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आज के अखबार : बताने से बच रहे हैं कि बेहद अगंभीर और हल्के लोगों की पार्टी है सत्तारूढ़ भाजपा

संजय कुमार सिंह

मनमोहन सिंह की तारीफ पढ़ते हुए ख्याल आया कि उन्होंने अपने मातहत या अपने अधिकार से किसी अयोग्य को किसी पद पर नहीं बैठाया। उनके दस साल के कार्यकाल में न तो मंत्री ऐसे बदले जाते थे ना उनका परिचय ऐसा होता था जैसा उनके बाद के मंत्रियों का है। मैं नहीं कहता कि भाजपा में अच्छे या योग्य लोग नहीं हैं पर जो भिन्न पदों पर बैठाये गये हैं उनमें से ज्यादातर की बात कर रहा हूं। ऐसे लोगों में माधवी पुरी बुच, बृजभूषण शरण सिंह और गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी ही नहीं, पूर्व तड़ी पार और पूर्व शिक्षा मंत्री भी हैं जिन्हें मंत्री बनने से पहले डिग्री और सर्टिफिकेट का अंतर नहीं मालूम था। यह सब इसलिए कि कांग्रेस नेताओं के बारे में कहा जाता है कि वे जमानत पर हैं। मुझे लगता है कि जज की हत्या का आरोपी होना, उसकी जांच नहीं होने देना जमानत पर होने से बेहतर नहीं है। जमानत पर वही होता है तो कानून को मानता है। वरना जमानत लेकर भागने वाले भी हैं और जमानत नहीं मिलने तथा बार-बार पैरोल मिलने के सब उदाहरण हैं। जज लोया की मौत की जांच महाराष्ट्र सरकार को करानी है तो महाराष्ट्र में गैर भाजपा सरकार ही नहीं पाई। अब चुनाव आयोग का भी प्रमाणन मिल गया है।

आज के अखबारों मनमोहन सिंह के निधन पर भाजपा कांग्रेस की भिड़ंत की खबरें हैं। दि एशियन एज में तीन कॉलम की एक खबर का शीर्षक है, ‘घटिया राजनीति’ : अंतिम संस्कार को लेकर भाजपा, कांग्रेस में टकराव। उपशीर्षक है, पहले सिख प्रधानमंत्री का अपमान : राहुल; नई नीचता :पात्रा। टाइम्स ऑफ इंडिया में सिंगल कॉलम का एक शीर्षक है, बैठने की योजना पर सरकार-कांग्रेस में कड़वा विभाजन दिखा। इंडियन एक्सप्रेस का एक शीर्षक है, स्मारक विवाद कांग्रेस के हमले का नेतृत्व राहुल और प्रियंका कर रहे हैं, नड्डा ने कहा, साइट शॉर्टलिस्ट कर ली गई है। मुझे लगता है कि अगर ऐसा है और कांग्रेस ने अपमान की बात छेड़ ही दी है तो भाजपा को घटिया राजनीति, और दोषारोपण ने उठकर यही बात बतानी चाहिये थी। हालांकि इससे निगम बोधघाट पर राजकीय सम्मान से अंत्येष्टि कराने की भरपाई नहीं हो जायेगी पर हेडलाइन मैनेजमेंट तो ठीक होता। मुझे लगता है कि भाजपा नकारात्मक होने की बजाय तानाशाह होना ही दिखाना चाहती है। हालांकि, अभी वह मुद्दा नहीं है। अमर उजाला और द हिन्दू में अंतिम संस्कार को लेकर दोनों सरकारों में भिड़ंत की खबर नहीं है। अंतिम संस्कार की खबर का शीर्षक है, अनंत यात्रा पर मनमोहन (अमर उजाला) और मनमोहन सिंह का पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ (द हिन्दू)।

आज नवोदय टाइम्स की लीड का शीर्षक है, स्मारक पर छिड़ी सियासत। द टेलीग्राफ की लीड का मुख्य शीर्षक है, फ्लेम एंड फ्यूरी (आग और गुस्सा), उपशीर्षक में भी लिखा है, … आरोप प्रत्यारोप तेज हुए। द टेलीग्राफ में चार कॉलम की एक खबर का श्रेय है, मनमोहन सिंह के प्रति अपमान को लेकर कांग्रेस-भाजपा भिड़े। हिन्दुस्तान टाइम्स में इस खबर का शीर्षक है, “अंतिम संस्कार की व्यवस्था में कांग्रेस ने पूर्व प्रधानमंत्री के अपमान का आरोप लगाया, भाजपा ने पलटवार किया”। इसमें भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा के एक ट्वीट की चर्चा है जिसे मैंने यहां पेश किया है। इस ट्वीट के बारे में मेरा मानना है कि आप सत्तारूढ़ पार्टी के अध्यक्ष हैं, मनोनीत या नये बने नहीं विस्तार वाले – यानी पके-पकाये और मंजे-जमे हुए हैं। कह रहे हैं वह यह कि गांधी परिवार ने ना तो देश के किसी नेता का सम्मान किया है ना उनके साथ न्याय किया है। तब भी नहीं जब वे कांग्रेस के थे। सिद्धांत-हीन कांग्रेस पार्टी के ऐतिहासिक पाप को देश कभी नहीं भूलेगा या माफ करेगा। चलिये मान लिया लेकिन उससे क्या हो जायेगा? आपके और आपकी पार्टी के सत्ता में रहते एक काबिल पूर्व प्रधानमंत्री के अपमान पर आप क्या कहेंगे? कुछ नहीं?  

