हिंदी मीडिया पर केंद्रित उपन्यास ‘बावळीबूच’ अब अमेजन पर उपलब्ध

”एक अबला जिसका जिस्म दिल्ली के जीबी रोड, मुंबई के कमाठीपुरा और कोलकाता के सोनागाछी में बार-बार छलनी हुआ, लेकिन नारीशक्ति बन उसने देश के गौरव में दो सितारे जड़ दिए। घर से ठुकराया गया एक मजदूर, जो कइयों के लिए मसीहा बना। एक उद्योगपति, दुनिया को लूट जिसमें स्वदेश प्रेम जागा, लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के जरिये सैकड़ों घरों को बर्बाद कर जो तिहाड़ पहुँचा। एक लड़का जो छाती में फटे फेफड़े को लेकर भी गिद्धों की पलटन से भिड़ गया। अलग-अलग किरदारों में यह आपकी जिंदगी है, यह आपकी कहानी है।”

बावळीबूच : ये आपकी जिंदगी है-ये आपकी कहानी है.

मीडिया दुकानों-घरानों की सरल-स्पष्ट-सपाट कहानी है बावळीबूच. हिंदी मीडिया पत्रकार मतलब हर वक्त गर्दन पर तलवार. गले पर तने हथियार का सिरा कभी दूसरे के हाथ में होता है, जिनकी जिंदगी में ऐसा नहीं होता है वो खुद ही अपनी जड़ें सड़ांध कर चुके हैं.

हालात 10-12 साल पहले जैसे थे, आज उससे बदतर ही हुए हैं. भविष्य आज पर टिका है, सो आगे नर्क का दायरा बढ़ना तय है.

35 साल की उम्र में हार्ट अटैक, 45 में ब्रेन हैमरेज. ये है पत्रकारों का जीवन. जो बचे हैं उन्हें पता है जिंदगी में कितना स्वर्ग है!!

वो नौनिहाल पत्रकार जरूर पढ़ें, जिनके मन में क्रांति दबी बैठी है. जो फंस चुके हैं वो सुकून की उम्मीद में पढ़ें. योजना बना बनाकर जिन्होंने मीडिया को बर्बाद कर दिया है वो अपना भविष्य इस नोवेल में साफ-साफ देख सकते हैं.
हां, अपवाद वो कीड़ा है जो युग परिवर्तन में भी अस्तित्व बचाए रह गया, उनको सलाम.

उपन्यास के लेखक सुनील कुमार हैं.

नोट : नोवेल में रत्ती भर भी ज्ञान नहीं दिया गया है.

उपन्यास खरीदने के लिए अमेजन पर Bawali Booch novel लिख कर सर्च मारें.

  • भड़ास की पत्रकारिता को जिंदा रखने के लिए आपसे सहयोग अपेक्षित है- SUPPORT

 

 

  • भड़ास तक खबरें-सूचनाएं इस मेल के जरिए पहुंचाएं- bhadas4media@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *