
संजय कुमार सिंह
लद्दाख में एलएसी पर डिसएंगेजमेंट और गश्ती शुरू होने की सूत्रों की खबर और प्रचार के बाद आज चीन से संबंध पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के हवाले से कुछ कहा गया है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इसे राजनाथ आज अरुणाचल जायेंगे शीर्षक से छापा है। खबर के अनुसार रक्षा मंत्री आज अरुणाचल प्रदेश के तवांग में रहेंगे। यह भारत और चीन के बीच टकराव का एक प्रमुख बिन्दु है और चीन इसे दक्षिण तिब्बत का भाग होने का दावा करता है। 9 दिसंबर 2022 को चीनी सैनिकों ने एलएसी पार करने की कोशिश की थी जिससे एक अहम झड़प हुई थी। रक्षा मंत्री के आज वहां होने के अपने मायने हैं। संभव है, वह सब बाद में समझ में आये। फिलहाल गश्ती शुरू होने की खबर अब पक्की है। तारीख पहले बताई जा चुकी है और वह निकल गई है। इंटरनेट पर उपलब्ध खबरों के अनुसार 25 अक्तूबर को कहा गया था कि 28-29 तक शुरू हो जायेगी। बाद में अक्तूबर अंत भी कहा गया था। आज भारतशक्ति डॉट इन की खबर है कि अगले हफ्ते शुरू होगी। अगला हफ्ता 4 नवंबर से शुरू होगा। इस बीच झारखंड और महाराष्ट्र में चुनाव प्रचार जारी है। सरकार की योग्यता, क्षमता और उपलब्धियों का प्रचार होता रहा है और मैं इस बारे में यहां लिखता रहा हूं।
आज टाइम्स ऑफ इंडिया की लीड का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होता, भारत 4.5 साल बाद डेमचोक, देपसांग में गश्ती शुरू करेगा। बेशक, यह बड़ी बात है और इसीलिए लीड है लेकिन इसमें यह नहीं बताया गया है कि गश्ती कब शुरू होगी। साढ़े चाल साल क्या हुआ वह कब कितना बताया गया आप जानते हैं। फिर भी कई दिनों से सूत्रों के हवाले डिसएंगेजमेंट और गश्ती शुरू होने की खबर (प्रचार) के बाद जब तारीख निकल गई तो भी साढ़े चार साल बाद का हवाला है और प्रचार के दूसरे तत्व भी। शिखर के एक रक्षा सूत्र के हवाले से इस खबर में बताया गया है कि डेमचोक का हवाई वेरीफिकेशन बुधवार को पूरा हो गया और इसमें एक दिन की देरी खराब मौसम के कारण हुई। टाइम्स ऑफ इंडिया की इस खबर का इंट्रो है, सेनाओं ने डिसएंगेजमेंट (अलग होने) और वेरीफिकेशन (जांच, पुष्टि) का काम पूरा कर लिया। जब इसकी शुरुआत की खबर थी तो बताया गया था कि गश्ती कब शुरू होगी। अब जब यह पूरा हो चुका है तो आज की खबर है, 10 दिन चले एंगेजमेंट और वेरीफिकेशन के बगैर किसी बड़ी बाधा के पूर्ण होने के बाद सेना गुरुवार को (आज) कुछ शुरुआती पैट्रोलिंग शुरू करेगी और आने वाले दिनों व हफ्ते में इसे धीरे-धीरे बढ़ायेगी। अब आप समझ सकते हैं कि वास्तविक स्थिति क्या है।
यह खबर आज इंडियन एक्सप्रेस में लीड है। शीर्षक है, दो बिन्दुओं पर डिसएंगेजमेंट पूरा, गश्ती की शुरुआत के लिए सब तैयार। खबर के अनुसार भारत में चीन के राजदूत ने एक्स पर कहा है कि चीन और भारत के संबंध एक नई शुरुआत बिन्दु पर हैं। हिन्दुस्तान टाइम्स में यह खबर पहले पन्ने से पहले के अधपन्ने पर लीड है। शीर्षक है, डिसएंगेजमेंट पूरा, गश्ती जल्दी शुरू होगी। दि एशियन एज में लीड मोदी के चुनाव प्रचार की खबर है जो आज शीर्षक है। एलएसी की खबर तीन कॉलम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की फोटो के साथ है जो टाइम्स ऑफ इंडिया