भास्कर डिजिटल विंग के नाइट शिफ़्ट के कर्मियों को रेड मारने पहुँचे अफ़सरों ने बंधक बना लिया!

समीरात्मज मिश्रा-

भोपाल में भास्कर के डिजिटल विंग में काम कर रहे एक पत्रकार ने थोड़ी देर पहले बताया कि छापेमारी करने आए अधिकारियों ने आते ही रात्रि शिफ़्ट में वहां काम कर रहे लोगों के मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर लिए और बंधक बना लिया.

पत्रकार के मुताबिक, “सुबह 5:10 से दोपहर 1:00 बजे तक मुझे और मेरे साथियों को एक अपराधी की तरह बैठा कर रखा था. हम लोगों को भूखे प्यासे बैठाए रखा एक बजे तक जबकि हम लोग रात 10 बजे से ही रात्रि शिफ़्ट में काम कर रहे थे. जब हमारे वरिष्ठ साथी लोग वहां पहुंचे तब जाकर हमें मुक्त किया गया.”

समझ में नहीं आ रहा है कि वहां काम कर रहे कर्मचारियों और पत्रकारों से क्या दुश्मनी थी और उनका क्या अपराध था? क्या छापेमारी में शामिल ऐसे अधिकारियों के ख़िलाफ़ किसी दंड का प्रावधान है या नहीं? अधिकारियों को ज़्यादा शंका थी तो मोबाइल फ़ोन ज़ब्त कर सकते थे, उन लोगों को बंधक बनाने की क्या ज़रूरत थी? भास्कर ग्रुप के संचालकों ने कोई अनियमितता की होगी तो उसमें इन कर्मचारियों का क्या दोष है?



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