एक मीडिया संस्थान में पत्रकारों को मेंटली टॉर्चर कर कराया जा रहा काम!

अगर किसी कम्पनी में मेंटली टार्चर किया जाए तो क्या आप उस कम्पनी में काम करना चाहेंगे? आपका जवाब होगा बिलकुल भी नहीं। मगर आप कोरोना के वक्त में बरोजगारी की मार झेल चुके हों, और आपको उस नौकरी को पाने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ी हो तब आप क्या करेंगे?

आप भी इस नौकरी में बने रहने के लिए अपनी पूरी मेहनत के साथ खुद को उस नौकरी में झोंक देंगे। मगर फिर भी आपके काम को पसंद नहीं किया जाएगा, और आपको हर रोज टर्मिनेशन की धमकियाँ दी जाती रहेंगी। कभी आपको क्वालिटी को लेकर धमकाया जाता है, और अगर आपके काम की क्वालिटी अच्छी है भी तो आपको क्वांटिटी के लिए धमकाया जाता है।

ऐसा ही एक हिंदी भाषी दैनिक समाचार पत्र प्रकाशन कम्पनी है जिसका मुख्यालय जयपुर में है, मगर इसके कई सारे ब्रान्च हैं जो पूरे भारत में फैले हुए है। इनहि में से एक ब्रांच नोएडा में भी है। सभी ब्रांचेस के बारे में तो कहा नहीं जा सकता की किस तरह से काम करवाया जाता है, मगर नोएडा वाले ब्रांच में मेंटल टार्चरिंग करके काम करवाया जाता है। यहां हर रोज लोगों को टर्मिनेशन की धमकियां दी जाती है। कहा जाता है कि आपकी खबरों पर पेज व्यूज नहीं आ रहे, ऐसी खबरें करों जिससे पेज व्यूज आए। अब खबरें जो आएंगी राइटर वहीं तो लिखेगा। अपनी मन से तो कुछ लिखेगा नहीं। और रही बात खबरों की तो इनके पास कुछ डिपार्टमेंट में रिपोर्टर्स नहीं है। राइटर कई खबरें दूसरें चैनलों के माध्यम से बनाता है, जैसा कि एंटरटेनमेंट डिपार्टमेंट को ले लिया जाए। मगर इससे भी इन्हें ये प्रोब्लम है कि ये खबर पहले ही दूसरा चैनल कर चुका है। ये समझ पाना बिल्कुल ही मुश्किल है कि हम खबरें कहां से लाए। क्या आप चाहते हैं कि हम खुद जाकर रिपोर्टिंग करके आपको क्वालीटी और क्वाटिंटि के साथ खबरें दें।

रही बात क्वालीटी की, तो यहां क्वालीटी वाली खबरें वो है जिनपर पेज व्यूज अच्छा खासा आए। क्या आपको लगता है की व्यूज हर खबरों पर आ सकते हैं। कुछ खबरें ही ऐसी होती हैं जिसे पढ़ने का लोगों को चाव होता है। और ऐसा भी नहीं है कि व्यूज बिल्कुल ही नहीं आते, व्यूज हर खबरों पर आते हैं। इन्हें वैसी न्यूज चाहिए जो लॉन्ग टाइम तक व्यूज देती रहे। कुछ न्यूज ऐसी होती तो हैं, लेकिन सारी खबरें ऐसी नहीं हो सकती।