में है पर यहां यह खबर लीड नहीं है। अमर उजाला में यह खबर दूसरे पहले पन्ने पर लीड है। पहले पन्ने की लीड दीयों से जगमगा उठी अयोध्या है। रिकार्ड बनाने का यह काम कई साल से चल रहा है। हर साल रिकार्ड बनने के बाद दीये से तेल बटोरने वालों की खबर सोशल मीडिया पर होती है। इसपर मित्र पंकज चतुर्वेदी ने बताया है कि अयोध्या में तगड़ी व्यवस्था थी कि कोई गरीब दीयों से तेल लूट न सके। जैसे ही फोटो खिंचे, रिकार्ड बना दीयों को सफाई कर्मचारियों से सरयू में डलवा दिया गया। यह तेल नदी नें रहने वाले जीवों और जल दोनों के लिए अमावस्या ले आया। इसे बाद में देखेंगे। नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, पूर्वी लद्दाख से हटे सैनिक। उपशीर्षक है, गतिरोध वाले दो स्थानों – डेमचोक और देपसांग में जल्द शुरू होगी गश्त। द टेलीग्राफ में यह खबर सिंगल कॉलम की है। कुल मिलाकर, कहा जा सकता है कि चुनाव प्रचार शुरू करने से पहले चीन सीमा पर एक बड़ा काम करने की खबर प्रचारित की गई। जो कहा गया था और जो हुआ वह महत्वपूर्ण नहीं है। कुछ तो हुआ ही है। प्रचार यथास्थिति से बेहतर है।
आज की दूसरी दिलचस्प खबर द टेलीग्राफ की लीड है। तीन कॉलम की इस खबर का फ्लैग शीर्षक है, साजिश रचने वाले का नाम आधिकारिक तौर पर घोषित, भारत मौन। मुख्य शीर्षक है, वह व्यक्ति अमित शाह है : कनाडा। यह खबर नई दिल्ली डेटलाइन से अनिता जोशुआ की बाईलाइन के साथ छपी है। टाइम्स ऑफ इंडिया में यह खबर सेकेंड लीड है। बिना डेटलाइन के टाइम्स न्यूज नेटवर्क की इस खबर का शीर्षक हिन्दी में कुछ इस तरह होगा, कनाडा ने माना कि भारतीय अधिकारियों के नाम अमेरिकी पेपर को लीक किये हैं। पाठकों की सुविधा के लिए इस खबर के साथ हाईलाइट किये गये अंश को हिन्दी में बताना जरूरी है। मोटे तौर पर अस्पष्ट सबूत शीर्षक के तहत लिखा गया है, कनाडा के एनएसए नथाली ड्रोविन ने संसदीय पैनल से कहा कि कथित गलत सूचना फैलाने का मुकाबला करने के लिए वाशिंगटन पोस्ट को सूचना लीक की गई थी। भारत की कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं है पर सरकारी सूत्रों ने नई दिल्ली में रायटर से कहा कि कनाडा का नवीनतम दावा बहुत कमजोर और अस्पष्ट सबूत पर आधारित है। मुझे लगता है कि शीर्षक इसी पर है। वरना खबर में कहा गया है, यह सोच समझकर लिया गया निर्णय था … ताकि रिकार्ड दुरुस्त किया जा सके।
भारत में खबर लीक करना साजिश की तरह देखा और समझा जाता है और ऐसा किसी को फंसाने के लिए किया जाता है। कई उदाहरण हैं। इसलिए, पहली नजर में शीर्षक से मुझे लगा कि लीक करना स्वीकार किया गया है मतलब खबर गलत है। टाइम्स ऑफ इंडिया ने इस महत्वपूर्ण मामले में द टेलीग्राफ की तरह आर-पार लिखने की बजाय शीर्षक को भ्रम फैलाने वाला बना दिया है क्योंकि सरकारी दावा ऐसा ही है। पर खबर यह है कि लीक करना स्वीकार करने का मतलब गलत सूचना देना नहीं होता है। एक तरह से पुष्टि करना भी है जो द टेलीग्राफ के शीर्षक से झलकता है। यहां खबर में कहा गया है, कनाडा के ग्लोब एंड मेल ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसमें नताली ड्रोविन और उप विदेश मंत्री डेविड मोरिसन की पहचान उन लोगों के रूप में की गई थी जिनने सूचना दी थी। भारत में कई बार