आप देख सकते हैं कि गांधी परिवार और कांग्रेस पार्टी को इन्होंने एक कर दिया है। आप जानते हैं कि नरेन्द्र मोदी कांग्रेस को यही चुनौती देते रहे हैं कि गांधी परिवार से बाहर का अध्यक्ष बनाकर दिखाये। बना दिया। पर शर्म नहीं आई। उधर भाजपा अध्यक्ष विस्तार पर चल रहा है। भष्टाचार दूर करने आये थे पर पार्टी के कोषाध्यक्ष को केंद्रीय मंत्री बना दिया था ऐसा नहीं है कि कोषाध्यक्ष कोई दूसरा बनाया हो – पद खाली रहा या केंद्रीय मंत्री ही कोषाध्यक्ष रहे। महीनों। कहने की जरूरत नहीं है कि जो पार्टी का कोषाध्यक्ष है वही कमाऊ केंद्रीयमंत्री होगा तो काम का बंटवारा कैसा रहेगा पर बाद में इलेक्टोरल बांड और आर्यन खान की गिरफ्तारी वसूली के लिए होने के आरोपों ने पूरा मामला स्पष्ट कर दिया। अब पार्टी अध्यक्ष कह रहे हैं पाप कांग्रेस कर रही है वह अपने नेताओं का सम्मान नहीं करती है।

मुद्दा यह है कि पहली बार किसी पूर्वप्रधानमंत्री का अंतिम संस्कार निगम बोध घाट पर हुआ है। कल यही द हिन्दू का उपशीर्षक था। कांग्रेस उसे प्रधानमंत्री औऱ सिख नेता का अपमान कह रही है खबर तो यह कार्रवाई थी ही। आज भी सभी अखबारों में भाजपा की यह महानता पहले पन्ने पर है। लेकिन भाजपा अध्यक्ष का यह बयान किसी बच्चे के बचाव जैसा लगता है। भक्त, प्रचारक और ट्रोल सेना पीवी नरसिंह राव की याद कर रही हैं। प्रणब मुखर्जी की बेटी अपने पिता का समय – लेकिन भाजपा ने स्मारक स्थल बनाने का समय तय करने में देर कर दी, अटल बिहारी वाजपेयी के समय इससे कम समय में कर लिया था फिर भी भाजपा अध्यक्ष का यह बयान किसी बच्चे का बचाव लग रहा है। अगर कांग्रेस ने पीवी नरसिंह राव के मामले में अपने नेता का अपमान कर ही दिया तो आप भी अपने नेता का करते, कांग्रेस तो करती ही है, जैसा आप बता रहे हैं। सरकार में आप थे अपनी सरकार की कोई काबिलियत तो दिखाते। बाकी सरदार पटेल का स्मारक बन गया जरूरत हुई तो मनमोहन सिंह का भी बन जायेगा और पटेल के स्मारक से देश परिवार को फर्क पड़ा होगा तो इससे भी पड़ेगा लेकिन वो सब तो बाद की बातें हैं।

कहने की जरूरत नहीं है कि यह स्थिति मनमोहन सिंह पर लगाये गये झूठे आरोपों के कारण बनी है और हेडलाइन मैनेजमेंट के कारण अगर प्रिंट मीडिया ने तब साथ दिया तो अब वैसा साथ नहीं दे पाया और तभी आज तीसरे दिन भी मनमोहन सिंह ही लीड हैं। भाजपा अपना बचाव नहीं कर पा रही है और मनमोहन सिंह के लिए उतना ही किया जाता जितना अटल बिहारी वाजपेयी के लिए किया गया था तो मोदी सरकार को महान माना जाता और हेडलाइन मैनजमेंट तो चल ही रही था पर  महमोहन सिंह के कथित भ्रष्टाचार और उसके प्रचार पर बना भाजपा की राजनीति का प्रासाद हिलता हुआ नजर आ रहा है। भले यह भवन अभी नहीं गिरे पर दरारें स्पष्ट दिखने लगी हैं। राजनीतिक योग्यता की पोल पहले खुल गई है और वह गैर कानूनी भले न हो अनैतिक तो है ही। जो भी हो, मनमोहन सिंह के निधन के मीडिया कवरेज ने भाजपा का भारी नुकसान किया है और इसे वह राजनीतिक तौर पर संभाल नहीं पाई से पता चलता है कि उसके पास राजनीति कौशल है ही नहीं। लड़कियों को वोट डालने से रोक कर कॉलेज के और मुसलमानों को वोट डालने से रोक वैसे चुनाव जीते जा सकते हैं लेकिन उससे सत्ता चलाना नहीं आयेगा। खुद से योग्य लोगों को अधिकार देने वाला हमेशा डरता है कि वह कब्जा न करे ले।      

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