और बात करें क्वांटिटी की तो यहां सभी राइटर मिनिमम 8 खबरें करते हैं ज्यादा से ज्यादा 10। मगर ये रोज 12 से 14 खबरों की मांग करते हैं। और एक बात, जो यहां आकर पता चली कुछ राइटर ऐसे भी हैं जिन्हें 25-25 खबरें करने के लिए कहा गया है। साथ ही कुछ ऐसे कंटेट लिखने के लिए कहा जाता है कि ऐसी खबरें लिखे जो प्रिंट में भी जाए और डिजिटल में भी डाली जा सकें। उन राइटर्स को इस टार्गेट को पूरा करने के लिए अपना पूरा दिन देना पड़ता है। और न कर पाने पर वहीं टर्मिनेशन वाली धमकियाँ दी जाती है। साथ ही यहां सैलरी के साथ भी वहीं प्रॉब्लम है। सैलरी से PIL कटता तो है, मगर पूरा नहीं मिलता। किसी को 50% भी मिल जाता है तो किसी को 25%। अब ये किस हिसाब से दी जाती है, ये समझ पाना बहुत मुश्किल है।

यहां प्रॉब्लम सैलरी को करने से ज्यादा धमकियों से है। सैलरी आप पूरी देते नहीं और ऊपर से धमकियां भी देते हैं, वो भी रोज। कहा जाता है कि आपके व्यूअर्स जैसी खबरे पढ़ते हैं वैसी खबरें लिखें। जब वेबसाइट का एनालिसिस चेक किया गया तो लगभग वैसी खबरे हीं व्यूअर्स पढ़ते हैं जिसमें कोई अचंभव वाली बात हो या फिर बिना कपड़े का हॉट तस्वीरें और बेडरुम वाली खबरों पर ज्यादा व्यूअर्स आते हैं या फिर वो खबर एस्ट्रोलॉजी वाली हों। और कुछ फेक न्यूज होती हैं उन पर लोग ज्यादा ध्यान देते हैं। ऐसी खबरें लिखी भी जाती हैं, मगर साथ में ये भी कहा जाता है की वलगेरिटी वाली खबरें नहीं करनी, जिसके बाद राइटर ने वैसी खबरें करनी बंद कर दीं। जिसकी वजह से पेज पर व्यूज आने कम हो गए। तो इसमें राइटर की ही गलती निकाली जाती है, कि पहले जैसा काम क्यों नहीं कर रहे, ठीक से काम करो वरना टर्मिनेट कर देंगे या फिर खुद अपना रास्ता ढुंढो। ऐसा नहीं है कि ये सिर्फ एक एम्पलोयके साथ हो रहा हो, ऐसा वहां काम कर रहे सभी लोगों के साथ हो रहा है।

कई बार तो ऐसा होता है कि राइटर ऐसी खबरें खोज निकालता है, जो अभी कहीं चली नहीं होती। मगर जब लिखने के लिए पूछा जाता है तो मना कर देते हैं। फिर वही खबर किसी बड़े चैनल पर चल जाती है तब कहा जाता है की ये इम्पोर्टेंट खबर लिखी क्यों नहीं गई। साफ तौर पर ये चित भी अपनी करते हैं और पट भी अपनी। हर तरफ से राइटर ही गलत है। कईं बार तो ऐसा भी हुआ है कि एंटरटेनमेंट खबरों में बिकनी और न्यूड खबरें ये खुद करने के लिए दे देते हैं। और अगर वहीं खबरें राइटर चूज करता है तो कहते हैं, यहां ‘वलगेरिटी एंड ओल’ नहीं फैलानी। अब राइटर करे तो क्या करे। इन धमकियों की वजह से काम में मन लगा पाना तो बिल्कुल ही मुश्किल है। इन धमकियों के बीच न राइटर क्वालिटी वाली खबरें कर पाएगा न क्वांटिटी वाली। अब आप बताइए इसके आगे क्या करना चाहिए। आपको क्या लगता है, हर रोज टर्मिनेशन की धमकियां देना मेंटल टार्चर करना है या नहीं?



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Comments on “एक मीडिया संस्थान में पत्रकारों को मेंटली टॉर्चर कर कराया जा रहा काम!

    • Jai Prakash Sharma says:

      इतना लिखा और आखिर तक आपने उस डिजिटल मीडिया यानी भास्कर या etv भारत, पत्रिका किसी का नाम तो लिखा होता।

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