केंद्रीय श्रम विभाग जयपुर ने भी भास्कर मैनेजमेंट को नोटिस जारी किये

दैनिक भास्कर को सरकारी नोटिसों का जवाब नहीं देने की आदत सी बन गई है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर किसी भी कोर्ट या लेबर ऑफिस की ओर से भेजे गए नोटिसों पर प्रबंधन ने शायद यह नीति बना ली है कि नोटिसों का जवाब ही मत दो, बस टाइम मांग कर समय निकालो। अब यह नीति उन्हीं पर भारी पड़ने वाली है। जयपुर में एडिशनल लेबर कमिश्नर धनराज शर्मा ने दैनिक भास्कर जयपुर के सीओओ संजय शर्मा व एच आर हेड वंदना सिन्हा को अंतिम चेतावनी दी है कि या तो वे पत्रकारों को प्रताड़ित करने वाली याचिका पर जवाब दें अन्यथा एकतरफा कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

विभाग ने यह कार्रवाई सीटू के राज्य सचिव भंवर सिंह की याचिका पर की है। याचिका में बताया गया है कि दैनिक भास्कर जयपुर में काम कर रहे 23 पत्रकारों को मजीठिया वेज बोर्ड की सिफारिेशों के अनुसार वेतन मांगने और इसके लिये सुप्रीम कोर्ट में कंटमेंट याचिका दायर करने पर संस्थान से बाहर कर दिया। 21 पत्रकारों को निलम्बित कर दिया। दो पत्रकारों सुधीर कुमार शर्मा व संजय कुमार सैनी को उनकी बिना सहमति के डेपुटेशन पर गैरकानूनी तरीके से रांची भेजने का आदेश जारी कर दिया।

याचिका में बताया गया है कि यह कार्रवाई औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 क़ी धारा 25 टी व अधिनियम की पांचवी अनुसूचि के अनुछेद 1 व 7 के अनुसार अनुचित श्रम रीति में आता है। अतः दैनिक भास्कर जयपुर  के सीओओ संजय शर्मा  व एच आर हेड वंदना सिन्हा के खिलाफ अभियोजन की अनुमति प्रदान की जाए।  इस अधिनियम में दोषी पाए जाने पर दैनिक भास्कर जयपुर  के दोनों अधिकारियों को 6-6 महीने की जेल हो सकती है।

केंद्रीय श्रम विभाग जयपुर ने भी नोटिस जारी किये

इस बीच केंद्रीय श्रम विभाग जयपुर ने भी भास्कर मैनेजमेंट को मजीठिया वेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं देने, पत्रकारों को प्रताड़ित करने पर नोटिस जारी किये हैं। इसकी सुनवाई 18 जून को शाम 3 बजे विद्याधर नगर जयपुर में रखी गई है। इन सब मामलो को देख रहे जयपुर के एचआर मैनेजर जोगिन्दर सिंह की हालत चपरासी से भी गई बीती हो गई है। पूरे मामले की गोपनीयता बनाये रखने की कोशिश के चक्कर में बाबू से लेकर चपरासी तक के तो सारे काम तो करने ही पड़ रहे हैं पर गोपनीयता भी नहीं रह पा रही है। दूसरी और विभागों, आंदोलनकारी कर्मचारियों के नोटिसों के जवाब देना, उन्हें टाइप करना, डाक के लिए भिजवाना जैसे काम भारी पड़ रहे हैं। 

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