के सिविल लाइंस में हडर्ड चौराहे के पास ईसाई मिशनरी की एक हजार करोड़ से अधिक कीमत की खाली जमीन है, इसी पर कब्जा करने का आरोप अवनीश पर लगाया गया है। पर कानून का थोड़ा सा भी जानकर जानता होगा कि अल्पसंख्यक समुदाय और खासतौर से ईसाई समुदाय की प्रापर्टी पर गैर ईसाई का काबिज हो पाना असंभव ही है।

अवनीश इस बात को भलीभांत जानते होंगे, ऐसे में कब्जा करने का आरोप गले उतरना मुश्किल है। अवनीश के पक्ष में पहुंचे पत्रकारों का आरोप है कि इस मामले में एक मुकदमा लेखपाल से लिखवाया गया लेकिन उसमें कोई खास अपराधिक मामला बनता नही दिखा तो एक पक्ष से जबरन तहरीर लेकर दूसरा मुकदमा डकैती आदि का लिख दिया गया। मुकदमे में दर्जनों लोगों पर केस हैं लेकिन गिरफ्तारी अकेले अवनीश दीक्षित की गई।

पुलिस की थ्योरी को ही सच माने तो ये मामला आर्थिक पहलू से जुड़ा तो बन सकता है पर जिस तरह से किसी भयावह आतंकवादी के मानिंद अवनीश को रात में गिरफ्तार करके रात में ही जेल भेजने पर पुलिस ने मशक्कत की ये कवायद गंभीर सवाल उठाने के लिए काफी है। इस

मामले में किसी विदेशी दूतावास और ईसाई समुदाय से जुड़े कुछ बड़े संगठनों के दबाव की बात भी सामने आ रही है। बेहतर होगा कि पुलिस गोलमोल करने के बजाए तथ्यों के साथ अवनीश की गिरफ्तारी की असल वजह-रात में जेल भेजने की जल्दबाजी पर जवाब दे। वरना यही आरोप सच माने जाएंगें कि किसी निजी अदावत-निजी अहं के चलते प्रेसक्लब के पूर्व अध्यक्ष पर कार्रवाई का कहर ढाया गया!!!

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