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राजस्थान

हरीश गुप्ता पर कई मुकदमे इसलिए दर्ज करवाए गए ताकि वह फिर कभी बेबाकी से लिखने की हिम्मत नहीं जुटा सकें!

राजस्थान में पत्रकारों पर FIR दर्ज करा रही भजन सरकार के नाम एक वरिष्ठ पत्रकार का खत पढ़ें

प्रतिष्ठा में,
श्री भजनलाल शर्मा, मुख्यमंत्री,
राजस्थान, जयपुर।

सम्मानीय शर्मा जी, सादर वन्दे। मेरी जानकारी में आया है कि वरिष्ठ पत्रकार तथा राजस्थान श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष श्री हरीश गुप्ता के खिलाफ कतिपय स्थानों पर इसलिए मनगढ़ंत, आधारहीन और बेबुनियाद मुकदमे दर्ज करवाए गए है क्योंकि वे कुछ लोगों के खिलाफ खबरों का प्रकाशन कर रहे थे।

यदि कोई पत्रकार किसी व्यक्ति, अफसर और नेता आदि के खिलाफ अपमानजनक खबरों का प्रकाशन करता है या ब्लैकमेल जैसे घृणित कार्य को अंजाम देता है तो इसके लिए कानून के रास्ते खुले हुए है। पत्रकारिता पर कालिख पोतने वाले पत्रकारों के खिलाफ दीवानी और फौजदारी दावा करने का प्रावधान है।

मान्यवर, यदि हरीश गुप्ता ने किसी को ब्लैकमेल करने की गरज से खबरों का प्रकाशन किया गया है तो निश्चित रूप से उसे सजा मिलनी चाहिए। लेकिन मुझे जो जानकारी मिली है उसके मुताबिक गुप्ता के खिलाफ कतिपय मुकदमे इसलिए दर्ज करवाए गए ताकि वह फिर कभी बेबाकी से लिखने की हिम्मत नहीं जुटा सके। साथ ही निर्भीक तौर पर लिखने वाले अन्य पत्रकारों की कलम भी हमेशा के लिए खामोश हो जाए।

मुझे पता है कि आज के वक्त सच्ची, निर्भीक और निष्पक्ष पत्रकारिता कितना जोखिम भरा कार्य है। मुझे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ी। तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निर्देश पर एक सरकारी गिरोह सक्रिय होकर मुझे प्रताड़ित करने पर आमादा हो गया। स्वयंघोषित गांधी अशोक गहलोत की निगरानी और देखरेख में आधा दर्जन से अधिक हथियारबंद पुलिसकर्मियों ने तमाम कानून और कायदों को दफन करते हुए मुझे रात 9 बजे घर से अर्द्धनग्न अवस्था में गिरफ्तार किया।

खैर! अंत में सच्चाई की जीत हुई और मेरे खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को उच्च न्यायालय ने खारिज कर दिया। मेरा कितना वक्त और धन बर्बाद हुआ तथा कितनी मानसिक वेदना झेलनी पड़ी, इसका मुझे और मेरे परिवार को ही एहसास है।

मेरा एक पत्रकार होने के नाते यही निवेदन है कि केवल भाषण देने से लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ स्थायी तौर पर जीवित नहीं रह सकता है। इसके लिए जरूरी है ईमानदार पत्रकारों के हितों की रक्षा की जाए। मेरा यह भी आग्रह है कि सभी प्रकरणों को क्लब करते हुए किसी आईपीएस स्तर के अधिकारी से जांच कराई जाए। जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक हरीश गुप्ता को गिरफ्तार नहीं किया जाए। वह कोई आतंकवादी अथवा फरेबी नहीं है जो सबूतों को मिटा देगा। जो गिरफ्तारी आज करनी है, वह एक महीने बाद भी की जा सकती है।

उम्मीद है कि आप अपनी सदाशयता का परिचय देते हुए व्यक्तिगत हस्तक्षेप करेंगे और पत्रकारों को एक सकारात्मक संदेश देंगे। इन मुकदमों की वजह से हरीश गुप्ता को एक कुख्यात अपराधी की मानिंद परिवार से दूर छिपकर रहने को विवश होना पड़ रहा है। मुझे पूरी आशा है कि हरीश गुप्ता को राहत प्रदान करते हुए एक अनुकरणीय उदाहरण अवश्य प्रस्तुत करेंगे।

सद्भावी

महेश झालानी

वरिष्ठ पत्रकार

जयपुर

प्रतिलिपि निम्न को प्रेषित है –

श्री जगदीप धनखड़, महामहिम उप राष्ट्रपति
श्री ओम बिड़ला, अध्यक्ष-लोकसभा
श्री सुधांश पन्त, मुख्य सचिव
श्री शिखर अग्रवाल, एसीएस (सीएम)
श्री यूआर साहू, पुलिस महानिदेशक
श्री गौरव श्रीवास्तव, आईजी (सीएमओ)

मूल खबर…

पत्रकार हरीश गुप्ता ने भजनलाल सरकार की कमियां लिखने की चुकाई कीमत, 3 दिन में चार FIR दर्ज

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