ऐसा नहीं होता है। आज भी डिसएंगेजमेंट वाली खबर में नाम या पदनाम नहीं है। मुद्दा यह है कि खबर के अनुसार रिपोर्ट के आरोपों में एक यह था कि भारत के गृहमंत्री ने देश (कनाडा) में खालिस्तान समर्थक अलगाववादियों पर हमले की अधिकृत किया था। उप विदेश मंत्री डेविड मोरिसन संसदीय समिति की सुनवाई में मौजूद थे और उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने इसकी पुष्टि की थी। उप मंत्री के रूप में उन्होंने बताया कि सूचना उन्होंने अपनी ओर से नहीं दी थी और जब उनसे पूछा गया तो उनने इसकी पुष्टि की। इस तरह, कनाडा के आरोप की पुष्टि हुई है पर खबर है, लीक करना स्वीकार किया। दोनों में जो अंतर है, वह बना रहेगा। मैं सिर्फ रेखांकित कर रहा हूं।
इंडियन एक्सप्रेस में भी यह खबर ऐसे ही है। दो कॉलम में छपी इस खबर का शीर्षक चार लाइनों में है। ऊपर फ्लैग शीर्षक और फिर दो लाइन का उपशीर्षक भी है। फ्लैग शीर्षक है, वाशिंगटन पोस्ट को लीक। मुख्य शीर्षक है, कनाडा के मंत्री ने माना कि उन्होंने अलगवादियों के खिलाफ अभियान के पीछे (अमित) शाह के होने की ‘पुष्टि‘ की। उपशीर्षक है, कनाडा के सुरक्षा सलाहकार ने दावा किया कि ट्रुडो का कार्यालय ‘रणनीति’ से वाकिफ है। दि एशियन एज में यह खबर चार कॉलम में खबर की तरह है। शीर्षक है, कनाडा ने अपनी जमीन पर सिख अलगाववादियों पर हमले के आदेश देने का आरोप अमित शाह पर लगाया। उपशीर्षक है, कनाडा वालों ने सूचना लीक करने की बात मानी। दूसरा बुलेट है, भारत ने कहा, ट्रुडो ने सबूत के बिना संबंध बिगाड़ लिये। आज की इन दो खबरों से सरकार के लिए अखबारों के हेडलाइन मैनेजमेंट का काम स्पष्ट होता है। मुझे लगता है कि यह योजना बनाकर तैयारी करके नहीं किया जा सकता है। यह मीडिया में संघ समर्थकों और प्रचारकों को समय पर प्लांट कर दिये जाने के कारण ही संभव हो पा रहा है। हालांकि वह विस्तृत अनुसंधान का विषय है वरना खबर की जगह तय करने की पहली जरूरत होती है – किसने दी है। इसमें यह भी महत्वपूर्ण है कि खबर वही है जो छिपाई जाती है।
सरकारी योजनाएं और प्रचार
उदाहरण के लिए सरकार की आयुष्मान योजना को लीजिये। कल आपने उसकी खबर पढ़ी। सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के स्पष्टीकरण और आरोप हैं। इनमें कहा गया है कि आयुष्मान योजना की शर्तें ऐसी हैं कि उसका लाभ बहुत कम लोगों को मिलेगा और इस तरह यह योजना प्रचार के लिए ही है। जनता के लाभ के लिए नहीं है जबकि दिल्ली सरकार या पश्चिम बंगाल सरकार की योजना बेहतर है। ऐसे में अखबारों का काम था कि उसके बारे में बताते, उसकी चर्चा करते। आज वह सब तो नहीं है, द टेलीग्राफ की एक खबर है जो बताती है कि राजस्थान सरकार की बहुप्रचारित विकलांगता योजना का लाभ 22 साल की गुड़िया को इसलिए नहीं मिल रहा है कि वह हाथों के बल चलती है। इस कारण उसकी उंगलियों के निशान मिट गये हैं और उनका मिलान नहीं हो रहा है। यह दिलचस्प है कि विकलांगता योजना में बिना उंगली वालों के लिए कोई और तरीका नहीं है इसलिए उसे इसका लाभ नहीं मिल रहा है और रिकार्ड में इसे दर्ज करने की बजाय यह बता दिया गया है कि वह बाहर है या राज्य में (अब) नहीं रहती है। कहने की जरूरत नहीं है कि सरकारी योजनाएं इतनी लचर नहीं हो सकती हैं और अगर हैं तो अखबारों का काम है कि ऐसी खामियों को प्रचारित-प्रसारित करें ताकि जनहित में इन्हें दुरुस्त किया जा सके। पर ज्यादातर अखबार जब सरकार के प्रचारक हो जायेंगे तो ऐसे काम कौन करेगा? अखबार ने लिखा है कि इस संबंध में राजस्थान के मुख्य सचिव को भेजे गये मेल का जवाब नहीं आया है। यह डबल इंजन वाली सरकार की कार्यशैली है या जनता को उससे मिलने वाला लाभ है पर इसकी चर्चा राजस्थान के अखबारों ने की होती और मामला ठीक हो गया होता तो ऐसे पीड़ित नहीं होते।
दिल्ली में वायु प्रदूषण
इन और ऐसी खबरों के बीच दिल्ली में वायु प्रदूषण की खबर पर चर्चा रह गई। आप जानते हैं कि दिल्ली में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध हैं लेकिन इसे हिन्दुओं के त्यौहार से जोड़ दिया गया है और पिछले साल भाजपा सांसदों पर भी पटाखे चलाने के आरोप थे। इस बार दिल्ली के मंत्री गोपाल राय ने उपराज्यपाल से अपील की थी कि पटाखों की बिक्री पर रोक लगायें पर उसका जो भी हुआ पहले पन्ने की खबर नहीं बनी। अखबार गश्ती शुरू होने का प्रचार करने में लगे थे और वह भी शुरू नहीं हुई। दिल्ली में दीवाली पर पटाखों से प्रदूषण की खबर आज हिन्दुस्तान टाइम्स में लीड है। इसके साथ एक और खबर है जो बताती है कि प्रशासन इस मामले में कितना अगंभीर है। इस खबर का शीर्षक है, पूर्ण प्रतिबंध के बावजूद पटाखे बेरोक-टोक चलाये जा रहे हैं। कहने की जरूरत नहीं है कि दिल्ली में प्रदूषण के लिए हरियाणा, पंजाब में पराली जलाने को भी जिम्मेदार माना जाता है। किसानों पर जुर्माने की खबर तो आई थी लेकिन आतिशबाजी नहीं रोकी जा सकी है तो उसके मायने हैं पर खबर वैसी नहीं है जैसी होनी चाहिये। कहने की जरूरत नहीं है कि बीमार लोगों के लिए यह भारी मुसीबत है और जो बीमार नहीं हैं उन्हें यह बीमार बना सकता है।
फ्रेंच राजदूत का फोन मिला हिन्दुस्तान टाइम्स में पहले पन्ने पर छपी खबर के अनुसार दिल्ली में चांदनी चौक इलाके के दरीबां कला में फ्रेंच राजदूत का फोन चुरा लिया गया था और पुलिस ने इसे खोज निकाला। हालांकि इसमें 10 दिन लग गये। फोन छीनना और चोरी होना आम है। कायदे से ऐसी घटनाएं घटनी ही नहीं चाहिये और छीने हुए फोन बरामद कर लिये जायें तो ऐसी घटनाएं होंगी ही नहीं। पर आम आदमी का फोन खो जाये तो बहुत कम मिलता है और इसका संबंध किसी बड़े अपराध से हो तो महीनों बाद भी जरूर मिलता है। कुल मिलाकर यह पुलिस की इच्छा शक्ति का मामला है। आम आदमी के मामले में वह अलग है और विदेशी राजदूत के मामले में बिल्कुल अलग। इसीलिए आपका फोन छीन लिया जाये तो खबर नहीं छपेगी। विदेशी राजदूत का मिल गया तो खबर है। पूरा मामला प्रचार का है और सरकार की छवि बनाने से लेकर गृह मंत्री की छवि बनाए रखने की कोशिश अखबार कर रहे हैं। ऐसे में सलमान खान को धमकी मिली भी आज खबर है और इसमें बताया गया है कि धमकी देने वाले को गिरफ्तार कर लिया गया है। पप्पू यादव को भी धमकी मिली थी पर धमकी देने वाला कोई और है। इसलिए उनने सुरक्षा मांगी है। पता नहीं उसका क्या हुआ – आज पहले पन्ने पर तो कोई खबर नहीं है। हालांकि उन्हें धमकी मिलने और सुरक्षा मांगने की खबर भी मेरे अखबारों में पहले पन्ने पर नहीं रही। कोई अपवाद हो तो ध्यान नहीं है।


